सीजफायर की घोषणा के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में यूरेनियम संवर्धन नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत को लेकर बातचीत की बात कही। ट्रंप अब अमेरिका में क्या करना चाहते हैं?
ईरान युद्ध में सीजफायर पर सफाई देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने साफ़ कहा कि ईरान में यूरेनियम का कोई संवर्धन नहीं होगा। साथ ही, दोनों देश टैरिफ कम करने और सैंक्शन यानी प्रतिबंधों में राहत देने पर बातचीत करेंगे।
ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर लिखा कि दो हफ्ते के सीजफायर के बाद ईरान में एक 'बहुत फायदेमंद रेजीम चेंज' होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब ईरान के साथ मिलकर उसके गहरे दबे हुए परमाणु के मलबे को खोदकर निकालेगा। ट्रंप ने लिखा, 'ईरान में यूरेनियम का संवर्धन बिल्कुल नहीं होगा। अमेरिका ईरान के साथ मिलकर सभी गहरे दबे परमाणु कचरे को निकालेगा। यह सब सैटेलाइट से बहुत सख्त निगरानी में है। हमले के बाद से कुछ भी नहीं छेड़ा गया है।'
टैरिफ़ और प्रतिबंधों पर बातचीत
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ईरान के साथ टैरिफ़ और प्रतिबंधों में राहत देने पर पहले से ही चर्चा कर रहा है। उन्होंने लिखा, 'हम ईरान के साथ टैरिफ़ और सैंक्शंस रिलीफ की बात कर रहे हैं और करेंगे। समझौते के कई 15 पॉइंट्स पर पहले ही सहमति बन चुकी है।' ईरान को हथियार देने वाले पर 50% टैरिफ़ लगेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी भी दी कि जो भी देश ईरान को हथियार देगा, उसके अमेरिका में आने वाले सभी सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। ट्रंप ने कहा, 'ईरान को हथियार सप्लाई करने वाले किसी भी देश पर तुरंत 50% टैरिफ लगेगा। कोई छूट नहीं मिलेगी।'
सीजफायर अभी भी कमजोर!
यह सीजफायर अमेरिका और ईरान के बीच आखिरी घड़ी में हुआ समझौता है। इससे पहले अमेरिका बड़े हमलों की धमकी दे रहा था। लेकिन अब भी यह 'कमजोर युद्धविराम' माना जा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे नाजुक युद्धविराम बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान के कुछ लोग समझौते के बारे में ग़लत बातें फैला रहे हैं, इसलिए यह अभी भी कमजोर है। सीजफायर घोषणा के कुछ घंटों बाद खाड़ी देशों में मिसाइल अलर्ट बजे और ईरान में एक तेल रिफाइनरी पर हमला होने की ख़बर आई।
होर्मुज स्ट्रेट पर विवाद
दुनिया के तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईरान ने कहा है कि वह इस स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से चार्ज ले सकता है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ट्रांजिट ईरान की सेना के नियंत्रण में होगा। ट्रंप ने कहा है कि इससे बड़ी रक़म कमाई जा सकती है। लेकिन खाड़ी के दूसरे देशों को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं है क्योंकि वे इस रास्ते पर बहुत निर्भर हैं।
परमाणु कार्यक्रम अभी भी विवाद का केंद्र
ट्रंप ने दावा किया कि कोई यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा, लेकिन ईरान पहले 60% शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धित कर चुका है, जो हथियार बनाने के करीब है। समझौते के फारसी और अंग्रेजी संस्करणों में अंतर होने से भ्रम बढ़ गया है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान संवर्धन जारी रखने की बात कर रहा है, जिसे ट्रंप ने 'धोखाधड़ी' बताया।अमेरिका और इसराइल अभी भी ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह ख़त्म करने पर जोर दे रहे हैं।
ईरान की मांगें और विरोध
ईरान का कहना है कि समझौते में अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों में पूरी राहत और फ्रीज किए गए पैसे वापस मिलने चाहिए। तेहरान में सीजफायर की घोषणा के बाद सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ नारे लगाए। इससे लगता है कि ईरान के अंदर समझौते का विरोध भी है।
पाकिस्तान ने इस सीजफायर में मध्यस्थता की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने कहा है कि स्थायी समझौते की बातचीत जल्द शुरू हो सकती है, शायद इस्लामाबाद में। सीजफायर अभी चल रहा है, लेकिन दोनों तरफ़ से अलग-अलग बयान आ रहे हैं। ईरान का कहना है कि लेबनान में इसराइल के ख़िलाफ़ लड़ रहे हिजबुल्लाह पर भी यह समझौता लागू हो सकता है, लेकिन इसराइल ने कहा है कि वह वहां अपने अभियान जारी रखेगा।
यह पूरा मामला बहुत संवेदनशील है। अगले कुछ दिनों में बातचीत आगे बढ़ेगी तो साफ़ होगा कि ट्रंप का दावा कितना हक़ीकत में बदलता है। दुनिया की नज़रें अब ईरान-अमेरिका के अगले क़दमों पर टिकी हुई हैं।