सरकार के भारी लवाजमे, टीवी चैनलों और आईटी सेल के कंठफाड़ उद्घोष और बीजेपी की पूरी मशीन की क़दमताल के बावजूद नये पैकेज का असर फुस्स है । किसी स्टेकहोल्डर में कोई जोश नहीं । मज़दूर सड़कों पर हैं या बैरीकेड्स पर पुलिस से मुक़ाबले में । किसान ख़ामोश । नौकरीपेशा कन्फ्यूज और व्यापारी मौन ।विशेषज्ञों ने तो इसे सिरे से ख़ारिज कर दिया । ऐसा क्यों हुआ इसे विस्तार से समझा रहे हैं रिटायर्ड IAS राजू शर्मा शीतल पी सिंह के सवालों के जवाब में।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













.jpg&w=3840&q=75)








