बंगाल में टीएमसी होर्डिंग को हटाने को लेकर बड़ा विवाद हो गया। टीएमसी ने भारी पुलिस बल के पार्टी कार्यालय में लाठियों संग घुसने को अत्याचार बताया। पुलिस ने अनधिकृत होर्डिंग हटाने के दौरान झड़प और बाधा डालने का आरोप लगाया है।
अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओब्रायन
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय के बाहर लगे एक कथित अवैध होर्डिंग को हटाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता पुलिस ने टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं और सांसद अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि होर्डिंग हटाने पहुंचे नगर निगम और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली गई, उनसे धक्का-मुक्की की गई और सरकारी कार्य में रुकावट पैदा की गई। वहीं, टीएमसी ने पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए बीजेपी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि भारी पुलिस बल बिना वैध आदेश के उसके कार्यालय में घुसा और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश की गई।
इस मामले में पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कोलकाता नगर निगम ने एक कथित अनधिकृत होर्डिंग हटाने के लिए पुलिस से सुरक्षा मांगी। इसके बाद गुरुवार को पुलिस और नगर निगम की टीम 9, कैमैक स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय पहुंची। पुलिस का कहना है कि जैसे ही टीम होर्डिंग हटाने लगी, वहां मौजूद टीएमसी नेताओं और समर्थकों ने कार्रवाई का विरोध किया। इस दौरान नगर निगम के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को अपना काम करने से रोका गया और मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
पुलिस ने दर्ज की FIR
कोलकाता पुलिस ने इस मामले में अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन, बैसनोर चट्टोपाध्याय, एजेयूबी नेता हुमायूं कबीर और कई अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें दंगा करने, ग़ैरक़ानूनी रूप से इकट्ठा होने, सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने, महिला पर हमला, आपराधिक धमकी देने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों ने समर्थकों के साथ मिलकर सरकारी कार्रवाई को रोकने की कोशिश की।
टीएमसी ने पुलिस कार्रवाई को बताया 'अत्याचार'
टीएमसी ने पुलिस कार्रवाई पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पार्टी कार्यालय में घुस गए। टीएमसी का कहना है कि कई पुलिसकर्मी वर्दी में नहीं थे, कुछ के पास नाम-पट्टिका या पहचान पत्र भी नहीं था, लेकिन उनके हाथों में लाठियां थीं और वे हेलमेट पहनकर पहुंचे थे।पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर एक होर्डिंग हटाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करने की ज]रूरत क्यों पड़ी। टीएमसी ने कहा कि यह किसी प्रशासनिक कार्रवाई से ज्यादा राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश थी।
डेरेक ओब्रायन ने क्या कहा?
टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए लिखा कि यह पूरी कार्रवाई बेहद हास्यास्पद थी। उन्होंने कहा कि टैक्स देने वालों के पैसे से पुलिस की बड़ी टीम सिर्फ एक राजनीतिक दल का साइनबोर्ड हटाने के लिए भेज दी गई।डेरेक ओब्रायन ने यह भी दावा किया कि जिस नोटिस के आधार पर कार्रवाई की गई, उस पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। उनके मुताबिक़ बिना विधिवत हस्ताक्षर वाले नोटिस के आधार पर पार्टी कार्यालय में जबरन प्रवेश करना पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी है। उन्होंने कहा कि वह क़रीब साढ़े तीन घंटे तक पार्टी कार्यालय में मौजूद थे और वहां केवल पार्टी कार्यकर्ता, सांसद और सुरक्षा गार्ड थे।
अदालत से जांच की मांग
टीएमसी ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। पार्टी ने कई सवाल उठाए-
- सादे कपड़ों में आए लोग कौन थे? उनके पास लाठियां क्यों थीं?
- किसके आदेश पर वे पार्टी कार्यालय में दाखिल हुए?
- क्या किसी राजनीतिक दल के दफ्तर में इस तरह प्रवेश करना कानून व्यवस्था बनाए रखने का तरीका है?
टीएमसी का कहना है कि अदालत को इस पूरे घटनाक्रम की जांच करानी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि पुलिस ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया या नहीं।
पुलिस क्या कहती है?
कोलकाता पुलिस का कहना है कि नगर निगम के लिखित अनुरोध पर ही पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था। पुलिस के अनुसार, उसका उद्देश्य केवल नगर निगम के अधिकारियों को सुरक्षा देना था ताकि वे अवैध होर्डिंग हटाने की कार्रवाई पूरी कर सकें। पुलिस का दावा है कि सरकारी काम में बाधा डाले जाने और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार के बाद कानून के मुताबिक मामला दर्ज किया गया है।
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं। टीएमसी इसे राजनीतिक प्रताड़ना बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने केवल क़ानून के अनुसार कार्रवाई की है।