लेबनान में हमलों में 250 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने और 1100 से ज़्यादा के घायल होने के बाद अब इसराइल ने शांति वार्ता की बात कही है। इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वे लेबनान के साथ सीधी शांति वार्ता शुरू करने के लिए तैयार हैं। नेतन्याहू ने एक बयान में कहा, 'लेबनान की बार-बार की गई मांग को देखते हुए, मैंने कल कैबिनेट को निर्देश दिया है कि लेबनान के साथ जितनी जल्दी हो सके सीधी वार्ता शुरू की जाए।'

हिजबुल्लाह पर नेतन्याहू ने क्या बोला?

नेतन्याहू ने साफ़ कहा कि इन बातचीत का मुख्य मुद्दा हिजबुल्लाह को निहत्था करना और इसराइल-लेबनान के बीच शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना होगा। नेतन्याहू का यह बयान तब आया है जब इसराइल ने एक दिन पहले ही बेरूत, बेका घाटी और दक्षिणी लेबनान पर भारी हमले किए, जिनमें 250 से ज्यादा लोग मारे गए। दोनों देश तकनीकी रूप से अभी भी युद्ध की स्थिति में हैं। ऐसे में सीधी वार्ता शुरू होना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि लेबनान की राजनीति और सुरक्षा में हिजबुल्लाह का बहुत बड़ा प्रभाव है।

पहले सीजफायर, फिर वार्ता: लेबनान 

नेतन्याहू के ऐलान से ठीक पहले लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि किसी भी बातचीत से पहले हिंसा पूरी तरह बंद होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, 'लेबनान की मौजूदा स्थिति का एकमात्र समाधान इसराइल और लेबनान के बीच सीजफायर है, उसके बाद सीधी वार्ता हो सकती है।' राष्ट्रपति औन ने बताया कि कूटनीतिक स्तर पर प्रयास चल रहे हैं और इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि लेबनान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दबाव बनाने की अपील कर रहा है ताकि उसे भी अमेरिका-ईरान सीजफायर में शामिल किया जाए।

लेबनान पर इसराइली हमले

शांति वार्ता का यह कूटनीतिक क़दम ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ दिनों में दोनों तरफ़ बहुत तेज़ लड़ाई हुई। 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने इसराइल पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में इसराइल ने लेबनान पर फिर से बड़ा हमला किया।

लेबनान में 1700 मौतें, 10 लाख बेघर

लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, इसराइल के हमलों में अब तक क़रीब 1700 लोग मारे गए हैं और 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। इसराइल का कहना है कि उसने हिजबुल्लाह के सैकड़ों लड़ाकों को मार गिराया है। लेबनान के मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि हिजबुल्लाह ने इन दिनों में इसराइल की तरफ सैकड़ों रॉकेट और ड्रोन दागे हैं।

8 अप्रैल को इसराइल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भारी हमला किया। इसमें 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए। बेरूत में भी कई जगहों पर जोरदार हमले हुए। लेबनान ने इसे क्रूर हमला बताया।

इसराइल के रक्षा मंत्री ने दावा किया कि हिजबुल्लाह अब सीजफायर चाहता है और लेबनान को ईरान से अलग करना चाहता है। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

दोनों तरफ की स्थिति

इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि वार्ता का मकसद हिजबुल्लाह को पूरी तरह निहत्था करना और दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित करना है। इसराइल का कहना है कि वह अपनी उत्तरी सीमा को सुरक्षित करना चाहता है। इधर, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने साफ कहा कि पहले सीजफायर हो, फिर बातचीत। उन्होंने जोर दिया कि लेबनान एक संप्रभु देश है और कोई भी उसकी तरफ़ से बातचीत नहीं कर सकता।
अभी तक लेबनान सरकार की ओर से नेतन्याहू के प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस नई कूटनीतिक पहल पर नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिका, फ्रांस और अन्य देश इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से संपर्क कर रहे हैं।

मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद!

यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद जगाता है, लेकिन दोनों तरफ गहरी अविश्वास की भावना बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सीजफायर होता है और हिजबुल्लाह के निहत्थे होने पर सहमति बनी तो दोनों देशों के बीच लंबे समय बाद शांति की राह खुल सकती है।

अभी स्थिति बेहद संवेदनशील है। किसी भी छोटी घटना से फिर से हिंसा भड़क सकती है। पूरी दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या दोनों देश वाकई वार्ता की मेज पर बैठ पाते हैं या नहीं।