पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को शुक्रवार को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में मेडिकल जांच के बाद दोबारा रावलपिंडी की अदियाला जेल भेज दिया गया। 73 वर्षीय इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल लाया गया था। उनकी पार्टी के एक सदस्य ने भी रॉयटर्स से उनके जेल लौटने की पुष्टि की।
इमरान खान तीन साल से अधिक समय से जेल में हैं और इस दौरान उनकी सेहत को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। उनके परिवार और निजी डॉक्टर लंबे समय से बेहतर चिकित्सा सुविधा और इलाज तक पहुंच की मांग कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने इसी पृष्ठभूमि में उन्हें शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाकर मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया था। अदालत ने विशेषज्ञ डॉक्टरों और इमरान खान के निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल करते हुए मेडिकल बोर्ड से जांच कराने को कहा था।

इमरान की हालत कितनी खराब थी?

पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट में बेचैनी और तनाव, दिल की धड़कन तेज होना और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा था कि रिपोर्ट में नींद की समस्या का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, लेकिन इमरान को दी जा रही दवाओं से ऐसा संकेत मिलता है कि यह समस्या भी हो सकती है।
इमरान खान के वकीलों और समर्थकों ने जेल में उनकी सेहत बिगड़ने और खास तौर पर उनकी दाहिनी आंख की रोशनी को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, सरकारी पक्ष की ओर से सामने आए चिकित्सा आकलनों में तत्काल ऐसी किसी स्थिति की बात नहीं कही गई जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती रखना जरूरी हो। इसी के बाद मेडिकल जांच पूरी होने पर उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया।
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सेना से टकराव नहीं करेंगे इमरान खान? PTI नेता का बड़ा संकेत

इमरान खान की मेडिकल जांच के बीच पाकिस्तान की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। PTI के करीबी नेता और प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने संकेत दिया है कि अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं तो वह सेना या सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से टकराव का रास्ता नहीं अपनाएंगे।
रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में बुखारी ने कहा कि अगर इमरान खान को अगले दिन ही रिहा कर दिया जाए तो वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे देश को नुकसान पहुंचे। उनके मुताबिक इमरान देश को प्राथमिकता देने वाले व्यक्ति हैं और सेना तथा राजनीतिक प्रतिष्ठान से टकराव से बचेंगे।
बुखारी ने कहा कि सुलह का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है, लेकिन देश के हित में अपने दर्द और चोट को नियंत्रित करना और टकराव से बचना जरूरी है। उनके इस बयान को PTI के उस रुख में महत्वपूर्ण नरमी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी पिछले कई वर्षों से सैन्य नेतृत्व की आलोचना करती रही है।

असीम मुनीर के लिए 'हीलिंग हैंड' वाला संदेशः बुखारी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के लिए भी एक असामान्य रूप से नरम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर मुनीर एक दिन यह तय करें कि अब उन्हें देश के लिए 'हीलिंग हैंड' यानी उपचार और सुलह का हाथ बढ़ाना चाहिए, तो इससे राजनीतिक माहौल बदल सकता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा होने पर राजनीतिक कैदियों की रिहाई का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अभी PTI और सेना के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है।

क्या PTI और पाकिस्तानी सेना के बीच बर्फ पिघल रही है?

इमरान खान और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के बीच लंबे समय से बेहद तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। PTI समर्थक इमरान की 2023 में गिरफ्तारी और उसके बाद की कार्रवाई के लिए सैन्य नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। इमरान खान भी अतीत में सेना प्रमुख असीम मुनीर पर तीखे आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में उनके करीबी सहयोगी का अब टकराव के बजाय सुलह की बात करना महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, इस बयान से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इमरान खान स्वयं सेना के साथ समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। अटलांटिक काउंसिल के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने भी इस बात पर सवाल उठाया कि जेल में रहते हुए PTI नेतृत्व किसी संभावित बातचीत में एकजुट रुख अपना पाएगा या नहीं। पार्टी के कई नेता गिरफ्तार हैं या राजनीतिक दबाव के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हैं।

27 सितंबर को PTI का राष्ट्रव्यापी मार्च

सुलह के संकेतों के बावजूद PTI ने अपना आंदोलन खत्म करने का संकेत नहीं दिया है। जुल्फिकार बुखारी के मुताबिक पार्टी 27 सितंबर को राष्ट्रव्यापी मार्च निकालेगी। यह मार्च इमरान खान के इलाज, परिवार, डॉक्टरों और वकीलों तक उनकी पहुंच, उनके मामलों की सुनवाई में तेजी और अंततः उनकी रिहाई की मांग को लेकर होगा।
बुखारी ने कहा कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जो फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं, वे इस आंदोलन को संगठित करने या इसमें शामिल होने में भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में PTI के कई नेता फिर से सक्रिय रूप से सामने आ सकते हैं।

इमरान खान के खिलाफ मामलों की स्थिति

इमरान खान को 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद कई कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई मामलों में सजा हुई है। हालांकि, कई मामलों में सजाएं निलंबित या फैसले पलटे जा चुके हैं और कुछ मामलों में अपील लंबित हैं। इमरान खान सभी आरोपों से इनकार करते हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल पहुंचे थे इमरान

सुप्रीम कोर्ट ने इस सप्ताह इमरान खान को जेल से निकालकर निजी अस्पताल में मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत के आदेश के मुताबिक उन्हें 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाना था। सरकार ने शुरुआत में आदेश का पालन करने की बात कही, लेकिन बाद में निजी अस्पताल में स्थानांतरण के आदेश की समीक्षा की मांग भी की।
इमरान खान की पार्टी और परिवार चाहते थे कि उन्हें अस्पताल में ही इलाज के लिए रखा जाए। PTI ने अदालत के आदेश को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया था। पार्टी ने यह भी कहा था कि उसके कार्यकर्ता अस्पताल के बाहर जमा होकर चिकित्सा प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेंगे।
फिलहाल उनकी वापसी अदियाला जेल में हो गई है, लेकिन मेडिकल जांच और सेना के साथ संभावित सुलह के संकेतों ने पाकिस्तान की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या इमरान खान की रिहाई के साथ PTI और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच टकराव की जगह बातचीत और समझौते का दौर शुरू हो सकता है? इसका जवाब आने वाले दिनों की राजनीतिक और कानूनी घटनाओं से ही स्पष्ट होगा।