ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के 9 जुलाई को होने वाले अंतिम संस्कार पर तमाम आशंकाएं मंडरा रही हैं। जहां एक तरफ ईरान की सेना सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की करीबी और दक्षिणपंथी कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने विवादित बयान दिया है।

ईरान सेना ने बढ़ाई जमीनी और हवाई सुरक्षा

ईरान के सरकारी मीडिया और सैन्य सूत्रों के अनुसार, खामेनेई के अंतिम संस्कार में देश-विदेश से करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसराइल से किसी भी तरह की हरकत हो सकती है। इसे देखते हुए ईरान की सेना ने अपनी सीमाओं पर जमीनी और हवाई सुरक्षा को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। 

लॉरा लूमर का विवादित बयान: इसराइल को दी बमबारी की सलाह

अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप की वफादार मानी जाने वाली Far-right कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया पर एक बेहद विवादित बयान देकर तनाव को और बढ़ा दिया है। लॉरा लूमर ने सुझाव दिया कि इसराइल के पास 9 जुलाई को अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार के दिन ईरान पर बमबारी करने और अपना बदला लेने का एक बड़ा मौका है।

  • सोशल मीडिया पोस्ट: खामेनेई के पार्थिव शरीर को कोल्ड स्टोरेज में रखे जाने और अंतिम संस्कार की तैयारियों से जुड़ी एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लूमर ने लिखा, "खामेनेई का अंतिम संस्कार? इसे हम 'टारगेट रिच एनवायरनमेंट' (ऐसा क्षेत्र जहां कई जगह हमले हो सकते हैं) कहते हैं।"

  • IDF को किया टैग: उन्होंने इसराइली रक्षा बलों (IDF) को टैग करते हुए एक अन्य पोस्ट में लिखा, "IDF के पास सबसे मजेदार काम करने का मौका है।"

  • आलोचनाओं पर दिया जवाब: जब सोशल मीडिया पर उनके इस हिंसक सुझाव की आलोचना हुई, तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, "मैं अमेरिका या आईडीएफ द्वारा जिहादियों पर बमबारी देखने के किसी भी मौके को कभी ना नहीं कहूंगी।" लूमर लंबे समय से इस्लाम और ईरान के साथ किसी भी तरह के शांति समझौते या बातचीत की प्रखर आलोचक रही हैं।
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ईरान में एयर डिफेंस सिस्टम तैनात, वायुसेना भी तैयार 

  • हाई अलर्ट पर सेना: ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने बताया कि देश के हवाई क्षेत्र की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए वायु रक्षा (एयर डिफेंस) इकाइयों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही वायुसेना और नौसेना को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।
  •  'तीर्थयात्री शहर' (Pilgrim Cities) का निर्माण: तेहरान और उसके आसपास आने वाले लाखों शोकग्रस्त लोगों के ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सेना ने चार अस्थायी शहरों का निर्माण किया है। 
  • इलाज और रसद सहायता: भारी भीड़ को संभालने के लिए सैन्य अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और मुख्य मार्गों पर सेना के हेलीकॉप्टर और आपातकालीन टीमें तैनात की गई हैं। 
  • नए नेता के प्रति वफादारी की शपथ: इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मुजतबा खामेनेई के प्रति वफादारी की सामूहिक शपथ भी शामिल है। यानी दुनियाभर के शिया मुस्लिम मुजतबा खामेनेई की तक़लीद (अनुयायी) में आने की घोषणा करेंगे। इसमें भारत, पाकिस्तान के अलावा अन्य एशियाई देशों के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

क्यों हो रही है अंतिम संस्कार में इतनी देरी?

अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत इसी साल 28 फरवरी को तेहरान में उनके कार्यालय पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों में हुई थी। इस हमले में उनकी बेटी, दामाद और एक पोते की भी जान चली गई थी। उनकी मृत्यु के बाद अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकराव शुरू हो गया था। भू-राजनीतिक तनाव और मुहर्रम के शुरुआती 10 दिनों (इमाम हुसैन के शोक दिवसों) के कारण उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रियाओं को 100 से अधिक दिनों के लिए टाल दिया गया था।
ईरानी मीडिया के अनुसार, खामेनेई का अंतिम संस्कार 6 जुलाई को तेहरान, 7 जुलाई को कौम (Qom) और अंततः 9 जुलाई को मशहद में इमाम रज़ा के पवित्र धार्मिक स्थल पर किया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस ऐतिहासिक अंतिम विदाई में लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं, जो सुरक्षा और प्रबंधन के लिहाज से ईरान के लिए एक बहुत बड़ी परीक्षा होगी।

हमलों की बढ़ती आशंका के बीच ईरानी विदेश मंत्री का बयान

इसराइल के युद्ध मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा है कि अयातुल्ला सैयद मुजतबा खामेनेई को "मौत" या हत्या करने के लिए चिन्हित किया गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने काट्ज़ को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने काट्ज़ की इस टिप्पणी को तेल अवीव की ओर से इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ अमेरिका-ईरान समझौता) को कमज़ोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश बताया। 17 जून के समझौते ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका-इसराइल के संयुक्त युद्ध को समाप्त कर दिया और सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई या धमकियों से बचने की मांग की। अरागची ने कहा कि समझौते के तहत, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसराइल पर लगाम लगाने का वादा किया था। उन्होंने X पर लिखा, "अगर वे अपने आका की बात नहीं मानते हैं, तो ईरान उन्हें सबक सिखाएगा।"


यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपने तीखे बयानों को और तेज़ कर दिया है। हाल के दिनों में, नेतन्याहू ने धमकी दी है कि अगर तेहरान अपनी रक्षात्मक गतिविधियां फिर से शुरू करता है तो वे ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करेंगे, और संकेत दिया है कि युद्धविराम बनाए रखने के अमेरिकी दबाव के बावजूद इसराइल एकतरफा कार्रवाई कर सकता है। उनकी कैबिनेट ने लेबनान से आगे सैन्य अभियानों का विस्तार करने की संभावना पर भी विचार किया है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।