चीन ने ताइवान को लेकर अमेरिका पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। उसने ताइवान को यूएस हथियार देने के बदले में पेंटागन के उप सचिव एलब्रिज कोल्बी की बीजिंग यात्रा को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप अभी चीन होकर आए हैं।
चीन ने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के एक उच्च अधिकारी की बीजिंग यात्रा को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। यह कदम ताइवान को 14 अरब डॉलर के प्रस्तावित हथियार पैकेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के पॉलिसी अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी (Elbridge Colby) की ग्रीष्मकालीन बीजिंग यात्रा पर चर्चा हो चुकी थी, लेकिन चीन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक ट्रंप प्रशासन इस हथियार सौदे पर अपना फैसला नहीं ले लेता, तब तक यात्रा को मंजूरी नहीं दी जा सकती।
यह 14 अरब डॉलर का पैकेज पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और NASAMS (National Advanced Surface-to-Air Missile System) जैसी एडवांस सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों सहित है।
अमेरिका ने दिसंबर में पहले ही 11 अरब डॉलर का एक रिकॉर्ड हथियार पैकेज ताइवान को मंजूर किया था, जिसका चीन ने कड़ा विरोध किया। जनवरी में कांग्रेस ने 14 अरब डॉलर के अतिरिक्त सौदे को भी मंजूरी दी, लेकिन ट्रंप के औपचारिक अनुमोदन और कांग्रेस को भेजने के बाद ही यह आगे बढ़ सकता है।
बीजिंग ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और अमेरिकी हथियार बिक्री को “एक चीन” नीति का उल्लंघन मानता है। चीन इस मुद्दे को ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर वार्ता के बाद भी अमेरिका पर दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
यह घटना अमेरिका-चीन संबंधों के बीच एक नाजुक समय पर आई है। हाल ही में ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान ताइवान मुद्दा प्रमुख चर्चा का विषय रहा था। ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने इस पैकेज पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है और इसे चीन के साथ सौदेबाजी के लिए दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
ताइवान सरकार इस सौदे का इंतजार कर रही है और “पावर के ज़रिए शांति” की नीति पर जोर दे रही है। चीन ने पहले भी ऐसे सौदों की निंदा की है और चेतावनी दी है कि इससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित होंगे।
यह कदम चीन की पारंपरिक रणनीति है। वो ताइवान को हथियार बिक्री को लेकर अमेरिकी अधिकारियों की यात्राओं या उच्च-स्तरीय वार्ताओं को प्रभावित करने के लिए ऐसा करता रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा के अन्य मुद्दों पर भी तनाव बरकरार है। अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग या ट्रंप प्रशासन की तरफ से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।