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अफ़ग़ानिस्तान में आर्थिक तबाही, दूसरों के दिए खाने पर जी रहे हैं तालिबान लड़ाके

अफ़ग़ानिस्तान आर्थिक तबाही के कगार पर खड़ा है। खाने-पीने की चीजों की घनघोर किल्लत है, सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। चारों ओर अफ़रातफ़री और निराशा का माहौल कायम है। सरकार कुछ कर नहीं रही है या करने की स्थिति में नहीं है। 

अमेरिकी अख़बार 'न्यूयॉर्क पोस्ट' के अनुसार, तालिबान लड़ाकों को पिछले कई महीने से वेतन नहीं मिला है। उनके खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं है, उनके रहने की कोई जगह नहीं है।

ज़्यादातर लड़ाके अपने पास के बचे हुए थोड़े पैसे से किसी तरह खाने-पीने का आधा-अधूरा इंतजाम कर रहे हैं और बस किसी तरह जीवित हैं। स्थानीय लोग उन्हें दया कर कभी कुछ खाने को दे देते हैं। 

उनके रहने का कोई इंतजाम नहीं है, लिहाज़ा वे ट्रकों में सो रहे हैं।

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फटेहाल बैंक

सरकार के पास पैसे नहीं है। उसने एक दिन में बैंक से पैसे निकालने की अधिकतम सीमा दो हज़ार डॉलर तय कर दी है। बैंक खुलते ही सैकड़ों  लोगों की लाइन लग जाती है और लोगों को घंटों उस लाइन में खड़ा रहना होता है।

चीन, पाकिस्तान और रूस को छोड़ कर किसी देश ने अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। लिहाज़ा, उसे कहीं सै पैसे नहीं मिल रहे हैं। 

afghanistan :afghan economy collapses under taliban - Satya Hindi

प्रतिबंध

अमेरिका ने पहले से तय रकम 9.5 अरब डॉलर के भुगतान पर रोक लगा दी, वह पैसा अब उसे नहीं मिलने वाला है। 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष व विश्व बैंक ने अफ़ग़ानिस्तान को पैसे देने से इनकार कर दिया है।

आतंकवादियों व नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े लोगों तक पैसे पहुँचने से रोकने के लिए बनी संस्था फ़ाइनेशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) ने अपने 39 देशों से कहा है कि वे तालिबान सरकार को पैसे न दें।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि जल्द ही अफ़ग़ानिस्तान के 97 प्रतिशत लोग ग़रीबी रेखा से नीचे चले जाएंगे। अभी वहाँ 72 प्रतिशत लोग ग़रीबी रेखा से नीचे हैं।

एक डॉलर प्रति दिन से कम आय वाले व्यक्ति को ग़रीबी रेखा से नीचे माना जाता है। 

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अफ़ग़ानिस्तान में गंभीर मानवीय संकट की चेतावनी देते हुए कहा है कि चार करोड़ अफ़ग़ानों के सामने खाने-पीने तक का संकट पैदा हो गया है। 

गुटेरेस ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए तुरन्त 40 करोड़ डॉलर के मदद की ज़रूरत है। 

संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य व कृषि संगठन के रेन पॉलसीन ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में कुपोषण चरम पर है, खाद्य सामग्री की प्रति व्यक्ति खपत कम हो गई है और मृत्यु दर बढ़ गई है।

मदद

चीन अकेला देश है, जिसने अफ़ग़ानिस्तान को 3.10 करोड़ डॉलर की मदद देने का एलान कर दिया है। इसमें खाने-पीने की चीजें, दवा वगैरह होंगी। इसके अलावा बीजिंग कोरोना टीका की 30 लाख खुराक़ें भी देगा। 

पाकिस्तान और रूस तालिबान सरकार को राजनीतिक समर्थन भले दें, पर अब तक उन्होंने वित्तीय सहायता का एलान नहीं किया है।

संयुक्त राष्ट्र के दानदाताओं ने एक अरब डॉलर की रकम अफ़ग़ानिस्तान को देने का भरोसा दिया है, पर वास्तव में कितने पैसे मिलेंगे और कब तक मिलेंगे, यह अहम है। तब तक अफ़ग़ानिस्तान आर्थिक बरबादी की ओर बढ़ता रहेगा। 

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