एक और विधायक का सिंधिया को छोड़कर काँग्रेस में जाना क्या कहता है? क्या उनके साथ काँग्रेस से बीजेपी में गए नेताओं का भरोसा उनसे उठ रहा है? सिंधिया इस भगदड़ को रोक क्यों नहीं पा रहे हैं? क्या बीजेपी हाईकमान अब उन्हें ख़त्म करने पर तुल गया है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























