विपक्षी दलों को जोड़ने के केसीआर की कोशिशों से किसको फ़ायदा होगा? क्या केसीआर खुद को प्रोजेक्ट करने के लिए विपक्षी दलों का मेला लगा रहे हैं? क्या इससे विपक्षी एकता के प्रयासों को धक्का लगेगा? क्या क्षेत्रीय दल काँग्रेस से डरकर अलग गोलबंदी कर रहे हैं? क्या क्षेत्रीय दलों को ये लग रहा है कि काँग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी इसलिए उन्होंने खुद को एकजुट करना शुरू कर दिया है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























