नेताजी पर बीजेपी सांसद नागेंद्रनाथ रॉय के विवादित बयान से बवाल मचा है। बीजेपी सांसद नागेंद्रनाथ रॉय के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पूछे जाने पर पश्चिम बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन कानून सभी के लिए एक समान है।'
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर बीजेपी सांसद नागेंद्रनाथ रॉय के अपमानजनक टिप्पणी और इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसी ही टिप्पणियों को लेकर चौतरफ़ा घिरे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्रवाई की बात तो की लेकिन अपनी पार्टी के सांसद का नाम नहीं लिया। सीएम ने कहा है कि नेताजी का अपमान करने वालों की गिरफ्तारी होगी। हालांकि, जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या विवादित बयान देने वाले बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्रनाथ रॉय उर्फ अनंत महाराज के खिलाफ भी कार्रवाई होगी, तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और जो भी नेताजी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करेगा, उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया पर नेताजी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन कानून सभी के लिए बराबर है। चाहे वह सांसद हो, विधायक हो, किसी भी दल का नेता हो, सरकारी अधिकारी हो या पुलिसकर्मी। पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी।' मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि यदि किसी ने सोशल मीडिया पर नेताजी के खिलाफ कोई आपत्तिजनक पोस्ट की है तो उसे तुरंत हटा दें। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्ट हटाने से कार्रवाई नहीं रुकेगी, क्योंकि पुलिस पहले से ऐसे मामलों की जांच कर रही है। सीएम अधिकारी के मुताबिक, 'पश्चिम बंगाल में नेताजी का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
बीजेपी सांसद के बयान से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्रनाथ रॉय उर्फ अनंत महाराज के एक बयान के बाद शुरू हुआ। उन्होंने एक जनसभा में कथित तौर पर कहा था कि 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पास आज़ाद हिंद फौज संगठित करने की क्षमता नहीं थी। आज़ाद हिंद फौज के सैनिक पहले ब्रिटिश सेना के थे, जिन्हें जर्मनी ने बंदी बनाया था। नेताजी ने इन सैनिकों का गलत इस्तेमाल किया।' कुछ रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने नेताजी को 'युद्ध अपराधी' तक बता दिया था। उन्होंने कूचबिहार के महाराजा जगद्दीपेंद्र नारायण को भारत की आजादी का बड़ा नायक बता दिया।बीजेपी सांसद नागेंद्रनाथ रॉय की इन टिप्पणियों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और कई संगठनों ने इसका विरोध किया।
सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
बीजेपी सांसद के बयान के बाद सोशल मीडिया पर नेताजी से जुड़े कई विवादित पोस्ट, मॉर्फ तस्वीरें और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। सरकार का कहना है कि कुछ लोगों ने नेताजी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री साझा की, जिसके बाद कई शिकायतें दर्ज कराई गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सभी मामलों में पुलिस जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर बंगाल के कई विधायक उनसे मिले और उन्होंने नेताजी के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और किसी भी व्यक्ति को महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
'नेताजी बोस सेवा केंद्र' बनाने का ऐलान
बीजेपी सांसद के विवादित टिप्पणी को लेकर घिरे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक नई पहल की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हर विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेवा केंद्र' शुरू करेंगे। इन सेवा केंद्रों के जरिए विधायक आम लोगों से सीधे जुड़ेंगे। सरकार इन केंद्रों के लिए नेताजी की पारंपरिक धोती पहने तस्वीर भी उपलब्ध कराएगी।
बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें सम्मान दिया है। मुख्यमंत्री ने भी कहा कि नेताजी का सम्मान सभी को करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह साफ़ नहीं किया कि बीजेपी सांसद नागेंद्रनाथ रॉय के खिलाफ राज्य सरकार सीधे कोई विशेष कार्रवाई करेगी या नहीं।राजनीतिक माहौल गरमाया
नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर हुई इस टिप्पणी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष सरकार से साफ़ कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा और किसी भी व्यक्ति को नेताजी का अपमान करने की छूट नहीं दी जाएगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस जांच के बाद किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।