एसआईआर के बाद, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भबानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में लगभग 25% की गिरावट आई है। 2,06,295 मतदाताओं में से 51,000 से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। इनमें ज्यादातर मुस्लिम मतदाता हैं।
भबानीपुर में ममता बनर्जी (टीएमसी) और सुवेंदु अधिकारी (बीजेपी) कड़ा मुकाबला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा सीट पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाताओं की संख्या में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है। इससे पहले भबानीपुर में कुल 2,06,295 मतदाता थे, जिनमें से 51,004 नाम हटा दिए गए।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कुल हटाए गए मतदाताओं में 23.3 प्रतिशत मुस्लिम और 76.7 प्रतिशत गैर-मुस्लिम हैं। लेकिन आबादी के मद्देनज़र हटाए गए मुस्लिम वोटरों की संख्या ज्यादा है। SIR प्रक्रिया के दौरान पहले चरण में 44,787 नाम हटाए गए, जिनमें अनुपस्थित (absent), स्थानांतरित (shifted), मृत (deceased), डुप्लिकेट और अनमैप्ड श्रेणियां शामिल थीं। दूसरे दौर में अतिरिक्त 2,342 नाम हटाए गए, जबकि सिर्फ 18 नए मतदाताओं को जोड़ा गया।
इसके अलावा, करीब 14,154 मतदाताओं को एडज्यूडिकेशन (adjudication) के लिए चिह्नित किया गया था। सबर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 15 सप्लीमेंट्री लिस्टों का विश्लेषण किया, जिसमें पाया गया कि एडज्यूडिकेशन के लिए चिह्नित 10,238 मतदाताओं को बाद में बहाल कर दिया गया, जबकि 3,875 नाम हटा दिए गए। इन हटाए गए नामों में लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम थे।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, एडज्यूडिकेशन प्रक्रिया के दौरान करीब 3,500 नाम हटाए गए। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि गैर-मुस्लिमों में से 43 प्रतिशत को एडज्यूडिकेशन के लिए रखा गया था। अंतिम रोल से मुस्लिम मतदाताओं का 7.7 प्रतिशत और गैर-मुस्लिमों का 92 प्रतिशत नाम हटाया गया।
रिपोर्ट में विभिन्न श्रेणियों में मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात भी दिया गया है। 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत/डुप्लिकेट' श्रेणी में उनका हिस्सा 22.7 प्रतिशत था, जबकि 'अनमैप्ड' मतदाताओं में यह 26 प्रतिशत के करीब था, जो उनकी आबादी के अनुपात के अनुरूप है। हालांकि, 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' श्रेणी में मुस्लिमों का हिस्सा बढ़कर 52 प्रतिशत हो गया।
भबानीपुर सीट इस बार काफी चर्चित है क्योंकि यहां ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को उनका मुकाबला करने के लिए उतारा है। SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में आई इस बड़ी कमी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
भबानीपुर का जाति समीकरण
भबानीपुर कोलकाता की एक कॉस्मोपॉलिटन विधानसभा सीट है, जिसे अक्सर ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है। यहां बंगाली और गैर-बंगाली हिंदू, मुस्लिम, मारवाड़ी, गुजराती, सिख, जैन तथा अन्य समुदायों का मिश्रण है।
- हिंदू मतदाता: लगभग 76%
- बंगाली हिंदू: ~42%
- गैर-बंगाली हिंदू: ~34%
- अल्पसंख्यक मतदाता (मुख्यतः मुस्लिम): 24.5%
- कायस्थ: 26.2%
- पूर्वी भारतीय प्रवासी समुदाय (बिहार, ओडिशा आदि): 14.9%
- मारवाड़ी: 10.4% (व्यापारी समुदाय, मुख्यतः गैर-बंगाली हिंदू)
- ब्राह्मण: 7.6%
पिछले कई चुनावों में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने यहां आराम से जीत हासिल की है। साल 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने रिकॉर्ड 58,835 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी और उनका वोट शेयर 71.9 प्रतिशत तक पहुंच गया था। उसी साल के सामान्य विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने 57.71 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। लेकिन इसी दौरान भाजपा का प्रदर्शन लगातार सुधरता दिखा। 2021 में भाजपा ने 35 प्रतिशत से ज्यादा वोट पाए, जो पहले के मुकाबले काफी बेहतर था।
2024 के लोकसभा चुनाव में भबानीपुर सेगमेंट में तृणमूल कांग्रेस की बढ़त और भी कम होकर सिर्फ 8,200 वोट रह गई। यह आंकड़ा साफ बताता है कि भबानीपुर में अब मुकाबला पहले जितना एकतरफा नहीं रहा है।
अब 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा बदलाव आया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद भबानीपुर में कुल 2,06,295 मतदाताओं में से करीब 51,000 नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या 2021 उपचुनाव में ममता बनर्जी की जीत के मार्जिन के लगभग बराबर है। इस कटौती को लेकर दोनों पार्टियों में जोरदार बहस छिड़ी हुई है।
कौन जीतेगा भबानीपुर
भबानीपुर अब सिर्फ ममता बनर्जी की व्यक्तिगत सीट नहीं रह गई है। यह सीट पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हवा का बैरोमीटर बन चुकी है। 2026 में यहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है। नतीजा मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करेगा- SIR के बाद नई मतदाता सूची का असर, मुस्लिम और बंगाली हिंदू मतदाताओं का टर्नआउट, और गैर-बंगाली व्यापारी समुदायों का रुख। अभी तक की स्थिति यह है कि भबानीपुर तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ तो है, लेकिन अब यहां मुकाबला काफी कड़ा और रोचक हो गया है।