बीजेपी नेता और राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मदरसों को लेकर कई विवाद रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें लोगों ने इन धार्मिक शिक्षण संस्थानों से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया है।'
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार ने राज्य के 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया है और क़रीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। शुभेंदु अधिकारी सरकार का कहना है कि राज्य के सभी मदरसों के विस्तृत सर्वे में पता चला कि ये मदरसे बिना अनुमति के चल रहे थे या इनमें जरूरी सुविधाएं नहीं थीं। जबकि बीजेपी नेता और राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मदरसों को लेकर कई विवाद रहे हैं। उन्होंने कहा कि मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिली हैं और ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें लोगों ने इन धार्मिक शिक्षण संस्थानों से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया है।
हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति करने वाली बीजेपी की शुभेंदु सरकार की मदरसों पर यह कार्रवाई तब हुई है जब राज्य की राजनीति में बीजेपी और टीएमसी के बीच धार्मिक पहचान और अल्पसंख्यक राजनीति पहले से ही बड़ा मुद्दा है। बीजेपी के नेता इसे सुरक्षा और कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के मुद्दे से जोड़ रहे हैं। यही अंतर इस पूरे विवाद को राजनीतिक रूप से बड़ा बनाता है।
कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी: बीजेपी
मदरसों के ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई का समर्थन करते हुए प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, 'यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। इसलिए हमारी राज्य सरकार ने इसे किया। पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने एक बार मदरसों के नाम पर क्या चल रहा है, यह सवाल उठाया था, लेकिन दबाव में उन्हें अपना फ़ैसला वापस लेना पड़ा। अगर तब वामपंथी सरकार ने उनकी बात मान ली होती तो आज सीमा पर जो हालात हैं, वे नहीं होते।'
आतंकियों को पकड़ा गया: दिलीप घोष
राज्य के पंचायती राज मंत्री और बीजेपी नेता दिलीप घोष ने मदरसों को लेकर और ज्यादा गंभीर आरोप लगाए। दिलीप घोष ने भी सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'मदरसों को लेकर कई विवाद रहे हैं। बार-बार शिकायतें मिली हैं। कई मामलों में आतंकवादी मदरसों में रहकर या शिक्षकों के रूप में काम करते पकड़े गए हैं। उन्होंने राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां भी की हैं। जो मदरसे नियमों का पालन करेंगे, वे चलते रहेंगे। लेकिन मदरसे कहीं भी बेतरतीब तरीके से नहीं खुल सकते। सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।'हालाँकि, एंटी-नेशनल को लेकर यह बीजेपी का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध सरकारी सर्वे के विवरण में बंद किए गए 252 मदरसों को सामूहिक रूप से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल बताए जाने की बात नहीं कही गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बंद किए गए मदरसों की सूची में सबसे ज़्यादा मदरसे बांग्लादेश सीमा से लगे मालदा जिले में हैं। वहां 45 मदरसे बंद किए गए। उत्तर दिनाजपुर में 37, जबकि दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों में 25-25 मदरसे बंद किए गए।
मीडिया से बात करते हुए अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा, 'हमने 252 मदरसों को बंद कर दिया है और 100 अन्य को शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं। इन मदरसों को जवाब देना होगा। अगर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।'
टीएमसी ने सवाल उठाए
टीएमसी ने सरकार के इस फ़ैसले पर आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी वाली टीएमसी के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों पर एक जैसा आरोप नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मदरसा शिक्षा एक घराना है। अचानक बीजेपी और उनके नेता दिलीप घोष आतंकवादियों की बात कर रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था पर हमला करके ऐसी कहानी बनाना सही नहीं है।'
2396 मदरसे बिना अनुमति चल रहे थे: सर्वे
राज्य सरकार द्वारा तीन महीने पहले शुरू किए गए सर्वे में पाया गया कि राज्य में 2132 मदरसे ही अनुमति लेने के बाद चल रहे हैं, जबकि 2396 मदरसे बिना किसी सरकारी बोर्ड या ज़रूरी अनुमति के चल रहे थे। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार सरकार का कहना है कि इसने उन मदरसों को बंद किया है जो नियमों का पालन नहीं कर रहे थे या जिनमें बुनियादी ढांचा और अनुमति नहीं थी। अनुमति वाले मदरसे पहले की तरह चलते रहेंगे।सरकार ने जून में सभी मदरसों का सर्वे शुरू किया था। यह सर्वे 22 जिलों और कोलकाता के अलग-अलग हिस्सों में हुआ। इसमें मदरसों के प्रबंधन, शिक्षकों, छात्रों, इमारत, फंडिंग के स्रोत और अन्य जानकारी जुटाई गई। जानकारी की जाँच के लिए सरकार ने एक खास टीम भी भेजी थी। सरकार के जून वाले आदेश में साफ कहा गया था कि सर्वे का मकसद जिलावार सही आंकड़े हासिल करना है। साथ ही किसी भी अनियमितता या गैरकानूनी गतिविधि का पता लगाना भी इसका उद्देश्य था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर यह काम शुरू किया गया था।
सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ नियमों का पालन सुनिश्चित करने और बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। अनुमति वाले मदरसों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन सवाल उठ रहा है कि सरकार नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई को प्रशासनिक सुधार तक सीमित रखती है या इसे व्यापक धार्मिक-सुरक्षा के नैरेटिव से जोड़कर आगे बढ़ाती है।