चुनाव में कोई लहर क्यों नहीं दिख रही? क्या कोई अंडर करंट है जिसे कोई पढ़ नहीं पा रहा? अगर ये बिना लहर का चुनाव हुआ तो क्या होगा? किसको नुक़सान और किसको फ़ायदा होगा?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























