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जानिए कौन हैं ब्रिटिश पीएम की दौड़ में भारतीय मूल के शख्स 

ब्रिटेन में मौजूदा राजनीतिक संकट जिसके इस्तीफ़े के साथ शुरू हुआ उस शख्स का नाम तो आप जानते ही होंगे, लेकिन यह जानकर आप चौंक जाएँगे कि वह शख्स अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में है। यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि भारतीय मूल के ऋषि सुनाक हैं।

सुनाक ने राजकोष के चांसलर या सामान्य अर्थों में कहें तो वित्तमंत्री के रूप में इस्तीफा दिया और इसी इस्तीफ़े के साथ बोरिस जॉनसन की सरकार संकट में आ गई। सुनाक के इस्तीफ़े के बाद एक एक कर कई मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया। और अब ख़बर आ रही है कि प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने खुद इस्तीफा देने का फ़ैसला किया है। इसके साथ ही नये पीएम के संभावित नामों की चर्चा भी चलने लगी है।

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ऋषि सुनाक को ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री के लिए एक दावेदार माना जा रहा है। अगर सुनाक पीएम चुने जाते हैं तो वह ब्रिटिश पीएम बनने वाले पहले भारतीय मूल के व्यक्ति होंगे।

ऋषि सुनाक के दादा-दादी पंजाब से ब्रिटेन में गए थे और वहीं बस गए। ऋषि सुनाक की पत्नी अक्षता मूर्ति इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी हैं। वैसे, अक्षता के एक मामले की वजह से सुनाक को थोड़ा राजनीतिक नुक़सान झेलना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए कि अक्षता मूर्ति रूस में इन्फोसिस के परिचालन से हो रही कमाई में हिस्सेदार हैं और इस पर ब्रिटेन में टैक्स नहीं दे रही हैं। 

अक्षता, जो एक भारतीय नागरिक हैं, ब्रिटेन में कर उद्देश्यों के लिए गैर-निवासी थीं। इसका मतलब है कि वह कानूनी रूप से अपनी विदेशी कमाई पर कर का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं थीं। हालाँकि विवाद के बाद अक्षता ने घोषणा की थी कि वह अपने पति के काम में व्यवधान से बचने के लिए अपनी सारी आमदनी पर ब्रिटेन में कर का भुगतान करेंगी। 
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बता दें कि ऋषि सुनाक को बोरिस जॉनसन ने ही चुना था और उन्हें राजकोष का चांसलर नियुक्त किया गया था। उनको पहली बार पूर्ण कैबिनेट का दर्जा फरवरी 2020 में मिला। ऋषि सुनाक ने अपने इस्तीफे के पत्र में कहा है कि जब पूरी दुनिया महामारी, यूक्रेन में युद्ध और अन्य कारणों से आर्थिक संकट का सामना कर रही है, ऐसे वक्त में मुझे यह फैसला लेना पड़ा है। लेकिन जनता चाहती है कि सरकार सही तरीके से और गंभीरता से चले।

व्यवसायों और श्रमिकों की मदद के लिए दसियों अरबों पाउंड के बड़े पैकेज को तैयार करने के बाद वह महामारी के दौरान बेहद लोकप्रिय हो गए।

वह कई मामलों में आलोचनाएँ भी झेलते रहे। अपनी पत्नी की ग़ैर-निवासी कर स्थिति, उनके यूएस ग्रीन कार्ड और ब्रिटेन में महंगाई संकट से निपटने में धीमी गति अपनाने की धारणा बनने से वह बैकफुट पर रहे।

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