टीएमसी में बगावत के बाद पार्टी नेतृत्व ने मौजूदा पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को हटा दिया है और उनकी जगह चंद्रिमा भट्टाचार्य को नया अध्यक्ष बनाया गया है। डेरेक ओब्रायन और डोला सेन के रूप में दो नए संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव भी बनाए गए हैं।
टीएमसी में बगावत के बाद अब ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़ा फेरबदल किया है। ममता ने अपने पुराने अपने विश्वस्त नेताओं को अहम पदों पर रखा है और कुछ युवा चेहरों को हटाया गया है। अभिषेक बनर्जी के कई करीबियों का पत्ता साफ़ हुआ है और उनको बैलेंस करने की कोशिश हुई है। पश्चिम बंगाल इकाई के मौजूदा राज्य प्रमुख सुब्रत बख्शी की जगह ममता की करीबी चंद्रिमा भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है। सुब्रत को अभिषेक का क़रीबी माना जाता है।
ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव पद तो बरकरार रखा है, लेकिन विरोधियों के निशाने पर होने को देखते हुए दो नए संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव भी बनाए गए हैं। ये हैं राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन और डोला सेन। माना जा रहा है कि इससे बागी नेताओं को यह संकेत देने की कोशिश की गई है कि फ़ैसले मिलकर लिए जाएंगे, न कि अभिषेक अकेले कोई फैसला लेंगे।
राज्य इकाई में बड़ा फेरबदल
टीएमसी ने अपनी पश्चिम बंगाल इकाई को पूरी तरह नया रूप दिया है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को हटा दिया गया है। उनकी जगह पूर्व मंत्री और ममता की करीबी चंद्रिमा भट्टाचार्य को नया राज्य अध्यक्ष बनाया गया है। सुब्रत बख्शी को अब पार्टी की राष्ट्रीय कार्य समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।इन नेताओं को मिली जगह
साजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को नया राज्य उपाध्यक्ष बनाया गया है। अरूप बिस्वास, राजीब बनर्जी, बाबर अली, पुलक रॉय और अशिमा पात्रा को राज्य महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा कई अन्य पुराने और विश्वस्त नेताओं को कार्य समिति में जगह दी गई है।
ममता ठाकुर ममता बनर्जी की करीबी हैं। मतुआ समुदाय की प्रमुख नेता हैं और राज्यसभा सांसद हैं। लंबे समय से टीएमसी में और ममता की पसंदीदा हैं। नयना बंद्योपाध्याय पुरानी और वरिष्ठ नेता हैं। उनके ममता के साथ अच्छे संबंध रहे और उनकी विश्वस्त मानी जाती हैं। स्वाति खांडेकर टीएमसी की पुरानी कार्यकर्ता व नेता हैं।
अरूप बिस्वास बहुत पुराने और वरिष्ठ नेता हैं और ममता के लंबे समय से सहयोगी हैं। राजीब बनर्जी पुराने मंत्री हैं और ममता गुट का हिस्सा माने जाते हैं। अशिमा पात्रा को भी ममता का करीबी माना जाता है। साजदा अहमद और बाबर अली को छोड़कर बाकी ज्यादातर ममता बनर्जी के पुराने और विश्वसनीय सहयोगी हैं।
इनमें से ज़्यादातर ममता बनर्जी के करीबी और पुराने व वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। माना जा रहा है कि यह अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को बैलेंस करने के लिए किया गया।
मोर्चा संगठनों में बदलाव
अभिनेत्री से सांसद बनीं सायोनी घोष को तृणमूल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष बरकरार रखा गया है। माला रॉय को महिला विंग अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी ने कहा है कि आगे और नामों की घोषणा की जाएगी।
बगावत के बाद बदलाव
यह बदलाव हाल में पार्टी में हुई बड़ी बगावत के बाद आया है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल की 80 में से 60 नई चुनी गई विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की इच्छा के खिलाफ जाकर निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया। इस घटना के कुछ ही मिनट बाद पार्टी ने सभी कमेटियों और मोर्चा संगठनों को भंग कर दिया और पूरे संगठन का 'आत्ममंथन और समीक्षा' करने का फैसला लिया।20 लोकसभा सांसद बीजेपी के संपर्क में
रिपोर्ट है कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं। राज्यसभा सांसद सुखेंद्र शेखर रॉय ने एक दिन पहले चेतावनी देते हुए कहा था कि पार्टी राज्यसभा में तो सुरक्षित हो सकती है, लेकिन लोकसभा में भी ऐसा ही विद्रोह हो सकता है।' एक वरिष्ठ टीएमसी सांसद ने कहा, 'संसदीय दल में टूट अब समय की बात है। करीब 20 सांसद पहले से ही भाजपा से संपर्क में बताए जा रहे हैं और यह संख्या बढ़ सकती है।'
लोकसभा और राज्यसभा में कुल मिलाकर टीएमसी के 41 सांसद हैं। यदि लोकसभा के ये 20 सांसद भी बीजेपी में चले गए तो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगेगा। वैसे कहा जा रहा है कि विधायकों की बगावत से बीजेपी को कुछ फायदा नहीं होना वाला है और उसका असली मक़सद सांसदों को तोड़ना ही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बीजेपी को लोकसभा में बहुमत नहीं है और वह चाहेगी कि संसद में वह मज़बूत हो।लोकसभा में दो-तिहाई यानी करीब 20 सांसद टूट जाएँ तो यह बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। बीजेपी के पास फिलहाल 240 सांसद हैं, बहुमत के लिए 272 चाहिए। टीएमसी के 20 सांसद जुड़ने से बीजेपी बहुमत के करीब पहुंच जाएगी और एनडीए सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं और नाराजगी जता रही हैं।
ममता के कालीघाट वाले घर पर बैठक
बहरहाल, टीएमसी में बड़े बदलाव का यह फ़ैसला ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट वाले घर पर हुई राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक के बाद लिया गया। बैठक में कुछ ही नेताओं ने हिस्सा लिया। ममता बनर्जी अब अपनी पार्टी को एकजुट रखने और आंतरिक कलह पर काबू पाने की कोशिश में लगी हुई हैं। माना जा रहा है कि यह बदलाव पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से महत्व देने की दिशा में है। अभी पार्टी के अंदर की अशांति थमी नहीं है। आने वाले दिनों में और बदलाव हो सकते हैं।