ममता बनर्जी ने बंगाल में अपनी चुनावी रणनीति की साफ़ झलक दे दी है। पिछले चुनाव में नंदीग्राम से हारने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने जिस अंदाज में भबानीपुर से चुनौती दी, उसको भी ममता ने साहसी अंदाज में स्वीकार किया। उन्होंने भबानीपुर सीट से खुद चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जहाँ उनका सीधा मुक़ाबला बीजेपी नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी से होगा। यह दोनों नेताओं के बीच दूसरी बार आमने-सामने की लड़ाई होगी। तो क्या यह ममता का सिर्फ़ साहसी फ़ैसला है या फिर बड़ी चुनावी रणनीति भी?
पहले 2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को सिर्फ़ 1956 वोटों से हराया था। वह हार ममता के लिए बड़ा झटका थी, हालाँकि टीएमसी ने पूरे राज्य में 215 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। अब ममता ने शुभेंदु को भबानीपुर में चुनौती देकर बदला लेने की तैयारी दिखाई है। भबानीपुर दक्षिण कोलकाता की एक अहम सीट है, जहाँ ममता पहले भी चुनाव जीत चुकी हैं।
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने टीएमसी के 291 उम्मीदवारों की लंबी सूची जारी की। राज्य में कुल 294 सीटें हैं, लेकिन टीएमसी ने तीन सीटें दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाके में अपने सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा यानी बीजीपीएम के लिए छोड़ दी हैं। ममता ने दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार 226 से ज्यादा सीटें जीतेगी और फिर सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा, 'हम 226 से ज्यादा सीटें जीतेंगे। बीजेपी की जन-विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।'
ताज़ा ख़बरें

नंदीग्राम में भी शुभेंदु को फँसाया!

नंदीग्राम में अब नया मोड़ आया है। शुभेंदु अधिकारी वहाँ से फिर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन टीएमसी ने उनके पूर्व करीबी पबित्र कर को टिकट दिया है। पबित्र कर पहले बीजेपी में थे, लेकिन हाल ही में वापस टीएमसी में लौट आए।

पबित्र कर शुभेंदु के साथ मिलकर बीजेपी को मज़बूत बनाने में मदद कर चुके थे। अब टीएमसी ने उन्हें नंदीग्राम में उतारकर शुभेंदु के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है।

बीजेपी भी पीछे नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद समीक भट्टाचार्य ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी भबानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगह से बड़ी जीत दर्ज करेंगे। बीजेपी का दावा है कि इस बार राज्य में उनकी सरकार बनेगी और जनता ममता की नीतियों से नाराज है।

75 विधायकों के टिकट काटने के पीछे की रणनीति

टीएमसी ने अपने 75 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है। यह फ़ैसला पार्टी के अंदरूनी प्रदर्शन और जनता से जुड़ाव की समीक्षा के आधार पर लिया गया है। पार्टी नेता तो कह रहे हैं कि जिन विधायकों का काम संतोषजनक नहीं था या वे जमीनी स्तर पर कमजोर थे, उन्हें हटा दिया गया। लेकिन माना जा रहा है कि ममता ने एंटी इंकंबेंसी से लड़ने के लिए ऐसा फ़ैसला लिया है। हालाँकि, कई बड़े नेता और मंत्री फिर से टिकट पा चुके हैं।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

52 महिलाओं को टिकट

सूची में 52 महिलाएँ शामिल हैं। 95 अनुसूचित जाति-जनजाति के उम्मीदवार और 47 अल्पसंख्यक उम्मीदवार शामिल हैं। पार्टी ने युवाओं को भी जगह दी है, लेकिन ज्यादातर उम्मीदवार 41 से 60 साल की उम्र के बीच के हैं।

तबादलों का असर होगा चुनाव पर?

चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग द्वारा राज्य में बड़े पैमाने पर किए गए अधिकारियों के फेरबदल पर भी सियासत गर्मायी है। तो क्या इसका भी चुनाव पर असर होगा? कम से कम ममता और टीएमसी को तो ऐसा ही अंदेशा है। इन तबादलों को लेकर चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ममता ने कहा है कि 'अंधेरे में छिपकर काम करने के बजाय चुनाव आयोग को अब खुलकर बीजेपी के लिए प्रचार करना शुरू कर देना चाहिए, कम से कम यह ज़्यादा ईमानदारी भरा होगा'।
पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
टीएमसी प्रमुख ममता ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, 'आचार संहिता लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने मुख्य सचिव और प्रधान सचिव को हटा दिया। अब एक ही झटके में उन्होंने 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है।' ममता ने ये आरोप इसलिए लगाए क्योंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही चुनाव आयोग ने राज्य के कई बड़े अफ़सरों को हटा दिया। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और कई वरिष्ठ पुलिस अफसर शामिल हैं। इसके अलावा 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनमें कई जिलों के एसपी और कमिश्नर शामिल हैं।
बहरहाल, बीजेपी ने इन तबादलों का बचाव किया और कहा कि आयोग अपना संवैधानिक काम कर रहा है। चुनाव अप्रैल में दो चरणों में होंगे। 23 और 29 अप्रैल को। मतगणना 4 मई को होगी। यह चुनाव बंगाल की राजनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, खासकर ममता और शुभेंदु की व्यक्तिगत रंजिश के कारण। दोनों तरफ़ से जोरदार प्रचार होगा और जनता फैसला करेगी कि कौन जीतेगा - ममता की चाल या शुभेंदु की चुनौती।