सिंधिया किसी भी तरफ की नहीं हो पाए?
एक और विधायक का सिंधिया को छोड़कर काँग्रेस में जाना क्या कहता है? क्या उनके साथ काँग्रेस से बीजेपी में गए नेताओं का भरोसा उनसे उठ रहा है? सिंधिया इस भगदड़ को रोक क्यों नहीं पा रहे हैं? क्या बीजेपी हाईकमान अब उन्हें ख़त्म करने पर तुल गया है?