पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वोटर लिस्ट से 91 लाख से ज़्यादा नाम काटे जाने को फिर से अदालत में चुनौती देंगी। उन्होंने बुधवार को वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की तीखी आलोचना की और कहा कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस मामले में फिर से कोर्ट जाएगी और कटे हुए नामों को वापस बहाल करवाएगी। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर वोटर लिस्ट में बदलाव कर रही है ताकि टीएमसी को नुक़सान पहुँचाया जा सके।

91 लाख नाम हटाए गए

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, विशेष गहन समीक्षा यानी एसआईआर के दौरान 90.83 लाख से ज़्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। यह कुल वोटरों का क़रीब 11.85 प्रतिशत है।

ताज़ा ख़बरें
अक्टूबर 2025 में पश्चिम बंगाल में कुल वोटरों की संख्या 7.66 करोड़ थी। 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 63.66 लाख नाम काटे गए थे। ये कुल मतदाताओं का लगभग 8.3% था। इससे मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई थी। इसके बाद क़रीब 60 लाख मतदाताओं के नाम एडजुडिकेशन यानी जाँच के अधीन लाए गए थे। इसमें से 27 लाख से ज़्यादा यानी क़रीब 45 फीसदी नाम हटा दिए गए। इस तरह कुल मिलाकर 91 लाख नाम काट दिए गए। इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है।

बीजेपी पर साज़िश का आरोप

मतदाता सूची से नाम काटे जाने पर ममता बनर्जी ने बीजेपी पर साज़िश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है, 'यह सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है। असली वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।'
मुख्यमंत्री ने साफ़ कहा कि तृणमूल कांग्रेस मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ वह फिर से अदालत का रुख करेंगी। उन्होंने कहा,
हम कोर्ट जाएंगे और इन कटे हुए नामों के ख़िलाफ़ लड़ेंगे। वोट देने का अधिकार संविधान में दिया गया है। इसे इस तरह मनमाने ढंग से नहीं छीना जा सकता।
ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल सीएम
ममता बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि जब विवाद अभी सुलझा नहीं है, तो चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को फ्रीज क्यों कर रहा है।

पिछली बार सुप्रीम कोर्ट ने क्या राहत दी थी?

फ़रवरी में भी ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट जा चुकी हैं और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग कर चुकी हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि यह एसआईआर प्रक्रिया पक्षपाती है, नाम हटाने पर ज़्यादा जोर दे रही है और लाखों सही मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त मौका दिए हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इसमें ख़ासकर महिलाओं, शादी के बाद नाम-पता बदलने वालों, या छोटी स्पेलिंग की गलतियों वालों के नाम हटाए जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर फ़रवरी-मार्च 2026 में कई सुनवाइयाँ कीं। लेकिन अदालत ने एसआईआर प्रक्रिया को नहीं रोका। हालाँकि इसने कुछ अहम निर्देश दिए। अदालत ने नाम हटाए जाने या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में अपील सुनने के लिए ट्रिब्यूनल्स बनाने के निर्देश दिए। इनमें कलकत्ता हाई कोर्ट के सर्विंग या रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को शामिल करने को कहा गया। कोर्ट ने साफ़ कहा था कि नाम मिसमैच या छोटी स्पेलिंग गलती को अकेले आधार बनाकर नाम नहीं हटाया जा सकता। एसआईआर प्रक्रिया पर अदालत की निगरानी बढ़ाई गई। हालाँकि, ये सब होने के बाद भी बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बीजेपी और चुनाव आयोग पर आरोप

बहरहाल, हुगली जिले के अरामबाग में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के कहने पर काम कर रहा है। लोगों को फोन पर धमकाया जा रहा है। वोटरों को लालच देकर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वोटर लिस्ट में बदलाव करके टीएमसी के वोटरों को कमजोर करने की साज़िश रची जा रही है। बलागढ़ में दूसरी रैली में उन्होंने और तेज हमला बोला। उन्होंने कहा, 'बीजेपी को वोट देने का मतलब है कि बंगाल की संस्कृति और खान-पान पर भी हमला होगा। लोग सावधान रहें।'
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

क्यों हो रहा है विवाद?

चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट की समीक्षा डुप्लिकेट नाम, मृत व्यक्तियों और गैर-योग्य लोगों को हटाने के लिए की जा रही है। लेकिन टीएमसी और अन्य विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि असली वोटरों के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं ताकि चुनाव में फायदा उठाया जा सके। इस मुद्दे पर अब चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर बड़ा बहस छिड़ गया है।

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति और गरम हो गई है। तृणमूल कांग्रेस जल्द ही कोर्ट में नई याचिका दायर करने वाली है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पर हमला तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट का मुद्दा बंगाल की सियासत का मुख्य मुद्दा बना रहने वाला है।