West Bengal election results 2026: रुझानों में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है और टीएमसी को क़रीब 118 सीटों का नुक़सान और बीजेपी को क़रीब 114 सीटों का फायदा होता दिख रहा है। पढ़िए, किन क्षेत्रों में टीएमसी और बीजेपी का कैसा प्रदर्शन।
नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी
बीजेपी ने आख़िरकार बंगाल में ममता के क़िले को भी भेद दिया! पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मतगणना के रुझानों में बीजेपी क़रीब 192 सीटों लीड करती दिख रही है, जबकि टीएमसी क़रीब 95 सीटों पर लीड करती दिख रही है। बंगाल में मतगणना के ये सिर्फ़ लीड्स हैं और फाइनल रिजल्ट थोड़े बदल सकते हैं। रुझानों में बीजेपी की इतनी बड़ी बढ़त इसलिए दिख रही है क्योंकि इस बार इसने टीएमसी के गढ़ में भी बड़ी सेंध लगाई है। पिछले चुनावों में उत्तर बंगाल में बढ़िया प्रदर्शन करने वाली बीजेपी इस बार दक्षिण बंगाल और राढ़ बंगाल क्षेत्रों में भी बढ़िया प्रदर्शन करती दिख रही है। इन क्षेत्रों में टीएमसी ने 2021 के चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था।
2021 में टीएमसी ने पूरे राज्य में 215 सीटें जीती थीं और बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं। टीएमसी का दक्षिण बंगाल और राढ़ बंगाल में शानदार प्रदर्शन रहा था। तब टीएमसी को 48.02 फीसदी वोट मिले थे, जबकि बीजेपी को 37.97 फीसदी वोट मिले थे। इस बार ऐसी स्थिति बीजेपी की आती दिख रही है। 2026 के मतगणना के रुझानों में बीजेपी 45 फीसदी से ज़्यादा वोट पाती दिख रही है, जबकि टीएमसी का वोट प्रतिशत क़रीब 40 फीसदी है। टीएमसी को पिछले चुनाव के मुक़ाबले 118 सीटों का नुक़सान और बीजेपी को 114 सीटों का फायदा होता दिख रहा है।
किन क्षेत्रों में कैसा ट्रेंड?
2026उत्तर बंगाल- 54 सीटें: इसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है। इस चुनाव में बीजेपी भारी लीड में है, खासकर कूच बिहार, अलीपुरदुआर, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, दिनाजपुर इलाकों में। वह मतुआ और ट्राइबल व बॉर्डर क्षेत्रों में मजबूत है। टीएमसी मालदा के मुस्लिम-बहुल कुछ इलाकों में लीड कर रही है।
2021
उत्तर बंगाल: बीजेपी का कूच बिहार, अलीपुरदुआर, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग जिले में दबदबा रहा था। उत्तर बंगाल में बीजेपी ने 30 सीटें जीती थीं, जबकि टीएमसी ने मालदा, उत्तर दिनाजपुर के मुस्लिम-बहुल क्षेत्र में 24 सीटें जीती थीं।
पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
2026
दक्षिण बंगाल- 181 सीटें: बीजेपी ने यहां भी बड़ी सेंध मारी है। कोलकाता और आसपास के उत्तर व दक्षिण 24 परगना, हावड़ा में बीजेपी कई सीटों पर लीड कर रही है। हालाँकि, यहाँ टीएमसी भी कुछ सीटों पर लीड कर रही है। कई सीटों पर टीएमसी मजबूत है, लेकिन कुल मिलाकर इस क्षेत्र में इसको भारी नुकसान होता दिख रहा है।
2021
दक्षिण बंगाल: टीएमसी का भारी दबदबा रहा था। टीएमसी ने इस क्षेत्र की 183 सीटों में से 153 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी सिर्फ़ 28 सीटें जीत पाई थी। तब बीजेपी का सबसे बढ़िया प्रदर्शन नादिया जिले में रहा था और इसने 17 सीटों में से 9 सीटें जीती थीं। टीएमसी का मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, हावड़ा, हुगली, पश्चिम मेदिनिपुर में बढ़िया प्रदर्शन रहा था।
2026
राढ़ बंगाल- 57 सीटें: पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, बर्द्धमान जैसे जिले वाले राढ़ बंगााल क्षेत्र में भी बीजेपी का बढ़िया प्रदर्शन रहा। इस क्षेत्र में बीजेपी की भारी लीड है। टीएमसी के कुछ पारंपरिक पॉकेट्स कमजोर पड़े।
2021 राढ़ बंगाल: क्षेत्र में 2021 में टीएमसी का बढ़िया प्रदर्शन रहा था और इसने कुल 57 सीटों में से 39 सीटें जीती थीं। बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं और इसका प्रदर्शन पुरुलिया और बांकुरा क्षेत्र में बढ़िया रहा था।
बंगाल में ऐसे नतीजे के 5 बड़े कारण
बंगाल में बीजेपी ने अपनी इतनी बड़ी जीत के पीछे पांच बड़े कारण बताए हैं।
महिलाओं का साथ
महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में खूब वोट दिए। केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को विधानसभाओं में आरक्षण देने के प्रयास से महिलाओं में अच्छा असर पड़ा। विपक्ष को महिलाओं के खिलाफ बताने वाली बात लोगों को पसंद आई। पार्टी का कहना है कि महिलाओं के वोट में कम से कम 5 प्रतिशत का स्विंग भाजपा को मिला। राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के लगभग बराबर है।
सरकारी कर्मचारियों को लुभाया
भाजपा ने सरकारी कर्मचारियों और नौकरी चाहने वाले युवाओं को खूब आकर्षित किया। सातवें वेतन आयोग लागू करने और खाली पद भरने का वादा किया। दिल्ली की तरह यहां भी कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ नाराजगी थी। करीब 20 से 50 लाख वोट प्रभावित हुए।
केंद्र की विकास योजनाएं
पीएम मोदी बनाम ममता बनर्जी का मुकाबला चला। टीएमसी पर केंद्र की कल्याण योजनाएं लागू न करने और विकास न करने का आरोप लगा। मोदी जी के बार-बार दिए आश्वासन से मध्यम वर्ग और युवा मतदाताओं ने भाजपा को समर्थन दिया।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था
राज्य में चुनावी हिंसा की पुरानी छवि थी। आरएसएस ने लोगों को बिना डरे वोट डालने का भरोसा दिलाया। केंद्र की सीएपीएफ की भारी तैनाती से भी मदद मिली। आरजी कर मामले जैसी घटनाओं ने टीएमसी के खिलाफ माहौल बनाया।
SIR: वोटर लिस्ट साफ करना
विशेष अभियान से 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' वाले 27 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए। 'बाहरी' मतदाताओं की सफाई का मुद्दा भी चला। इससे असली मतदाताओं का वोट सही ढंग से पड़ा।
इस जीत से भाजपा बंगाल में अपनी ताकत दिखाने में कामयाब रही।