पश्चिम बंगाल के प्रवासी मज़दूरों पर बीजेपी शासित छत्तीसगढ़ में फिर से हमला हुआ है। रायपुर में बांग्ला बोलने वाले आठ मुस्लिम प्रवासी मजदूरों पर कथित तौर पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। इस हमले में एक मजदूर को गंभीर चोट आई और उसके दाहिने हाथ में फ्रैक्चर हो गया। मारपीट की घटना के बाद सभी मज़दूर अब अपने राज्य पश्चिम बंगाल लौट गए हैं।

हाल के कुछ महीनों में बांग्ला भाषा बोलने वाले आप्रवासी मज़दूरों पर देश के अलग-अलग राज्यों में हमले की घटनाएँ आती रही हैं। ऐसा तब से ज़्यादा हो रहा है जब से बीजेपी सरकारों ने कई राज्यों में कथित तौर पर 'बांग्लादेशी घुसपैठिये' के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की है। विपक्षी दलों ने लगातार आरोप लगाया है कि बीजेपी इसके बहाने अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है।
बहरहाल, छत्तीसगढ़ की यह ताज़ा घटना रायपुर जिले के कटोली थाना क्षेत्र में रविवार को सुराजपुर इलाक़े में हुई। ये मजदूर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के चेपरी गांव से हैं और रायपुर में जय दुर्गा बेकरी में काम करते थे। मजदूरों का कहना है कि वे बेकरी मालिक से अपनी मजदूरी के पैसे को लेकर बहस कर रहे थे। तभी 50-60 लोगों का एक समूह आया और उन्हें डंडों से पीटने लगा। हमलावरों ने उन्हें बांग्लादेशी कहकर गालियां दीं। मजदूरों द्वारा अपने पहचान पत्र दिखाए जाने के बाद भी उनके ख़िलाफ़ आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल किए गए।

ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार एक मजदूर एसके असलम ने बिना पुष्ट किए गए एक वीडियो में कहा, 'हम बेकरी में काम कर रहे थे। मालिक ने कहा कि पैसे लेकर चले जाओ। लेकिन जाने से पहले बजरंग दल के 50-60 लोगों का समूह आया और हमें पीटने लगा। हमें बांग्लादेशी कहा गया। हमने आईडी दिखाई, फिर भी नहीं माने। बाद में हमें पुलिस थाना ले जाया गया।' 

मजदूरों को भीड़ से पुलिस ने बचाया। पुलिस ने मजदूरों के दस्तावेज जांचने के लिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद उनके दस्तावेजों की पुष्टि की गई।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार टीएमसी नेता शेख इकबाल ने कहा, 'सुराजपुर के कटोली थाने के एक पुलिसकर्मी ने मुझे फोन किया और आठ मजदूरों के बारे में जानकारी मांगी। हमने उनके परिवारों से सभी दस्तावेज इकट्ठे करके पुलिस को दे दिए।' ये मजदूर अब बंगाल लौट आए हैं।

ओडिशा में बंगाली बोलने वाले मज़दूर पर हमला

उसी दिन यानी रविवार को ओडिशा के संबलपुर में भी एक बंगाली बोलने वाले मुस्लिम प्रवासी मजदूर पर हमला हुआ, जिसमें उसकी बांह टूट गई।

इससे करीब दो हफ्ते पहले ओडिशा के संबलपुर में ही बंगाल के एक 30 साल के मुस्लिम मजदूर जुएल शेख को बांग्लादेशी होने के शक में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस मामले में छह लोग गिरफ्तार हुए हैं।

'बांग्लादेशी' बताकर छत्तीसगढ़ के मज़दूर की लिंचिंग

केरल के पलक्कड़ जिले में छत्तीसगढ़ के एक 31 साल के प्रवासी मजदूर रामनारायण बघेल की एक भीड़ ने 17 दिसंबर को बुरी तरह पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जब मारपीट का वीडियो सामने आया तो इसने लोगों को झकझोर कर रख दिया। वीडियो में हमलावरों को रामनारायण से बार-बार पूछते सुना जा सकता है- 'क्या तुम बांग्लादेशी हो?'

रामनारायण छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के करही गांव के रहने वाले थे। वे बेहतर कमाई की तलाश में 13 दिसंबर को केरल पहुँचे थे। वे एक निर्माण स्थल पर दिहाड़ी मजदूर का काम कर रहे थे और अपने रिश्तेदार के साथ वालयार में रह रहे थे। वे रास्ता भटक गए और गांव में पहुंच गए थे। वहां पहले कुछ चोरी की घटना हुई थी, इसलिए लोगों ने उन्हें चोर समझ लिया। भीड़ ने उन्हें घेर लिया, पूछताछ की और फिर लाठी-डंडों से बुरी तरह मारा।

ममता बनर्जी का बीजेपी पर हमला

बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले प्रवासी मज़दूरों पर हमलों की ख़बरें बढ़ रही हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही इन हमलों पर चिंता जताई है और इसे 'क्रूर दमन' बताया है। पिछले साल अगस्त में उन्होंने बंगाली मजदूरों से बीजेपी शासित राज्यों से लौटकर बंगाल में अपना कारोबार शुरू करने की अपील की थी।

टीएमसी ने इन घटनाओं को बीजेपी की बंगालियों के खिलाफ मुहिम का नतीजा बताया है। संबलपुर में एक बंगाली प्रवासी मजदूर की लिंचिंग पर टीएमसी ने कहा था कि एक भारतीय नागरिक को इसलिए पीट-पीटकर मार डाला गया क्योंकि भीड़ ने यह झूठ मान लिया कि बंगाली घुसपैठिए हैं।