सरकार ने बजट में एक बार फिर से ये सोचकर सरकारी संपत्तियों को बेचने का दाँव खेला है कि कोरोना की वज़ह से विरोध नहीं होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। किसान आंदोलन की तरह विरोध का एक मोर्चा कर्मचारियों की ओर से भी खड़ा हो सकता है। पेश है जाने-माने अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार से वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की बातचीत
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























