ईरान समर्थित यमन के हूथियों के इसराइल पर हमले के बाद दुनिया की नज़रें बाब अल मंदेब पर लगी हुई हैं। होर्मुज की तरह हूती इस समुद्री रास्ते को बंद करते हैं तो दुनियाभर में तेल संकट खौफनाक ढंग से बढ़ जाएगा। पूरा विश्लेषण पढ़िएः
यमन के हूती लड़ाकों ने ईरान युद्ध में दूसरा मोर्चा खोल दिया है। बाब अल मंडेब बंद हो सकता है।
ईरान-इसराइल युद्ध के विस्तार के बीच शनिवार को नया और बेहद गंभीर मोड़ सामने आया। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने शनिवार को इसराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान पर अमेरिका-इसराइल द्वारा थोपे गए युद्ध के बाद हूतियों का यह पहला सीधा सैन्य हस्तक्षेप है। हूती समूह ने दावा किया कि उन्होंने “इसराइल के संवेदनशील सैन्य ठिकानों” को निशाना बनाया, जबकि इसराइल ने कहा कि उसने यमन से दागी गई मिसाइल को इंटरसेप्ट कर लिया। यह छोटी सी घटना दुनिया के लिए बड़ी खबर बन गई।
युद्ध का विस्तार वैश्विक संकट की ओर
पिछले चार हफ्तों में ईरान ने इस युद्ध को केवल इसराइल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अमेरिका के खाड़ी अरब सहयोगियों तक फैला दिया है। सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया। होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया और तेल की आपूर्ति पर अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया। लेकिन लाल सागर के बाब अल मंडेब वाले रास्ते को अगर हूतियों ने बंद किया तो तेल का संकट विश्वव्यापी हो जाएगा।अब तक ईरान के सहयोगी हूती सीधे युद्ध में उतरने से बचते रहे थे। उनका यह नया कदम संकेत देता है कि ईरान अब “प्रॉक्सी वॉर” को पूरी तरह सक्रिय कर रहा है। जिसमें अलग-अलग मोर्चों से एक साथ दबाव बनाया जाता है।
बाब-एल-मंदेब: अगला ग्लोबल फ्लैशपॉइंट
हूती विद्रोहियों की सक्रिय भागीदारी ने अब दुनिया का ध्यान बाब-एल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) की ओर मोड़ दिया है। यह संकीर्ण समुद्री रास्ता लाल सागर (Red Sea) के मुहाने पर स्थित है और एशिया-यूरोप व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यह क्यों अहम है? दुनिया के बड़े हिस्से का कंटेनर व्यापार यहीं से गुजरता है। यूरोप-एशिया के बीच ऊर्जा और माल ढुलाई की प्रमुख लाइफलाइन है। स्वेज नहर तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है।हूती पहले ही 2023 के अंत में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले कर चुके हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग में भारी बाधा आई थी। अब, अगर वे इस जलडमरूमध्य को फिर से बाधित करते हैं, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। क्योंकि हॉर्मुज़ पहले से बंद है और अब बाब-अल-मंदेब भी खतरे में है। इसका मतलब होगा कि दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल और व्यापार मार्ग एक साथ संकट में आ सकते हैं।
बाब-एल-मंदेब बंद होने पर कितना तेल प्रभावित होगा?
लगभग 4.2 मिलियन बैरल/दिन (bpd) तेल यहां से गुजरता है। कुछ आकलन के अनुसार यह 6–9% वैश्विक समुद्री तेल व्यापार है।
कुछ इसे 8–8.8 मिलियन bpd तक भी मानते हैं । सरल भाषा में कहें तो अगर बाब-अल-मंदेब पूरी तरह बंद होता है तो लगभग 4–8 मिलियन बैरल/दिन तेल प्रभावित होगा। यानी यह छोटा नहीं है, दुनिया के 2nd/3rd सबसे अहम ऑयल रूट्स में से एक है।कितने जहाज प्रभावित होंगे?
सामान्य समय में: 70–75 जहाज रोजाना गुजरते हैं। जब से ईरान युद्ध शुरू हुए तब से 36–37 जहाज प्रतिदिन गुज़र रहे हैं। सालाना इस रास्ते से करीब 20,000+ जहाज गुजरते हैं। अगर रास्ता बंद हुआ तो रोज़ाना के 50–70 जहाज सीधे प्रभावित होंगे। जिसमें शामिल हैं-
ऑयल टैंकर, LNG शिप और कंटेनर जहाज। इसका असर ये होगा कि जहाजों को अफ्रीका (Cape of Good Hope) से घूम कर जाना पड़ेगा। इसमें 10–15 दिन का समय बढ़ जाएगा और लागत भी 30–40% तक बढ़ सकती है। पिछले युद्ध यानी जून 2025 में क्या बाब-अल-मंदेब बंद हुआ था?
पिछले साल जून में इसराइल ने ईरान पर हमला था। उस समय 12 दिनों की लड़ाई चली थी। इसराइल का बहुत नुकसान हुआ था। अमेरिका ने बीच बचाव करके उस युद्ध को रुकवाया था। उस समय भी हूती सामने आए थे। लेकिन उन्होंने बाब अल मंदेब को पूरी तरह बंद नहीं किया था लेकिन उस दौरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था और व्यापार प्रभावित हुआ था। 2023–2025 के बीच हूतियों ने करीब 100+ जहाजों पर हमले किए थे। इससे तेल प्रवाह 8.6 मिलियन bpd (2023) से गिरकर
4.0 मिलियन bpd (2024) (≈50% गिरावट) हो गया था। इससे शिपिंग लागत बढ़ी थी, तेल के दाम बढ़े थे। डिलिवरी का समय भी बढ़ा था। सबसे ज्यादा यूरोप और एशिया प्रभावित हुए थे। ग्लोबल सप्लाई चेन पर खासा असर पड़ा था।
हूती विद्रोहियों का युद्ध में प्रवेश एक “गेम-चेंजर” साबित हो सकता है। यह न केवल सैन्य समीकरण बदल सकता है, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी दोहरे खतरे की स्थिति पैदा कर सकता है। अब असली सवाल यह है कि क्या दुनिया एक साथ दो समुद्री chokepoints (हॉर्मुज़ और बाब-अल-मंदेब) के बंद होने का सामना कर पाएगी? यह केवल मध्य-पूर्व का संकट नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक आपातकाल है।