तीन फ़रवरी को लद्दाख के क़रीब बीस हज़ार से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतर आये थे । वे अपने लिए पूर्ण राज्य की माँग कर रहे हैं । यह उस शहर की लगभग एक तिहाई वयस्क आबादी के बराबर है । अब सोनम वांगचुक इन्हीं माँगों के लिए आमरण अनशन पर जा रहे हैं । यह सब क्यों हो रहा है?
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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