सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि ममता सरकार की लक्ष्मीर भंडार योजना में हमें बहुत शिकायतें मिलीं इसलिए अब हम नई योजना अन्नपूर्णा योजना शुरू कर रहे हैं, जिसमें साफ-सुथरी लिस्ट बनाई जाएगी। वोटर लिस्ट से नाम कटने और CAA के तहत आवेदन न करने वाले अयोग्य हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की प्रसिद्ध लक्ष्मीर भंडार योजना में क़रीब 30 लाख लाभार्थी अयोग्य पाए गए हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जिनके नाम वोटर लिस्ट से हमेशा के लिए हटा दिए गए या SIR से जुड़े ट्रिब्यूनल में अपील नहीं की या जिन्होंने सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून के तहत नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने नबन्ना से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'हम समझते थे कि लक्ष्मीर भंडार की लिस्ट जांच ली गई है, लेकिन हमें बहुत शिकायतें मिलीं। अब हम नई योजना अन्नपूर्णा योजना शुरू कर रहे हैं, जिसमें साफ-सुथरी लिस्ट बनाई जाएगी।'
लक्ष्मीर भंडार योजना की स्थिति
लक्ष्मीर भंडार योजना में फिलहाल 2.2 करोड़ महिलाएँ लाभ ले रही हैं। 1 जून 2026 से बीजेपी सरकार की नई अन्नपूर्णा योजना लागू होगी। पुरानी योजना में महिलाओं को 1500 रुपये और एससी-एसटी महिलाओं को 1700 रुपये मिलते थे। नई योजना में यह राशि बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति महीना कर दी गई है। अयोग्य पाए गए लाभार्थियों को नई योजना में शामिल होने के लिए नए फॉर्म भरने होंगे।
क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'जो लोग अभी लक्ष्मीर भंडार की राशि ले रहे हैं, वे नया फॉर्म भरने और स्वीकृत होने तक पुरानी योजना वाली राशि ही पाएंगे। हमारा मुख्य लक्ष्य अयोग्य लोगों को हटाकर साफ लिस्ट बनाना है।' उन्होंने एक उदाहरण दिया, 'बहारामपुर के राधारघाट-1 ग्राम पंचायत में रकिबुल शेख नाम का एक पुरुष, जिसके पिता का नाम मंसूर शेख है, वह भी लक्ष्मीर भंडार की महिला योजना की राशि ले रहा था। वेरिफिकेशन न होने की वजह से ऐसे फर्जी मामले हो गए।'
नई योजना में क्या है प्रक्रिया
सरकार नए फॉर्म जारी करेगी। फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से भरे जा सकते हैं। पंचायत और नगरपालिका क्षेत्रों में स्थानीय अधिकारी और सुपरवाइजर घर-घर जाकर फॉर्म लेंगे। लोगों को फॉर्म भरने के लिए 90 दिन का समय मिलेगा। 2 जून तक फॉर्म भरने और स्वीकृत होने वालों को अगले महीने से ही नई राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। नए चुने गए विधायक भी इस काम में मदद करेंगे। 15 से 17 जून तक पूरे राज्य में जनकल्याण शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोग फॉर्म जमा कर सकेंगे।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह बहुत बड़ा काम है, इसलिए मुख्य सचिव के नेतृत्व में कई विभाग, स्थानीय प्रशासन और आईटी विभाग साथ मिलकर पारदर्शी लिस्ट तैयार करेंगे। फॉर्म में परिवार की पूरी जानकारी मांगी जाएगी।
कौन नहीं ले सकता लाभ?
- आयकर भरने वाली महिलाएं
- केंद्र या राज्य सरकार की नौकरी करने वाली महिलाएं
- अन्य अयोग्य पाई गईं महिलाएँ
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बयान
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट की विशेष समीक्षा यानी SIR को वैध बताया है, लेकिन कहा कि EC का फ़ैसला सिर्फ़ वोटर लिस्ट के लिए है, नागरिकता के सवाल पर अंतिम फ़ैसला नहीं माना जा सकता है। वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों के नाम को नागरिकता जाँच करने वाली सक्षम संस्था को 4 महीने के अंदर भेजना होगा। वहाँ से नागरिकता साबित होने पर चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना होगा।
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महाराष्ट्र की योजना में भी मिली थी गड़बड़ियाँ
महाराष्ट्र में भी बीजेपी सरकार ने अपनी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना की जांच कराई थी। वहां 69 लाख नाम हटाए गए। लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ से घटकर 1.77 करोड़ रह गई। इससे योजना का सालाना खर्च 45000 करोड़ से घटकर 26000 करोड़ रुपये हो गया। हालाँकि, राज्य में बीजेपी सरकार ने ही चुनाव से ऐन पहले इस योजना को जल्दबाज़ी में शुरू किया था। महाराष्ट्र में ऐसी जल्दबाज़ी में योजना शुरू करने के लिए और चुनाव में लाभ लेने के लिए बीजेपी की कड़ी आलोचना की गई थी।
इधर, बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपील की है कि लोग जल्दबाजी न करें। 90 दिन का पर्याप्त समय दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि योजना में सिर्फ सही और जरूरतमंद महिलाओं को ही लाभ मिले।