पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल ने बीजेपी के उस दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है जिसमें राज्य में एक करोड़ रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के होने की बात कही गई थी। ड्राफ्ट लिस्ट में 'फेक' या 'घोस्ट वोटर' की संख्या मात्र 1 लाख 83 हज़ार 328 बताई गई है। हालाँकि, कुल नाम हटाने की संख्या 58 लाख से अधिक है, लेकिन इनमें अधिकतर मृतक, शिफ़्ट हुए मतदाता और डुप्लीकेट नाम भी शामिल हैं। तो सवाल है कि जिस चुनाव आयोग पर बीजेपी का साथ देने का आरोप लगता है उसकी एसआईआर प्रक्रिया में भी बीजेपी के एक करोड़ घुसपैठिये के दावे की पुष्टि क्यों नहीं हुई? क्या यह सब राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले वोटों के ध्रुवीकरण के लिए चुनावी नैरेटिव गढ़ने का प्रयास था?

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसे बीजेपी के राजनीतिक नैरेटिव का पर्दाफाश बताते हुए आरोप लगाया कि 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने घुसपैठ की अफवाह फैलाकर वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश की। वहीं, बीजेपी ने कहा कि यह अभी शुरुआत है और अंतिम लिस्ट आने तक इंतज़ार करें। तो क्या सच में बीजेपी के एक करोड़ घुसपैठिए के दावे में सचाई है?
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वोटर लिस्ट में क्या सामने आया?

चुनाव आयोग ने 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में कुल 58 लाख 20 हज़ार 898 नाम हटाए गए हैं, जो राज्य के कुल मतदाता करीब 7.08 करोड़ का क़रीब 4 प्रतिशत है। हटाए गए नामों की श्रेणियां मौत, स्थायी प्रवास, डुप्लिकेट एंट्री, फॉर्म न जमा करने और अन्य कारणों पर आधारित हैं। इनमें करीब 24 लाख मृत्यु, करीब 20 लाख स्थायी स्थानांतरण, 12 लाख से अधिक पता नहीं मिला, 1.38 लाख डुप्लिकेट एंट्री शामिल हैं। इसमें सबसे अहम आँकड़ा 'घोस्ट वोटर' या फर्जी वोटरों का है। 'घोस्ट वोटर' यानी ऐसे मतदाता जिनकी पहचान फील्ड वेरिफिकेशन में नहीं हो सकी, उनकी संख्या सिर्फ 1 लाख 83 हज़ार 328 है। चुनाव आयोग के अनुसार, यह संख्या एसआईआर प्रक्रिया के दौरान घर-घर जांच के बाद तय की गई है।

बीजेपी के पास 1 करोड़ का आँकड़ा कहाँ से आया?

बीजेपी के नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कई मौकों पर दावा किया है कि बंगाल में एक करोड़ रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए वोटर लिस्ट में शामिल हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। अगस्त 2025 में उन्होंने ईसीआई से बिहार जैसी एसआईआर प्रक्रिया की मांग की थी, जहां ड्राफ्ट लिस्ट में 65 लाख नाम हटाए गए थे। 

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ये घुसपैठिए टीएमसी सरकार की मिलीभगत से वोटर बने हैं और राज्य के संसाधनों पर बोझ हैं।

केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने भी अक्टूबर 2025 में 1.2 करोड़ अवैध वोटरों का दावा किया था। उन्होंने 9 अक्टूबर को उत्तर 24 परगना जिले के गैघाटा में एक 'विजया सम्मिलनी' कार्यक्रम में दिया था। ठाकुर ने कहा था, 'अगर SIR ठीक से लागू हुआ तो तृणमूल सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचेगा। पश्चिम बंगाल में कम से कम एक करोड़ से 1.2 करोड़ लोग जो अवैध रूप से वोटर बने हैं, उनके नाम हट जाएंगे। रोहिंग्या, घुसपैठिए और घोस्ट वोटर्स अब वोट नहीं डाल पाएंगे।' बीजेपी ने एसआईआर के दौरान 1.25 करोड़ संदिग्ध एंट्री की जांच की मांग की थी। हालांकि, ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़ों ने इन दावों को झुठलाते हुए दिखाया कि संदिग्ध या घोस्ट वोटर की संख्या एक करोड़ से बहुत कम है।

TMC का बीजेपी पर हमला

टीएमसी ने इन आंकड़ों का हवाला देकर भाजपा पर जोरदार हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता कृष्णानु मित्रा ने कहा, 'ड्राफ्ट रोल में 58 लाख नाम हटाए गए हैं। बीएसएफ के डेटा से पता चलता है कि हकीमपुर बॉर्डर से सिर्फ 4000 लोग बांग्लादेश वापस लौटे हैं। 80 प्रतिशत मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में डिलीशन रेट 0.6 प्रतिशत है, जबकि मतुआ बहुल इलाकों में 9 प्रतिशत। मौतों को छोड़कर बाक़ी हटाए गए वोटर कौन हैं? वे किस बॉर्डर से निकले?'
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उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल में कोई रोहिंग्या वोटर नहीं हैं और घुसपैठ का नैरेटिव चुनावी फायदे के लिए गढ़ा गया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस दावे का इस्तेमाल हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने के लिए किया, खासकर उत्तर 24 परगना जैसे बॉर्डर इलाक़ों में जहाँ अनधिकृत बांग्लादेशियों के वापस लौटने की ख़बरें विवाद का विषय बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ईसीआई पर आरोप लगाया कि वैध वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं।

अभी तो शुरुआत है: बीजेपी

बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। शुभेंदु अधिकारी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'यह तो बस शुरुआत है। नाश्ता अभी शुरू हुआ है। लंच, चाय और फिर डिनर भी होगा।' उन्होंने अंतिम रोल 14 फरवरी 2026 को जारी होने के बाद विस्तार से बोलने की बात कही। बीजेपी ने दावा किया कि एसआईआर से और अधिक अवैध वोटर सामने आएंगे और उन्होंने ईसीआई से घुसपैठियों को डिपोर्ट करने के निर्देश जारी करने की मांग की। पार्टी ने नवंबर 2025 में 13.25 लाख फेक वोटरों की पहचान का भी दावा किया था।
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यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है, जहाँ एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। माना जा रहा है कि 2026 चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का यह मुद्दा राज्य की राजनीति को और गरमा सकता है, जहां घुसपैठ, मतुआ समुदाय और मुस्लिम वोट बैंक जैसे विषय पहले से ही संवेदनशील हैं। चुनाव आयोग ने साफ़ किया है कि ड्राफ्ट स्टेज पर नाम हटाना अंतिम नहीं है और 16 दिसंबर से 15 जनवरी 2026 तक दावे-आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं।

कुल मिलाकर, ड्राफ्ट लिस्ट के आँकड़ों ने बीजेपी के एक करोड़ घुसपैठियों के दावे को कमजोर साबित किया है, लेकिन राजनीतिक लड़ाई अभी थमी नहीं है। दोनों पार्टियां इन नंबरों को अपने-अपने तरीके से पेश कर चुनावी फायदे की कोशिश कर रही हैं।