इफ़्तख़ार अली, जम्मू-कश्मीर पुलिस के 27 साल के वफादार कांस्टेबल, को गलत जानकारी के आधार पर पाकिस्तानी नागरिक ठहराकर निर्वासित करने का आदेश मिला। 1965 के युद्ध के बाद उनके परिवार ने भारत में शरण ली थी। अटारी बॉर्डर ले जाए गए इफ़्तख़ार और उनके भाई-बहनों को हाईकोर्ट ने राहत दी। परिवार सलवाह गाँव लौटा, पर सवाल बाकी है—क्या देशसेवकों के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?
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