ममता बनर्जी के घर हुई बैठक में फिर से अधिकतर विधायक और सांसद नहीं पहुँचे। बैठक में सिर्फ 8 विधायक ही पहुँचे जबकि राज्यसभा के दो सांसद सहित कुल 6 सांसद ही शामिल हुए। और इस तरह पार्टी पर नियंत्रण दिखाने की कोशिश फिर से नाकाम हो गई। चुनाव में हार के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायकों में दिख रही बगावत के बाद अब सांसदों की गैरमौजूदगी से टीएमसी में सकट गहराता जा रहा है।

दरअसल, टीएमसी में बड़ी बगावत के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कलकत्ता के कालीघाट स्थित घर पर शुक्रवार को अहम बैठक बुलाई गई। इसमें बेहद कम लोग पहुंचे। सिर्फ 8 विधायक ही हाजिर हुए, जबकि ज्यादातर सांसद भी बैठक से दूर रहे। एनडीटीवी ने पार्टी सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा में 28 सांसद हैं, लेकिन बैठक में सिर्फ 4 ही पहुंचे। राज्यसभा के 13 में से 11 सांसद गैरहाजिर रहे। सिर्फ 2 राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन और डोला सेन बैठक में शामिल हुए। ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी भी बैठक में मौजूद थे।
विधायकों में मदन मित्रा, बीना मंडल, अशिमा पात्रा, फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, सोवनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक देब जैसे नेता ममता के घर बैठक में शामिल हुए।

हालाँकि, बैठक में बहुत कम विधायकों और सांसदों के शामिल होने की रिपोर्टों के बीच टीएमसी ने कहा है, "यह 'नेशनल वर्किंग कमिटी' की बैठक थी, न कि सभी विधायकों या सांसदों की। महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी जैसे कई सांसद नेशनल वर्किंग कमिटी का हिस्सा हैं और वे इसमें वर्चुअली शामिल हुए थे।"

ऋतब्रत बनर्जी की बगावत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद ही टीएमसी में बगावत शुरू हो गई थी। अब पार्टी आधे-आधे में बंट चुकी है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों के एक गुट ने खुद को 'असली तृणमूल' बताया है। इस गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित किया और विधानसभा स्पीकर ने भी इसे मंजूरी दे दी है। 

ऋतब्रत बनर्जी गुट खुलकर ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है और पूर्व सीएम के घर बैठक में यह कम उपस्थिति ममता के नेतृत्व पर बढ़ते असंतोष और विद्रोह का साफ़ संकेत है।

विद्रोही विधायक बोले - संख्या और बढ़ेगी

विद्रोह का नेतृत्व कर रहे विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि और ज़्यादा विधायक उनके साथ आएंगे। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'हमारे पास पहले ही दो-तिहाई से ज्यादा संख्या है। जब विधानसभा सत्र शुरू होगा तब यह संख्या और बढ़ जाएगी।' ऋतब्रत बनर्जी ने आगे कहा, 'जैसे-जैसे बात आगे बढ़ेगी, विधायकों की संख्या बढ़ेगी। संख्या घटने वाली नहीं है, बल्कि बढ़ेगी।' सांसदों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पिछले सात दिनों में उन्होंने किसी भी सांसद से बात नहीं की है, इसलिए इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते।

विद्रोह क्यों?

यह विद्रोह तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बीजेपी से बुरी तरह हार गई। ममता बनर्जी खुद अपने गढ़ भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी से हार गईं। इसके बाद पार्टी के कई नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व शैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पार्टी पर संकट के इस सबसे बुरे दौर में ममता बनर्जी ने दो विधायकों को पार्टी से निकाल दिया, लेकिन इससे स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ती दिख रही है।

बंगाल में ऑपरेशन लोटस क्यों?

रिपोर्ट है कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं। लोकसभा और राज्यसभा में कुल मिलाकर टीएमसी के 41 सांसद हैं। यदि लोकसभा के ये 20 सांसद भी बीजेपी में चले गए तो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगेगा। वैसे कहा जा रहा है कि विधायकों की बगावत से बीजेपी को कुछ फायदा नहीं होना वाला है और उसका असली मक़सद सांसदों को तोड़ना ही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बीजेपी को लोकसभा में बहुमत नहीं है और वह चाहेगी कि संसद में वह मज़बूत हो।

सांसदों को तोड़ने पर है नज़र?

लोकसभा में दो-तिहाई यानी करीब 20 सांसद टूट जाएँ तो यह बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। बीजेपी के पास फिलहाल 240 सांसद हैं, बहुमत के लिए 272 चाहिए। टीएमसी के 20 सांसद जुड़ने से बीजेपी बहुमत के करीब पहुंच जाएगी और एनडीए सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं और नाराजगी जता रही हैं।
राज्यसभा के 245 सदस्यों में बीजेपी के 113 सांसद हैं, बहुमत के लिए 123 चाहिए। आप के 7 सांसदों के दल-बदल से बीजेपी ने अपनी ताकत बढ़ाई है, लेकिन अभी भी बहुमत से दूर है। दोनों सदनों में बीजेपी को बहुमत नहीं होने से मनचाहे विधेयकों को पारित कराने में दिक्कतें आती हैं।

हाल ही में लोकसभा सीटें 850 करने वाला और डिलेमिटेशन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका था, जिससे बीजेपी का 2029 चुनाव का प्लान प्रभावित हुआ।

क्या कई नेता भाजपा में जा सकते हैं?

रिपोर्टें हैं कि कई विद्रोही विधायक अब पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। अगर यह विद्रोह बढ़ा तो तृणमूल कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा। पार्टी के अंदर यह असंतोष पिछले कई दिनों से बढ़ रहा था। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी इस संकट से कैसे निपटती हैं और पार्टी को एकजुट रख पाती हैं या नहीं।