पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले कुछ मतदाताओं को वोटर लिस्ट में जोड़ा गया है। चुनाव आयोग ने मंगलवार को एक नई सूची जारी की जिसमें 1468 मतदाताओं के नाम वापस मतदाता सूची में जोड़ दिए गए हैं। ये नाम सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अपील ट्रिब्यूनल की मंजूरी के बाद शामिल किए गए हैं। दूसरे चरण के लिए लंबित कुल 12.9 लाख अपील लंबित थे। जबकि छह आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। यानी आगामी चरण में क़रीब 12.8 लाख मतदाताओं के वोट देने का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

दूसरे चरण में कितने मतदाता?

चुनाव आयोग द्वारा 1468 नाम जोड़ने के बाद दूसरे चरण के लिए कुल मतदाताओं की संख्या अब 3.22 करोड़ हो गई है। इस चरण में 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। दूसरे चरण का मतदान बुधवार को होना है।
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SIR में कितने नाम कटे?

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अभियान चलाया था। इसमें मतदाता सूची की गहन जाँच की गई। इस प्रक्रिया में कुल क़रीब 91 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इनमें से 27.10 लाख नामों को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज के आधार पर हटाया गया था। बाक़ी 63 लाख से ज़्यादा नाम ड्राफ्ट सूची के दौरान हटा दिए गए थे। इन लोगों को अपील करने का मौक़ा दिया गया। नाम चुनाव आयोग ने 19 अपील ट्रिब्यूनल बनाए थे। इन ट्रिब्यूनल को 34 लाख आवेदन मिले थे, जिसमें नाम शामिल करने और हटाने दोनों के आवेदन शामिल थे।
ट्रिब्यूनल शुरू होने में काफी देरी हुई। समय बहुत कम था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। 

सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आदेश दिया कि हर चरण के मतदान से दो दिन पहले तक ट्रिब्यूनल जो भी नाम मंजूर करे, उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाए।

पहले चरण में क्या हुआ?

पहले चरण के पहले भी ट्रिब्यूनल ने कुछ नाम मंजूर किए थे। उस समय 139 नाम जोड़े गए और 8 नाम हटाए गए। अब दूसरे चरण से पहले 1468 नाम जोड़े गए हैं। हालांकि, कुल कितने मामलों पर ट्रिब्यूनल ने फ़ैसला लिया, इसकी पूरी जानकारी अभी साफ नहीं है। चुनाव आयोग ने मंगलवार सुबह दूसरी पूरक सूची जारी कर दी। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बुधवार शाम तक नई पूरी मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।

मतदाता कैसे चेक करें अपना नाम?

चुनाव आयोग पूरी सूची एक साथ नहीं दे रहा है। इसलिए मतदाताओं को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाना होगा। वहाँ अपने विधानसभा क्षेत्र और बूथ नंबर के अनुसार नाम जोड़े गए लोगों और नाम हटाए गए लोगों की सूची देखनी होगी। अगर दोनों सूचियों में नाम नहीं दिखता तो अपने वोटर आईडी नंबर से सर्च कर सकते हैं।
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क्यों हो रहा है विवाद?

SIR प्रक्रिया में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से काफी विवाद हुआ। कई लोग शिकायत कर रहे थे कि उनके नाम बिना वजह हटा दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुछ राहत मिली है, लेकिन ट्रिब्यूनल पर बहुत सारे मामले अभी भी लंबित हैं। समय की कमी के कारण सभी मामलों का निपटारा नहीं हो पाया। दूसरे चरण के मतदान से पहले 1468 लोगों को वोटिंग का अधिकार मिलने से उन मतदाताओं में खुशी है जिनके नाम पहले हट गए थे। चुनाव आयोग ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चल रही है और मतदाता सूची साफ-सुथरी रखने के लिए यह जरूरी था।