टीएमसी के बागी 59 लोगों में से कई सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। TMC में टूट के संकेत तब साफ़ नज़र आए जब 31 मई की बैठक में 80 विधायकों में से सिर्फ़ 19 ही पहुँचे।
टीएमसी में बुधवार को तब बड़ा संकट आ गया जब पार्टी के 59 बागी विधायक कोलकाता स्थित विधानसभा पहुंच गए। वह मुख्य विपक्षी दल का दावा ठोकने की तैयारी में हैं। इससे ममता बनर्जी वाले गुट में भारी संकट पैदा हो गया है। ये बागी विधायक पूर्व मंत्री जावेद अहमद खान, अरूप रॉय, चंद्रनाथ सिन्हा और सबीना यासमीन समेत कई बड़े नेता हैं। इनमें से कई पर सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है। बागियों के नेता ऋतब्रत बनर्जी सबसे पहले विधानसभा पहुंचे। दावा किया गया है कि उनके पास 59 विधायकों के हस्ताक्षर वाले पत्र हैं। एंटाली से विधायक संदीपन साहा ने कहा, 'हम अपनी बैठक करेंगे। हमारे पास दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य हैं।' बता दें कि 31 मई को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई बैठक में सिर्फ़ 19 विधायक ही पहुँचे थे और मंगलवार को प्रदर्शन में सांसद व विधायक मिलाकर कुल 9 बड़े नेता ही पहुँचे थे।
एंटी-डिफेक्शन से बचने के लिए क्या ज़रूरी?
टीएमसी के कुल 80 विधायक थे। दो विधायकों- संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया गया। अब संख्या 78 रह गई। एंटी-डिफेक्शन क़ानून से बचने के लिए दो-तिहाई यानी क़रीब 52 विधायकों के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं। दावा किया गया है कि मंगलवार दोपहर तक 57 और बुधवार सुबह तक 59 विधायकों ने बागी गुट के साथ जाने की सहमति दे दी। पहले के संकेत भी साफ़ थे। 6 मई को ममता बनर्जी के घर हुई बैठक में 80 में से सिर्फ 69 विधायक पहुंचे। 19 मई को संख्या घटकर 64 रह गई और 31 मई को सिर्फ 19 विधायक ही आए।बागी क्या कह रहे हैं?
पहले ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सबीना यासमीन ने कहा है कि वे विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस से मिलकर विपक्ष के नेता का फ़ैसला करेंगे। एएनआई के अनुसार विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल की नियुक्ति पर टीएमसी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने कहा, 'मुझे सटीक जानकारी नहीं है। बाहर से पता चला कि 59 हस्ताक्षर हो गए हैं। मैंने भी साइन किए हैं।'
ममता ने लगाया धमकाने का आरोप
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने एक दिन पहले ही मंगलवार को एस्प्लेनेड में दो घंटे का प्रदर्शन किया। उसमें सांसद और विधायक मिलाकर कुल नौ नेता ही शामिल हुए। ममता ने बीजेपी पर टीएमसी को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस विधायकों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रही और उन्हें टीएमसी छोड़ने के लिए कह रही है।
बाग़ियों को बताया मीर जाफर
ममता ने कहा, 'आपने महाराष्ट्र में सत्ता वाली पार्टी को तोड़ा, अब यहाँ भी वही कर रहे हैं। पुलिस विधायकों के घर जा रही है और उन्हें धमका रही है। भ्रष्टाचार के केस वाले विधायकों को कहा जा रहा है कि नई पार्टी बना लो। क्या यह लोकतंत्र है?' ममता ने बागियों को मीर जाफर बताया।
टीएमसी के 3 विधायक बंगाल CM की बैठक में
टीएमसी में एक तरफ़ जहाँ बगावत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ बंगाल में एक और घटना ने लोगों को चौंका दिया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार ममता के करीबी माने जाने वाले टीएमसी के तीन विधायक - अशोक देब, नैना बंदोपाध्याय और कुणाल घोष - नबन्ना में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होते दिखे। घोष हाथ में एक फ़ाइल लिए नबन्ना में प्रवेश करते दिखे। एक दिन पहले मंगलवार को इन तीनों ने चुनाव के बाद हुई हिंसा के विरोध में ममता द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
विवाद की शुरुआत
यह संकट विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ, जिसमें टीएमसी को भारी नुकसान हुआ। विवाद तब और बढ़ गया जब दो टीएमसी विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने वाले प्रस्ताव पर जाली हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया। इस शिकायत के बाद राज्य की सीआईडी ने ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के नंबर 2 अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया। कई विधायकों के बयान भी दर्ज किए गए।तपस रॉय का बयान
बंगाल की पहली बीजेपी सरकार में मंत्री बने तपस रॉय ने सोमवार को फेसबुक पर लिखा कि टीएमसी टूट गई है। मार्च 2024 तक टीएमसी में रहे तपस ने महाराष्ट्र मॉडल का जिक्र करते हुए कहा, 'ऋतब्रत ने 50 विधायकों को स्पीकर से मिलवाया।' उन्होंने कहा कि पार्टी में असंतोष बहुत बढ़ गया है और जल्दी ही महाराष्ट्र जैसा विभाजन हो सकता है।पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
महाराष्ट्र जैसी बगावत से तुलना
यह स्थिति 2022 के महाराष्ट्र शिवसेना विभाजन जैसी लग रही है, जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर दो-तिहाई बहुमत के साथ बीजेपी की मदद से सरकार बनाई थी। बाद में पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम का विवाद भी हुआ। मामला चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। लेकिन आख़िरकार उद्धव गुट को दोनों से हाथ गँवाना पड़ा। अब उनको नयी पार्टी शिवसेना यूबीटी बनानी पड़ी है।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल में टीएणसी का बागी गुट अब मुख्य विपक्षी दल बनने का दावा कर रहा है। ममता बनर्जी की टीम इस संकट से जूझ रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है।