अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिन देशों को धमकी दी उनके प्रमुख अब ट्रंप को ललकार रहे हैं। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने खुली चुनौती दी- 'आओ मुझे ले जाओ।' डेनमार्क ने भी ट्रंप को ग्रीनलैंड पर हमले पर नाटो टूटने की चेतावनी दी है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति पेट्रो और डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोलंबिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी के बाद अब कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने ट्रंप को ललकारा है। पेट्रो ने ट्रंप को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'आओ मुझे ले जाओ, मैं आपका इंतज़ार कर रहा हूं।' यह बयान अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद आया है। इधर डेनमार्क ने ट्रंप को चेताया है कि उन्होंने यदि ग्रीनलैंड पर हमला किया तो नाटो का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा।
बहरहाल, ट्रंप ने कोलंबिया को बहुत बीमार देश बताते हुए कहा कि वहां के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो कोकीन बनाने और अमेरिका को बेचने का काम करते हैं। ट्रंप ने कहा, 'कोलंबिया एक बीमार आदमी द्वारा चलाया जा रहा है जो कोकीन बनाना और अमेरिका को बेचना पसंद करता है। पेट्रो के पास कोकीन मिलें और फैक्ट्रियाँ हैं, लेकिन वह ज़्यादा दिन ऐसा नहीं कर पाएगा।'
पेट्रो ने एक्स पर ट्रंप के बयान का जवाब देते हुए कहा कि वह पहले जांच करेंगे कि ट्रंप के अंग्रेजी शब्दों का अनुवाद सही है या नहीं। उन्होंने लिखा, 'आज मैं देखूंगा कि ट्रंप के अंग्रेजी शब्दों का अनुवाद वैसा ही है जैसा राष्ट्रीय प्रेस कह रहा है। इसलिए, बाद में जवाब दूंगा जब तक मुझे ट्रंप की गैर-कानूनी धमकी का असली मतलब पता न चले।'
पेट्रो ने अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो पर भी निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'जहाँ तक श्री रुबियो की बात है तो वह राष्ट्रपति के अधिकारों को अलग देखते हैं और कहते हैं कि राष्ट्रपति सहयोग नहीं करना चाहते जबकि अधिकारी करते हैं; मैं अनुरोध करता हूं कि वह कोलंबिया का संविधान पढ़ें क्योंकि उनकी जानकारी पूरी तरह गलत है। यह माफिया से जुड़े कोलंबियाई राजनेताओं के हितों का नतीजा है, जो अमेरिका और कोलंबिया के बीच संबंध तोड़ना चाहते हैं ताकि दुनिया में कोकीन की तस्करी बढ़े।'
कोलंबिया दुनिया का सबसे बड़ा कोकीन उत्पादक देश है, लेकिन ट्रंप के आरोपों का कोई सबूत नहीं है कि पेट्रो खुद नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल हैं। अमेरिका और कोलंबिया लंबे समय से ड्रग तस्करी के खिलाफ साथ मिलकर काम करते रहे हैं, लेकिन ट्रंप के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गए हैं।
2022 में चुने गए पेट्रो पहले बोगोटा के मेयर रह चुके हैं। पेट्रो ने कहा कि उन्होंने कभी हथियार न उठाने का संकल्प लिया था, लेकिन मातृभूमि के लिए फिर से हथियार उठा लेंगे। उन्होंने कहा, 'मैंने संकल्प लिया था कि फिर कभी हथियार नहीं छुऊंगा... लेकिन मातृभूमि के लिए मैं फिर से हथियार उठाऊंगा... आओ मुझे ले जाओ। मैं यहां आपका इंतजार कर रहा हूं। मुझे धमकी मत दो, अगर चाहो तो मैं यहीं इंतजार करूंगा।'
अमेरिका ने पिछले साल सितंबर में पेट्रो का वीजा रद्द कर दिया था, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी सैनिकों से गैर-कानूनी आदेशों का पालन न करने की अपील की थी। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में ट्रंप प्रशासन ने पेट्रो, उनकी पत्नी और कई करीबी सहयोगियों पर वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए।
ग्रीनलैंड पर हमला हुआ तो नाटो का अंत: डेनमार्क
ट्रंप की ग्रीनलैंड को अपने कंट्रोल में लेने की बात पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका डेनमार्क पर सैन्य हमला करेगा या कब्जा करने की कोशिश करेगा, तो नाटो गठबंधन खत्म हो जाएगा। ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है।
फ्रेडरिक्सेन ने डेनिश टीवी चैनल TV2 से कहा, 'अगर अमेरिका किसी दूसरे नाटो देश पर सैन्य हमला चुनता है तो सब कुछ रुक जाएगा। मतलब नाटो भी और दूसरे विश्व युद्ध के बाद से मिली सुरक्षा भी खत्म!'
यह बयान ट्रंप के ताजा बयानों के जवाब में आया है, जहां उन्होंने कहा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बहुत जरूरी है। ट्रंप ने सेना का इस्तेमाल करने से भी इनकार नहीं किया।
ग्रीनलैंड पीएम बोले- वेनेजुएला से तुलना मत करो
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडरिक नील्सन ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि ग्रीनलैंड को वेनेजुएला के बराबर मत रखो। उन्होंने बताया, 'हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि रातोंरात कोई कब्जा हो जाए। इसलिए हम अच्छे सहयोग की उम्मीद करते हैं। अमेरिका ग्रीनलैंड को ऐसे आसानी से जीत नहीं सकता।' नील्सन ने ट्रंप से कहा कि कब्जे की कल्पनाएं छोड़ दो और सम्मान के साथ बात करो।
बहरहाल, यह विवाद ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई की और मादुरो को पकड़ लिया। अब कोलंबिया और ग्रीनलैंड जैसे देशों को भी ऐसी ही धमकी दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर नज़र रखे हुए है, क्योंकि इससे दक्षिण अमेरिका में अस्थिरता बढ़ सकती है। पेट्रो के समर्थक उनके बयान की सराहना कर रहे हैं, जबकि विरोधी इसे जोखिम भरा बता रहे हैं।