पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। राज्य सरकार की नई 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' (3D) नीति के लागू होने के डर से सैकड़ों बिना दस्तावेजों वाले बांग्लादेशी नागरिक जल्द से जल्द वापस लौटने के लिए सीमा पर जुट गए हैं।
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की बीजेपी सरकार अपनी 3 डी  नीति को आक्रामक तरीके से लागू करने में जुट गई है। उत्तर 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हाकिमपुर चेक पोस्ट पर सैकड़ों बिना दस्तावेजों (अवैध) वाले बांग्लादेशी नागरिक, जिनमें अधिकांश मुस्लिम हैं, वापस बांग्लादेश लौटने के लिए जमा हो गए हैं। ये लोग बांग्लादेश लौट पाएंगे, इन्हें भी नहीं पता।
कोलकाता से लगभग 75 किलोमीटर दूर हाकिमपुर बॉर्डर पर यह भीड़ तब दिखाई दी, जब बंगाल सरकार ने अवैध विदेशी नागरिकों को हिरासत में रखने के लिए राज्य के हर जिले में "होल्डिंग सेंटर" (हिरासत केंद्र) स्थापित करने की योजना की घोषणा की। इन्हें डिटेंशन सेंटर भी कहा जाता है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोमवार देर रात से ही पुरुष, महिलाएं और बच्चे अपने साथ बैग, कंबल और ट्रॉलियां लेकर हाकिमपुर बॉर्डर प्वाइंट पर पहुंचने लगे थे। वे इस उम्मीद में थे कि राज्य में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां शुरू होने से पहले सीमा सुरक्षा बल (BSF) उन्हें वापस सीमा पार भेज देगा।
दुर्गापुर में पिछले 5 सालों से बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे रबी सरदार ने द टेलीग्राफ से कहा, "बंगाल में सरकार बदल गई है।" वहीं, मटियाबुर्ज में निर्माण मजदूर के रूप में काम करने वाले 25 वर्षीय नयन सरदार ने बताया, "वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास के दौरान जब मेरे पिता का नाम हटा दिया गया, तो वे भाग गए। मेरे पास कोई दस्तावेज नहीं हैं। अगर तृणमूल (TMC) सरकार सत्ता में होती, तो हम इस तरह जाने की कभी नहीं सोचते।"

राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव का असर

हाकिमपुर सीमा पर देखे जा रहे ये दृश्य मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में आए बदलाव का सबसे स्पष्ट संकेत हैं। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी ने बार-बार राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी मुस्लिम नागरिकों और रोहिंग्या प्रवासियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाने का वादा किया था।
हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने होल्डिंग सेंटरों का पुरजोर समर्थन करते हुए कथित घुसपैठियों के संदर्भ में कहा था, "क्या वे हमारे दामाद हैं?"

सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई तेज

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जा रहा है, विशेष रूप से 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद, जिसके बाद केंद्र सरकार ने कई राज्यों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ समन्वित अभियान शुरू किया है।
होल्डिंग सेंटर्स चालू: मालदा और मुर्शिदाबाद के कुछ हिस्सों (लालगोला सहित) में होल्डिंग सेंटर्स पहले ही चालू हो चुके हैं, क्योंकि राज्य सरकार बंगाल की इस खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक बड़े अभियान की तैयारी कर रही है।
अधिकारियों की मुस्तैदी: मंगलवार शाम तक बीएसएफ अधिकारियों ने सीमा पर जमा लोगों की सटीक संख्या की आधिकारिक घोषणा नहीं की थी, लेकिन पुलिसकर्मी विवरण दर्ज करने और सीमा बलों के साथ समन्वय करने के लिए मौके पर पहुंच गए थे। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार बांग्लादेशी सीमा अधिकारियों के साथ परामर्श कर सीधे 'पुशबैक' (वापस भेजने) के उपायों पर विचार कर रही है।

विपक्ष (TMC) और भाजपा का रुख

तृणमूल कांग्रेस (TMC), जो लंबे समय तक भाजपा के बड़े पैमाने पर घुसपैठ के दावों को खारिज करती आई थी और जिसने वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (SIR) का कड़ा विरोध किया था, अब विपक्ष में बैठकर इस नीति को तेजी से लागू होते देख रही है। बशीरहाट के एक भाजपा नेता ने टिप्पणी की कि केंद्र सरकार के सख्त संदेशों के बाद कई प्रवासियों ने पहले ही लौटना शुरू कर दिया था, लेकिन टीएमसी के दोबारा सत्ता में आने की उम्मीद में यह प्रक्रिया धीमी हो गई थी। उन्होंने कहा, "चुनाव परिणामों के बाद वह सारा गणित बदल गया।"
भाजपा के लिए हाकिमपुर की ये कतारें उस दावे का प्रमाण हैं जो वह सालों से करती आ रही थी। लेकिन उन कतारों में बच्चों और प्लास्टिक के थैलों के साथ बैठे लोगों के लिए, यह एक शांति से बसाई गई जिंदगी के उजड़ने और एक अनिश्चित भविष्य की ओर लौटने की मजबूरी है। सालों से बंगाल में घरेलू सहायिका, निर्माण श्रमिक और दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम करने वाले लोग अब भारी डर के साए में पलायन कर रहे हैं।