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पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता की हत्या, पार्टी ने तृणमूल पर लगाए आरोप

बीते महीने भर के दौरान राज्य में चार बीजेपी नेताओं की मौत हो चुकी है। कम से कम तीन नेताओं के शव रहस्यमय परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। बीजेपी इन तमाम हत्याओं के लिए तृणमूल कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराती रही है जबकि तृणमूल इसे बीजेपी की अंतरकलह का नतीजा क़रार देती रही है।
प्रभाकर मणि तिवारी

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एक नेता और स्थानीय पार्षद मनीष शुक्ल की हत्या के बाद राज्य में हत्या की कथित राजनीति पर बीजेपी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है। कोलकाता से सटे उत्तर 24 पररगना ज़िले के बैरकपुर इलाक़े में रविवार रात मोटरसाइकिल पर सवार कुछ अज्ञात हमलावरों ने बेहद नज़दीक से गोली मार कर शुक्ल की हत्या कर दी थी। बीजेपी ने इसके लिए तृणमूल कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराते हुए सोमवार को इलाक़े में 12 घंटे का बंद रखा है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना को बीजेपी की अंदरुनी गुटबाज़ी का नतीजा बताया है। यह इलाक़ा तृणमूल से बीजेपी में आने वाले सांसद अर्जुन सिंह का है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फ़िलहाल इस हत्या या राज्यपाल के आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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बैरकपुर एक औद्योगिक इलाक़ा है। इलाक़े में जूट मिलों की भरमार है। यहाँ हिंदीभाषी लोगों की तादाद ही ज़्यादा है। ख़ासकर बीते लोकसभा चुनावों के बाद इलाक़े में तृणमूल कांग्रेस व बीजेपी के बीच लगातार हिंसा की वजह से यह कस्बा अक्सर सुर्खियों में रहा है।

इस बीच, राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी इस मामले में कूद पड़े हैं। मनीष की हत्या की सूचना मिलते ही उन्होंने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव एच.के. द्विवेदी और पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र को सुबह 10 बजे राजभवन बुलाया था। लेकिन उन्होंने न तो कोई जवाब दिया और न ही वे राजभवन पहुँचे। 

धनखड़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी तत्काल फ़ोन करने को कहा था। लेकिन उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया है। इसके बाद राज्यपाल लगातार ट्वीट के ज़रिए सरकार और पुलिस प्रशासन पर हमला करने में जुट गए हैं। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि सुनियोजित तरीक़े से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की राजनीति गहरी चिंता का विषय है। राज्य में क़ानून व व्यवस्था की स्थिति काफ़ी गंभीर है।

टीटागढ़ नगरपालिका के पार्षद शुक्ल को स्थानीय बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का क़रीबी माना जाता था। अर्जुन सिंह की तरह शुक्ल भी पहले युवा तृणमूल कांग्रेस में थे

। सांसद अर्जुन सिंह कहते हैं कि यह हमला एक सुनियोजित साज़िश के तहत किया गया। वह कहते हैं कि हमले की जगह टीटागढ़ थाने के ठीक सामने है, आख़िर पुलिस को इसका पता कैसे नहीं चला?

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक़, शुक्ल रविवार को हावड़ा ज़िले के पाँचला में बीजेपी की एक बैठक में शामिल होने गए थे। वहाँ से लौटने के बाद बीजेपी के स्थानीय दफ्तर में जाते समय उनको गोली मारी गई। उनको तत्काल अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मनीष की मौत की ख़बर फैलने के बाद देर रात उनके समर्थकों ने इलाक़े में काफ़ी तोड़-फोड़ की। बाद में पुलिस और आरएएफ़ के जवानों ने मौक़े पर पहुँच कर हालात पर काबू पाया। बीजेपी समर्थकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।

बीजेपी ने शुक्ल की मौत की सीबीआई जाँच की माँग उठाई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, जो कोलकाता में ही हैं, ने कहा कि शुक्ल की हत्या एक साज़िश के तहत की गई है। अब अर्जुन सिंह की जान को भी ख़तरा है। ममता बनर्जी आतंक के ज़रिए राज चला रही हैं। इस मामले की सीबीआई जाँच होनी चाहिए।

उधर, तृणमूल कांग्रेस के पानीहाटी के विधायक निर्मल घोष ने इस हत्या को बीजेपी की अंदरुनी गुटबाज़ी का नतीजा क़रार दिया है। वह कहते हैं कि इस मामले से तृणमूल कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं है। इस हत्या से साफ़ है कि बैरकपुर में बीजेपी किस पैमाने पर गुटबाज़ी की शिकार है। बैरकपुर के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा का कहना है कि पुलिस इस हत्या से संबंधित तमाम पहलुओं की जाँच कर रही है। लेकिन जाँच पूरी नहीं होने तक इस पर कोई टिप्पणी करना संभव नहीं है।

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यहाँ इस बात का ज़िक्र प्रासंगिक है कि बीते महीने भर के दौरान राज्य में चार बीजेपी नेताओं की मौत हो चुकी है। कम से कम तीन नेताओं के शव रहस्यमय परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। बीजेपी इन तमाम हत्याओं के लिए तृणमूल कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराती रही है जबकि तृणमूल इसे बीजेपी की अंतरकलह का नतीजा क़रार देती रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि अगले साल होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से पहले सत्ता के इन दोनों दावेदारों में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ की तर्ज पर अपने राजनीतिक वर्चस्व के लिए हिंसा का सिलसिला और तेज़ होने का अंदेशा है।

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