रियाद में हुई अहम बैठक में अरब और मुस्लिम देशों ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि वह हमले तुरंत बंद करे। अन्यथा क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। जानिए बैठक के फैसले क्या।
रियाद बैठक में शामिल अरब देशों के विदेश मंत्री। (फोटो साभार- @KSAmofaEN)
अरब और मुस्लिम देशों ने अब ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि वह हमले बंद करे नहीं तो ज़रूरत होने पर ये देश भी जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे। यह चेतावनी अरब और मुस्लिम देशों की बैठक के बाद दी गई। ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल युद्ध के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक हुई। बैठक का मुख्य मकसद ईरान के बढ़ते हमलों पर एकजुट जवाब तैयार करना था, क्योंकि ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और कतर में एनर्जी फैसिलिटी पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ये हमले इसराइल के ईरानी साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के जवाब में किए गए थे।
बैठक में कतर, अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शामिल हुए। ये सभी देश युद्ध से प्रभावित हैं। चाहे ईरान के सीधे हमलों से, मलबे से खतरे से, ऊर्जा सप्लाई में कमी से या युद्ध लंबा चलने पर बड़े पैमाने पर विस्थापन की आशंका से।
बैठक में क्या फैसला हुआ?
बैठक के बाद गुरुवार को जारी संयुक्त बयान में इन 12 देशों ने ईरान के ‘जानबूझकर किए गए हमलों’ की कड़ी निंदा की। ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से आवासीय इलाकों, पानी के डिसेलिनेशन प्लांट, तेल सुविधाओं, एयरपोर्ट और कूटनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है।देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि हर देश को खुद की रक्षा का अधिकार है। उन्होंने ईरान से मांग की-
- तुरंत हमले रोक दे।
- पड़ोसियों के खिलाफ उकसावे वाली कार्रवाई या धमकियां बंद करे।
- अरब देशों में मौजूद ईरान समर्थित प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन, फंडिंग और हथियार देना बंद करे।
- होर्मुज जलडमरूमध्य या बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा को ख़तरे में डालने वाली कोई कार्रवाई न करे।
बयान में इसराइल के लेबनान पर हमलों और क्षेत्र में उसके विस्तारवादी रुख की भी निंदा की गई। लेबनान में हिजबुल्लाह के हमलों के जवाब में इसराइल ने 968 से ज़्यादा लोगों को मार डाला और दक्षिण लेबनान में जमीनी हमला भी किया है।
सऊदी विदेश मंत्री का सख्त बयान
बैठक के बाद सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि ईरान पड़ोसियों के साथ भाईचारे की बजाय शत्रुतापूर्ण नजरिए से पेश आया है। सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि अगर जरूरी हुआ तो सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है, जिसका इस्तेमाल वे कर सकते हैं।
फैसल ने कहा, ‘ईरान को उम्मीद है कि वह जल्दी संदेश समझ ले और पड़ोसियों पर हमला बंद कर दे। लेकिन मुझे इसकी समझदारी पर शक है।’ उन्होंने ईरान के साथ रिश्ते बहाल करने में समय लगने की बात कही क्योंकि विश्वास पूरी तरह टूट चुका है। तीन साल पहले बीजिंग की मध्यस्थता से सऊदी-ईरान रिश्ते सुधरे थे, लेकिन अब वह प्रक्रिया खत्म होने की कगार पर है।
ईरान में नेतृत्व बड़ा बदलाव आया है। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई नए सुप्रीम लीडर बने हैं, लेकिन वे अभी सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे। ईरान के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका-इसराइल हमलों में 1400 लोग मारे गए और 18 हज़ार से ज़्यादा घायल हुए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने कहा कि ट्रू प्रॉमिस 4 ऑपरेशन में अमेरिका से जुड़ी क्षेत्रीय तेल सुविधाओं पर मजबूती से हमला किया गया। आईआरजीसी ने कहा कि वह पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता, लेकिन अब युद्ध की नई फेज में प्रवेश कर चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब पहले जैसा नहीं रहा। नया नेतृत्व और नई सोच के साथ वह युद्ध के बीच में है। बैठक से साफ संकेत मिला है कि अरब और मुस्लिम देश अब ईरान के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं, लेकिन आगे क्या होगा, यह ईरान के अगले कदम पर निर्भर करेगा। क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में हैं।