पश्चिम बंगाल में टीएमसी का संकट बढ़ता जा रहा है। अब विधायक मदन मित्रा के वाहन पर हमला किया गया। दूसरी तरफ टीएमसी अल्पसंख्यक के नेता ने पार्टी छोड़ दी है। TMC crisis in West Bengal worsening. MLA Madan Mitra vehicle attacked. TMC minority leader has left party.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का संकट और जन-आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में 15 साल पुराने शासन के अंत के बाद अब पार्टी चौतरफा मुश्किलों से घिर गई है। शनिवार देर रात को जहां एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा और उनकी गाड़ी पर अंडे फेंके गए, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अल्पसंख्यक सेल के राज्य सचिव अजमल सिद्दीकी ने अभिषेक बनर्जी के 'तानाशाही रवैये' को जिम्मेदार ठहराते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
कमरहटी में मदन मित्रा की 'कट मनी' पर बवाल क्यों
शनिवार देर रात को कमरहटी निर्वाचन क्षेत्र के अरियादहा (Ariadaha) इलाके में टीएमसी के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
घटना की वजह: इलाके में ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा चालकों ने कमरहटी के वार्ड नंबर 14 के एक पार्षद के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पिछले कुछ वर्षों में टीएमसी नेताओं ने उनसे अवैध रूप से 'कट मनी' (जबरन वसूली/कमीशन) ली थी। राज्य में सत्ता बदलने के बाद अब लोग अपने पैसे वापस करने और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे।
अंडों से हमला: जब मदन मित्रा स्थिति का जायजा लेने इलाके में पहुंचे, तो गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और उस पर अंडे फेंके। भीड़ के उग्र रूप को देखते हुए विधायक को वहां से निकलना पड़ा।
दावे और आरोप: मदन मित्रा ने बाद में दावा किया कि हमले के वक्त वे गाड़ी के अंदर मौजूद नहीं थे, हालांकि इस हंगामे के दौरान उनके ड्राइवर के साथ मारपीट किए जाने के आरोप सामने आए हैं। मित्रा ने इस पूरी घटना को भाजपा (BJP) समर्थित शरारती तत्वों की एक सोची-समझी साजिश बताया है। वहीं स्थानीय निवासियों का कहना है कि नेताओं के भ्रष्टाचार के खिलाफ इलाके में काफी समय से असंतोष पनप रहा था।पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों में घिरे टीएमसी नेताओं के खिलाफ 'अंडे' फेंकना जनता के विरोध का एक नया प्रतीक बन चुका है। हाल ही में गिरफ्तार टीएमसी नेता जय प्रकाश मजूमदार और पूर्व मंत्री स्वरूप बिस्वास की कोर्ट में पेशी के दौरान भी लोगों ने अंडे हाथ में लेकर नारेबाजी की थी। पिछले हफ्ते सोनारपुर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की गाड़ी पर भी पत्थर और अंडे फेंके गए थे।
टीएमसी के मुस्लिम नेता ने इस्तीफा क्यों दिया, क्या वजह बताई
टीएमसी के भीतर आंतरिक कलह उस समय और उजागर हो गई जब शनिवार को टीएमसी के राज्य अल्पसंख्यक सेल के सचिव अजमल सिद्दीकी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के पतन के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी के भतीजे और राजनीतिक उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।
हज यात्रा से लौटने के ठीक दो दिन बाद सिद्दीकी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "आज पार्टी सिर्फ एक इंसान की वजह से बिखर रही है और वो हैं अभिषेक बनर्जी। उनका तानाशाही रवैया और हमारे ऊपर किया गया उत्पीड़न अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका था।" उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नेताओं के खिलाफ 12-13 साल पुराने झूठे मामले दर्ज कराए गए और पैसों की मांग की गई।
सिद्दीकी ने कहा कि टीएमसी में रहना अब उनके लिए बेहद असहज हो गया था क्योंकि पार्टी के अधिकांश नेता अनैतिक गतिविधियों और घोटालों में लिप्त हैं, जिससे सिर्फ बदनामी मिल रही है। यह पार्टी अब जनता के लिए कोई वास्तविक काम नहीं कर रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे भाजपा (BJP) में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। उनका एकमात्र मकसद बंगाल का विकास, उद्योगों की स्थापना और गरीबों को रोजगार दिलाना है।
इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रही टीएमसी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा से हारने के मात्र एक महीने के भीतर टीएमसी अपने अस्तित्व के सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है:
58 विधायकों का विद्रोह: कुछ ही दिन पहले पार्टी को तब सबसे बड़ा झटका लगा जब बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) रथिंद्र नाथ बोस ने विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 बागी टीएमसी विधायकों के समूह को सदन में मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता दे दी।
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती: हालांकि ये बागी विधायक अभी भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हैं, लेकिन उन्होंने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और उनके अधिकारों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
नेतृत्व की बैठक का बहिष्कार: इस संकट की गंभीरता शुक्रवार को तब और साफ देखने को मिली जब ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में कुल गैर-बागी विधायकों में से केवल 8 विधायक ही शामिल होने पहुंचे।पार्टी के भीतर मचे इस आंतरिक घमासान और सड़कों पर टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम जनता के बढ़ते आक्रोश ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है।
क्या अवसरवादी नेताओं की वजह से बर्बाद हुई टीएमसी
टीएमसी जब सत्ता में थी, तो पार्टी में बड़े पैमाने पर ऐसे लोग शामिल हुए थे जो अपना स्वार्थ सरकार के जरिए पूरा करने आए थे। इनमें स्थानीय नेताओं से लेकर बंगाली सिनेमा जगत तक के लोग शामिल थे। कुछ ममता बनर्जी से टिकट पाने और जीतकर सरकार का हिस्सा भी बन गए। लेकिन जैसे ही पार्टी सत्ता से बेदखल हुई, फौरन ही ऐसे नेताओं ने सबसे पहले टीएमसी और ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया। ममता अब इंडिया गठबंधन की तरफ फिर लौट रही हैं, जिसके नेतृत्व से कभी वो सहमत नहीं थीं। आज वो राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार हैं।