पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़े सीजेपी कार्यकर्ता अब्दुल हाफिज के पिता की कथित हत्या के मामले में सीजेपी ने शुभेंदु सरकार को चार मांगें पूरी करने का 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। हत्या के मामले में FIR में सभी आरोपियों को शामिल करने से लेकर परिवार की सुरक्षा तक 4 मांगें शामिल हैं।

सीजेपी का आरोप है कि सरकारी स्कूल का सोशल ऑडिट करने के बाद अब्दुल और उनके पिता पर स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर धारदार हथियारों से हमला किया। गंभीर रूप से घायल अब्दुल के पिता की शनिवार रात मौत हो गई। मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी बीच, सीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बांकुड़ा के करासुंडी पहुंचा और मृतक के परिवार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने चार मांगें रखीं और इन पर कार्रवाई के लिए 10 दिन का समय दिया है। सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय का घेराव करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

सीजेपी कार्यकर्ता अब्दुल हाफिज ने इलाके के एक सरकारी स्कूल का सोशल ऑडिट करने की मांग की थी। यह गतिविधि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का हिस्सा थी। आरोप है कि इसी को लेकर स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अब्दुल के परिवार पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान अब्दुल तो किसी तरह बच निकले, लेकिन आरोपियों ने उनके पिता पर हमला कर दिया।

हमले में अब्दुल के पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी हालत बिगड़ने के बाद शनिवार रात उनकी मौत हो गई। सीजेपी ने इसे राजनीतिक दबाव और स्कूल व्यवस्था में सुधार की मांग उठाने वाले अभियान से जुड़ा हमला बताया है। पुलिस ने हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ताज़ा ख़बरें

परिवार से मिलने पहुँचा सीजेपी प्रतिनिधिमंडल

सीजेपी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को अब्दुल हाफिज के घर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में ईस्टर्न जोन के कोऑर्डिनेटर अंकित भारद्वाज, साउथ जोन के नेता विजय मल्लांगी और कोर सदस्य सुधुर सांगवान समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने अब्दुल, उनकी मां और दादी से लंबी बातचीत की। परिवार से बातचीत के बाद सीजेपी ने चार प्रमुख मांगों वाला ज्ञापन तैयार किया और इसे स्थानीय प्रशासन के सामने रखा।

सीजेपी की चार प्रमुख मांगें क्या हैं?

  1. सीजेपी की पहली मांग है कि हमले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की जाए। पार्टी का कहना है कि एफ़आईआर में अभी सभी आरोपियों के नाम नहीं हैं और हमले में शामिल अन्य अज्ञात लोगों की पहचान कर उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए। सीजेपी ने फरार बताए जा रहे आरोपियों को गिरफ्तार करने और हमले में शामिल हर व्यक्ति को कानून के सामने लाने की मांग की है।
  2. दूसरी और महत्वपूर्ण मांग पुलिस की भूमिका को लेकर है। सीजेपी ने आरोप लगाया है कि मामले की जांच में पुलिस की कथित मिलीभगत, लापरवाही या कदाचार की भी जांच होनी चाहिए। पार्टी ने मामले की स्वतंत्र और कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
  3. सीजेपी ने अब्दुल हाफिज और उनके परिवार के लिए चौबीसों घंटे सुरक्षा की मांग भी की है। पार्टी का कहना है कि घटना के बाद परिवार पर खतरा बना हुआ है और उन्हें किसी भी तरह की धमकी या दबाव से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
  4. सीजेपी ने मुआवजे की जगह मृतक पिता के नाम पर एक सरकारी स्कूल स्थापित करने की मांग की है। पार्टी के मुताबिक, अब्दुल हाफिज ने खुद अपने पिता के लिए आर्थिक मुआवजा लेने से इनकार किया है। उनकी मांग है कि उनके पिता के नाम पर एक बेहतर और विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल बनाया जाए, ताकि यह घटना शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक स्थायी पहल का रूप ले सके।

कार्रवाई नहीं हुई तो घेराव होगा

सीजेपी ने स्थानीय प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए 10 दिन का समय दिया है। पार्टी के ज्ञापन में कहा गया है कि अगर इस अवधि में प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो सीजेपी समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय का घेराव करेंगे। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर होगा। सीजेपी ने साफ़ किया है कि वह मामले को केवल एक परिवार की त्रासदी के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे सरकारी स्कूलों की स्थिति और नागरिकों के सोशल ऑडिट के अधिकार से भी जोड़कर देख रही है।

पुलिस ने आठ लोगों को किया गिरफ्तार

इस मामले में सोमवार को पुलिस ने पांच और लोगों को गिरफ्तार किया। इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार किए गए लोगों में शेख आजाद, श्रीकांत माझी, प्रशांत रुइदास, रोहित माझी, बाबलू माझी, संतु माझी, टिंकू केवरा और अष्टम माझी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक इन आठ में से केवल आजाद, श्रीकांत माझी और अष्टम माझी के नाम एफ़आईआर में दर्ज थे। बाकी आरोपियों को जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आरोपियों को बिष्णुपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया। अदालत ने आजाद, श्रीकांत माझी और अष्टम माझी को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया, जबकि बाकी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस ने मामले में आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, गंभीर चोट पहुंचाने और हत्या जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
पश्चिम बंगाल से और खबरें
पुलिस की कार्रवाई तब हुई है जब सीजेपी का प्रतिनिधिमंडल मृतक के परिवार से मिलने पहुंचा और मामले में जल्द तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि हमले में कितने लोग शामिल थे, उनकी भूमिका क्या थी और हमले के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

सीजेपी का कहना है कि वह दबाव या धमकी से पीछे नहीं हटेगी और सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने तथा मामले में न्याय की मांग जारी रखेगी। बांकुड़ा की यह घटना अब पुलिस जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बन गई है। सीजेपी ने हमले को स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की कार्रवाई से ही होगी।