पेरिस के प्रतिष्ठित एफिल टावर के ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी Société d’Exploitation de la Tour Eiffel (SETE) के महानिदेशक पैट्रिक ब्रांको रूइवो साल 2026 के अंत तक अपने पद से हट जाएंगे। यह फैसला सितंबर की शुरुआत में एक हिंदू धार्मिक संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के दल की एफिल टावर यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को वहां से हटाने के विवाद के बाद लिया गया है।
SETE ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि एक स्वतंत्र जांच में आधिकारिक दौरों और खासकर 5 सितंबर को BAPS प्रतिनिधिमंडल की यात्रा की व्यवस्था में कई तरह की परिचालन संबंधी खामियां और कमियां सामने आईं। कंपनी के मुताबिक इन्हीं कमियों के कारण उस दिन महिला कर्मचारियों को हिन्दू पुजारियों की वजह से अलग रखा गया। SETE ने इस स्थिति को “अस्वीकार्य” बताया। रूइवो नवंबर 2018 से कंपनी के महानिदेशक पद पर थे।

क्या हुआ था एफिल टावर में?

5 सितंबर को करीब 100 लोगों वाला BAPS प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर के निजी दौरे पर पहुंचा था। यह यात्रा पेरिस के नजदीक BAPS के एक पारंपरिक हिंदू मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा थी। उस दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ कार्यस्थलों से हटने, अलग इलाकों में जाने और प्रतिनिधिमंडल के गुजरने वाले कुछ हिस्सों में प्रवेश या आवाजाही नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। कुछ स्थानों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने की बात भी सामने आई।
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कर्मचारी यूनियन की प्रतिनिधि डायने दावोआन ने कहा था कि महिलाओं को अपनी कार्यस्थल की जगह छोड़ने को कहा गया ताकि वहां पुरुष कर्मचारी तैनात किए जा सकें। कर्मचारियों के अनुसार, इस घटना से महिला कर्मचारियों को अपमानित महसूस हुआ और उन्हें लगा कि उनके साथ उनके लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया।
SETE ने उस समय स्वीकार किया था कि BAPS प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट कहा था कि ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। SETE के अध्यक्ष एरियल वील ने एफिल टावर की पुरुषों और महिलाओं की समानता तथा फ्रांस के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई थी।

कर्मचारियों की हड़ताल, एक दिन बंद रहा एफिल टावर

इस घटना के विरोध में 7 सितंबर को एफिल टावर के कर्मचारियों ने वॉकआउट किया, जिसके कारण दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल यह स्मारक पूरे दिन बंद रहा। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि महिलाओं को उनके लिंग के कारण किनारे किया गया, उनकी जगह पुरुषों को लगाया गया और उन्हें कुछ हिस्सों में दिखाई न देने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों के विरोध के बाद प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बैठक हुई और अगले दिन एफिल टावर फिर से खोल दिया गया। घटना की जांच पेरिस प्रशासन ने भी शुरू कराई थी।

BAPS ने क्या कहा?

विवाद सामने आने के बाद BAPS ने कहा था कि करीब 100 लोगों के बड़े प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को सुचारु रखने और कर्मचारियों तथा आम लोगों को असुविधा से बचाने के लिए एफिल टावर प्रबंधन के साथ पहले से तालमेल किया गया था। BAPS ने इस बात से इनकार किया कि उसकी ओर से महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करने का उद्देश्य था। संगठन ने कहा कि उसकी ओर से की गई व्यवस्था संबंधी बातचीत “लिंग आधारित अनुरोध” के रूप में नहीं थी। संगठन ने किसी को हुई परेशानी या ठेस के लिए माफी भी मांगी और कहा कि वह लैंगिक समानता, आपसी सम्मान और सभी लोगों की सेवा के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है।
रिपोर्टों के अनुसार BAPS प्रतिनिधिमंडल की यात्रा उस समय हुई जब संगठन पेरिस के पूर्वी हिस्से बुसी-सेंट-जॉर्जेस में अपने पहले पारंपरिक मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रम कर रहा था। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल में ऐसे साधु शामिल थे जिनकी धार्मिक प्रतिज्ञाओं के तहत महिलाओं के संपर्क से बचना शामिल है।

पेरिस प्रशासन ने भी जताया था ऐतराजः पेरिस के मेयर कार्यालय ने मामले की जांच कराई और महिलाओं तथा पुरुषों की समानता के फ्रांसीसी गणतांत्रिक सिद्धांत के अनुरूप स्थिति नहीं संभाल पाने पर माफी भी मांगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि महिला कर्मचारियों को अलग रखने जैसी स्थिति आखिर कैसे पैदा हुई। SETE के अध्यक्ष एरियल वील ने अब लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नए उपायों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने की बात कही है। कंपनी की जांच के निष्कर्षों के बाद रूइवो के पद छोड़ने का फैसला इसी घटनाक्रम की अगली बड़ी कार्रवाई है।

भारत सरकार ने क्या कहा था?

इस विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी 8 सितंबर को प्रतिक्रिया दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत सरकार पेरिस क्षेत्र में BAPS मंदिर के उद्घाटन से अवगत है, लेकिन एफिल टावर से जुड़ा विशेष विवाद “संबंधित संस्थाओं के बीच का मामला” है।

एफिल टावर के लिए बड़ा प्रशासनिक विवाद

एफिल टावर हर साल लगभग 70 लाख पर्यटकों को आकर्षित करता है और इसकी ऊंचाई करीब 330 मीटर है। इसके संचालन वाली SETE में लगभग 400 कर्मचारी हैं। इससे पहले भी कर्मचारियों के आंदोलन के कारण एफिल टावर को बंद करना पड़ा है। फरवरी 2024 में वेतन और स्मारक के रखरखाव से जुड़े मुद्दों को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान यह छह दिनों तक बंद रहा था।
सितंबर 2026 का विवाद हालांकि अलग तरह का था, क्योंकि इसमें कार्यस्थल पर लैंगिक समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और फ्रांस के सार्वजनिक संस्थानों के धर्मनिरपेक्ष एवं समानता आधारित मूल्यों के बीच संतुलन का सवाल सामने आया। SETE की जांच ने यह निष्कर्ष निकाला कि यात्रा के प्रबंधन में ऐसी खामियां थीं जिनके चलते महिला कर्मचारियों को अलग किया गया और कंपनी ने इसे अस्वीकार्य माना।