पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को शुभेंदु अधिकारी की पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। यह गिरफ़्तारी तब हुई जब कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी ने अपने खेमे के उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा की। गिरफ्तारी का समय राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। इससे पहले ममता खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाक़ात के बाद अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी।

ममता ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के बाद कहा था कि उनका गुट अब नंदीग्राम से कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। ममता के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की स्थिति काफ़ी मज़बूत मानी जा रही है। और इसी बीच, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को लोकतंत्र पर हमला क़रार दिया है। पार्टी ने कहा, 'हम नंदीग्राम से इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान और ऑब्ज़र्वर सुभाशीष भट्टाचार्य (टाटा) की गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा करते हैं।'
शुरुआती रिपोर्टों में इस मामले को पुराने हत्या के मामले से जोड़ा गया है। हालाँकि गिरफ्तारी की कानूनी धाराओं और मामले की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन रिपोर्ट है कि प्रधान को 2007 में नंदीग्राम में ज़मीन अधिग्रहण के ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान एक हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया गया। 2007 का नंदीग्राम ज़मीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर के अहम संघर्षों में से एक है। इस आंदोलन ने तृणमूल कांग्रेस को लेफ्ट फ्रंट के ख़िलाफ़ अपना अभियान खड़ा करने में मदद की, जिसने पश्चिम बंगाल पर 34 साल तक शासन किया था।

ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से पहले ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया था। ममता के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनका गुट नंदीग्राम से कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन देगा।
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ममता ने अपने फैसले को INDIA गठबंधन के साथ एकजुटता से जोड़ते हुए कहा कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में विपक्षी दलों के बीच एकजुटता ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस को समर्थन देगी और बीजेपी को देश से हटाने की लड़ाई जारी रहेगी।

ममता के मुताबिक कांग्रेस और उनकी पार्टी एक-दूसरे की सहयोगी हैं और नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन विपक्षी एकता का संदेश है। उन्होंने यह भी बताया कि INDIA गठबंधन के दूसरे नेताओं के साथ उनकी बातचीत हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक़ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनसे फोन पर बात की थी।

संचिता प्रधान डे ने क्यों वापस लिया नाम?

ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को नंदीग्राम उपचुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। उनका नाम वापस लेना इसलिए भी अहम माना गया क्योंकि इससे कुछ ही समय पहले तृणमूल के भीतर विभाजन और पार्टी के नाम-चिह्न को लेकर विवाद के बीच नंदीग्राम का मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया था।

रिपोर्टों के अनुसार नाम वापस लेने से पहले संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से राज्य सचिवालय नबन्ना में मुलाकात की थी। बाद में ममता बनर्जी ने साफ़ किया कि उनके गुट की ओर से नंदीग्राम में कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा और कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया जाएगा।

प्रधान की गिरफ्तारी का होगा उपचुनाव पर असर?

ममता के समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने नंदीग्राम के चुनावी मुक़ाबले को नया मोड़ दे दिया। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने गिरफ्तारी की निंदा की है।


नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम सीट रही है। यहां ममता बनर्जी और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच पुराना राजनीतिक मुकाबला रहा है। ऐसे में उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को ममता का समर्थन मिलने के बाद मुक़ाबले का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। ममता गुट का अपना उम्मीदवार हटाना और कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करना भी असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम है। दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा रहे हैं, हालाँकि पश्चिम बंगाल में दोनों के बीच चुनावी मुकाबले की स्थिति भी रही है। नंदीग्राम में यह समर्थन विपक्षी एकता के लिहाज से अहम घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।

टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी विवाद

नंदीग्राम उपचुनाव तब हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर गंभीर संगठनात्मक विवाद सामने आया है। चुनाव आयोग ने विवाद के बीच 17 सितंबर को 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और पार्टी के पारंपरिक 'फूल और घास' चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था।
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इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए लागू होगी। नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

ममता ने ECI के फैसले पर भी सवाल उठाए

चुनाव आयोग के फ़ैसले पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आयोग के फैसले को लोकतंत्र के लिए 'ब्लैक डे' बताया और राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। ममता ने दावा किया कि उनके गुट के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है और उनके गुट के बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव है और उनके समर्थकों को दूसरे गुट में जाने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ममता ने कहा कि उनका गुट इस फैसले के सामने नहीं झुकेगा और वह अपने राजनीतिक संगठन की पहचान के लिए लड़ाई जारी रखेंगी।
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अब नंदीग्राम में मुकाबला और पेचीदा

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने नंदीग्राम उपचुनाव को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार के ख़िलाफ़ चुनाव के बीच पुलिस कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इस घटनाक्रम का चुनावी असर क्या होगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल नंदीग्राम में तीन बड़े मुद्दे एक साथ दिखाई दे रहे हैं- ममता बनर्जी का कांग्रेस को समर्थन, तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विभाजन और कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी। 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले अब इस सीट पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।