पश्चिम बंगाल बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चार्जशीट पेश की है। इसमें ममता पर करप्शन के कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्टः
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने तो अपना चुनावी घोषणा पत्र पहले ही जारी कर दिया है. लेकिन अब सरकार को घेरने की अपनी रणनीति के तहत भाजपा ने ममता बनर्जी के 15 साल के कार्यकाल पर एक चार्जशीट तैयार की है. इसे शनिवार को केदंरीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में जारी करेंगे. उसके बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में पार्टी का संकल्प पत्र जारी किया जाएगा.
लेकिन आखिर क्या है इस चार्जशीट में. दरअसल करीब 40 पेज की इस चार्जशीट में सरकार की 15 साल की नौकरियों और राज्य की बदहाली को विस्तार से बताया गया है. यह चार्जशीट राज्य के हर इलाके तक पहुंचाई जाएगी.
भाजपा सूत्रों ने बताया क इस 14-सूत्री चार्जशीट में भ्रष्टाचार से कुशासन और घोटाले से उद्योगों की बदहाली तक हर समस्या का विस्तार से जिक्र किया गया है. इसके कवर पेज पर पीठ की ओर से ममता बनर्जी की तस्वीर है. भाजपा नेताओं की व्याख्या है कि यह तस्वीर सत्ता से ममता के बाहर जाने का प्रतीक है.
भीतर के पेज पर चार्जशीट की भूमिका लिखी गई है. उसके बाद पहले अध्याय में भ्रष्टाचार और घोटालों का जिक्र किया गया है. इसमें 10 हजार करोड़ के कथित राशन घोटाले के अलावा स्कूल सेवा आयोग की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, मनगेरा में कथित भ्रष्टाचार, प्रधानमंत्री आवास योजना में तृणमूल नेताओं के कमीशन या कटमनी, चार सौ करोड़ का लाटरी घोटाला, मिडे-डे मील घोटाला, बाढ़ और चक्रवाती तूफान से राहत के मद में मिली केंद्रीय रकम में सैकड़ों करोड़ के घोटाले औऱ 17 हजार करोड़ के सारदा चिटफंड घोटाले का विस्तार से जिक्र किया गया है.
दूसरे अध्याय में प्रशासनिक अराजकताओं का जिक्र करते हुए 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते से वंचित करने और सातवें वेतन की सिफारिशों को लागू नहीं करने की बात कही गई है. इसके अलावा इसमें एसआईआर के काम में बाधा पहुंचाने और सीमावर्ती इलाकों में कंटीले तारो की बाड़ के लिए जमीन नहीं देकर घुसपैठियों की मदद करने का आरोप लगाया गया है.
लोकतंत्र पर हमला शीर्ष अध्याय में राज्य में राजनीतिक हत्याओं और हिंसा की बढ़ती घटनाओं का जिक्र किया गया है. इसमें वर्ष 2011 से 2020 के बीच 114 राजनीतिक हत्याओं का दावा किया गया है. इसमें कहा गया है कि सीएजी की रिपोर्ट के हवाले कहा गया है कि सरकार ने वर्ष 2021-22 के दौरान विभिन्न मदों में केंद्र से मिली 2.29 लाख करोड़ की रकम का कोई हिसाब नहीं दिया है.
महिलाओं की सुरक्षा वाले अध्याय में संदेशखाली से लेकर आर.जी. कर और ला कालेज की छात्रा के साथ रेप के अलावा कामदुनी कांड का जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में बंगाल देश में चौथे स्थान पर है. पूरे देश में होने वाली एसिड हमले की घटनाओं में 27.5 फीसदी इसी राज्य में हुई हैं. ज्यादातर मामलों की जांच किसी मुकाम तक नहीं पहुंच सकी है.
औद्योगिक परिदृश्य वाले अध्याय में कहा गया है कि बंगाल उद्योगों की कब्रगाह बनता जा रहा है. राज्य पर आठ लाख करोड़ का कर्ज है. यहां नया निवेश नहीं हो रहा है. नतीजतन रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं और पढ़े-लिखे बेरोजगारों की तादाद लगातार बढ़ रही है. पार्टी का दावा है कि इस सरकार के कार्यकाल में साढ़े छह हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों ने यहां से बोरिया-बिस्तर समेट लिया है. बंगाल आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहा है और प्रति व्यक्ति आय में गिरावट आई है.
इसमें खेती की दुर्दशा और आलू किसानों की आत्महत्या का भी जिक्र है. चार्जशीट में कहा गया है कि धान के उत्पादन में कभी पहले नंबर पर रहा बंगाल अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. इसमें सौ करोड़ के बीज और खाद घोटाले का भी आरोप लगाया गया है.
शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हे कहा गया है कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है. राज्य के युवा पढ़ाई के लिए दक्षिण भारतीय राज्यों का रुख कर रहे हैं. कलकत्ता और जादवपुर जैसे विश्वविद्यालयों का स्तर तेजी से गिरा है.
इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा है कि सरकारी अस्पतालों की संख्या बढ़ने की बजाय घटी है. सरकार ने यहां आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं की है और स्वास्थ्य के मद में बजट आवंटन नहीं बढ़ाया गया है.
चार्जशीट में वक्फ संपत्तियों में घोटाले के साथ ही चाय बागान और उसके मजदूरों की बदहाली का जिक्र है. इसके अलावा आदिवासियों के पिछड़ेपन का जिक्र करते हुए बीते महीने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बंगाल दौरे के समय उनके कथित अपमान का जिक्र किया गया है.
इसमें उत्तर बंगाल की कथित उपेक्षा और पिछड़ेपन का आरोप भी दोहराया गया है. इसके साथ ही राज्य के कथित सिंडीकेट राज का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कोयला और बालू जैसे प्राकृतिक संसाधनों की लूट मची है.
राज्य सरकार पर आरोप है कि वह कोलकाता में मेट्रो रेलवे जैसी केंद्रीय परियोजनाओं की प्रगति में रोड़े अटका रही है. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण की अनुमति दी जा रही है. पार्टी ने कोलकाता से सटे दक्षिण 24-परगना जिले से भारी तादाद में नाबालिग युवतियों और बच्चों की तस्करी का भी आरोप लगाया है.