पश्चिम बंगाल में SIR के बाद चुनाव आयोग ने पहला आंकड़ा जारी किया: 32 लाख से अधिक नाम हटाए गए (54.4%)। कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 6.77 करोड़ रह गई। नंदीग्राम में हटाए गए मतदाताओं में से 95.5% मुस्लिम हैं, जबकि वे आबादी का सिर्फ 25% हैं।
नंदीग्राम के मुस्लिम मतदाताओं के नाम सबसे ज्यादा हटे
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद अदालती सुनवाई के बाद मतदाता सूची से हटाए गए नामों का पहला आंकड़ा जारी किया है। राज्य में कुल 60,06,675 नामों की जांच के दौरान 54.4% यानी 32,68,119 नाम हटा दिए गए हैं। इससे राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.77 करोड़ रह गई है, जो 11.62% की कमी है। कुल 89 लाख नाम हटाए गए हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता टारगेट किए गए हैं। मामूली विसंगतियों पर भी उनके नाम उड़ा दिए गए हैं।
चुनाव आयोग ने सोमवार आधी रात को अंतिम पूरक सूची जारी की। फरवरी 28 को जारी अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ थी, जिसमें 60.06 लाख नामों को समीक्षा के लिए चिह्नित किया गया था। इनकी अदालती सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में 705 न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को समय बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी थी।
सबसे अधिक प्रभावित जिले
- नदिया (मटुआ बहुल) में 77.86%,
- हुगली 70.33%,
- पूर्वी बर्धमान 57.4%,
- उत्तर 24 परगना 55.08%,
- पश्चिमी बर्धमान 53.72%।
- सबसे अधिक संख्या में जांच वाले जिले:
- मुर्शिदाबाद (11 लाख),
- मालदा (8.28 लाख),
- दक्षिण 24 परगना (5.22 लाख),
- उत्तर 24 परगना (5 लाख)।
सबसे कम:
- झारग्राम (6,682) और कालिम्पोंग (6,790)।
- अल्पसंख्यक बहुल मालदा में 28.91%, मुर्शिदाबाद में 41.33%, उत्तर दिनाजपुर में 36.84% और दक्षिण 24 परगना में 42.70% मुस्लिम वोटरों के नाम उड़ाए गए। हालांकि गैर मुस्लिमों के मुकाबले यहां मुस्लिम आबादी ज़्यादा नहीं है।
- कोलकाता-नॉर्थ (28.97%) और कोलकाता-साउथ (27.31%) में भी काफी नाम कटे।
नंदीग्राम में मुस्लिम मतदाता टारगेट पर रहे
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में SIR के तहत सात पूरक सूचियों (1, 2, 3, 4a, 7, 8 और 9) में हटाए गए मतदाताओं में 95.5% मुस्लिम हैं। जबकि नंदीग्राम की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी मात्र 25% है। गैर-मुस्लिम (75% आबादी) यानी बाकी हिन्दू समुदाय के मात्र 4.5% नाम कटे हैं। कोलकाता स्थित सार्वजनिक नीति शोध संस्थान ‘सबर इंस्टीट्यूट’ ने चुनाव आयोग के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह डेटा पेश किया है।
छह सूचियों में मुस्लिमों का हिस्सा 60.9% से 98.7% तक रहा। केवल सूची 4a में 100% गैर-मुस्लिम महिलाओं के नाम कटे, जबकि मुस्लिमों का कोई नाम नहीं हटाया गया। दिसंबर 2025 के ASDD (Absent, Shifted, Deceased, Duplicate) डेटा में मुस्लिम 33.3% और गैर-मुस्लिम 66.7% थे, लेकिन पूरक सूचियों में असंतुलन बहुत अधिक है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
ममता बनर्जी ने समसेरगंज रैली में इससे निपटने का तरीका बताते हुए कहा, “लोगों के नाम काटने का बदला लेने के लिए वोट डालें। SIR के खिलाफ वोट दें ताकि नतीजे सही आएं। उन्होंने कुछ के नाम काटे हैं तो कुछ को धमकाया है।” बीजेपी के सुकांत मजूमदार ने जवाब देते हुए कहा, “SIR संवैधानिक कर्तव्य था। मतदाता सूची साफ करने और धोखाधड़ी रोकने के लिए किया गया। टीएमसी निष्पक्ष चुनाव से डरी हुई है।” उन्होंने ममता बनर्जी पर “अवैध घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं की रक्षा करने” का आरोप लगाया। नंदीग्राम 2021 में ममता बनर्जी की हार का गवाह बना था, जहां उन्होंने सुवेंदु अधिकारी से हार मान ली थी। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
अपील का मौका या छलावा
जिन मतदाताओं के नाम न्यायिक अधिकारियों की जांच के बाद हटाए गए हैं, वे पूरे राज्य में बनाए गए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने अपील कर सकते हैं। प्रथम चरण के चुनाव (23 अप्रैल) के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल थी। इसके बाद मतदाता सूची फ्रीज हो गई है। 29 अप्रैल को मतदान करने वाले क्षेत्रों में हटाए गए मतदाताओं को ट्रिब्यूनल के समक्ष सुनवाई का मौका मिल सकता है, लेकिन ट्रिब्यूनल अभी शुरू नहीं हुए हैं। एक वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारी ने कहा, “अदालती सुनवाई के बाद नाम कटने वाले लोग ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनौती दे सकते हैं।”
ये आंकड़े पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जारी किए गए हैं, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने अभी तक नंदीग्राम में धार्मिक आधार पर नाम कटने के आंकड़ों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।