ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद उनकी जगह नयी नियुक्ति होने तक देश में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी को अंतरिम सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। जानें कौन हैं अराफी।
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद देश में अंतरिम व्यवस्था बना ली गई है और आयतुल्लाह अराफी को ईरान का अंतरिम सर्वोच्च नेता चुना गया है। वह इस पद पर तब तक बने रहेंगे जब तक स्थायी सर्वोच्च नेता का चयन नहीं कर लिया जाता है। अराफी गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं और अब अस्थायी नेतृत्व परिषद में 'जुरिस्ट' यानी धार्मिक न्यायविद् के रूप में शामिल होकर सर्वोच्च नेता के कर्तव्यों को निभाएंगे।
ख़ामेनेई की मौत शनिवार को अमेरिका और इसराइल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। इस हमले में तेहरान के कई सैन्य ठिकानों, सरकारी जगहों और वरिष्ठ नेताओं के स्थानों को निशाना बनाया गया था। ईरान ने पहले इन ख़बरों को नकारा था, लेकिन रविवार सुबह मौत की पुष्टि की। ईरान अब बाहरी हमलों और आंतरिक नेतृत्व बदलाव के दोहरे संकट से जूझ रहा है।
अंतरिम नेतृत्व परिषद कैसे बनी?
ईरान के संविधान के अनुसार, सर्वोच्च नेता की मौत या अक्षमता होने पर एक अस्थायी परिषद बनती है। इस परिषद में तीन सदस्य होते हैं। संविधान के अनुसार इसमें मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, न्यायपालिका प्रमुख गोलाम-हुसैन मोहसनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल से एक धर्मगुरु हैं।
आयतुल्लाह अलि रेजा अराफी को इसी तीसरे पद पर नियुक्त किया गया है। वे इस परिषद के जरिए देश के फैसले लेंगे, सेना का नेतृत्व करेंगे और नये नेतृत्व वाले बदलाव के दौरान तक स्थिरता बनाए रखेंगे। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स यानी 88 वरिष्ठ धर्मगुरुओं की चुनी हुई संस्था जल्द नया सर्वोच्च नेता चुन सकती है।आयतुल्लाह अलि रेजा अराफी कौन हैं?
अराफी का जन्म 1959 में मेयबोद में हुआ था और उनकी उम्र क़रीब 67 साल है। वे शिया इस्लाम के वरिष्ठ धर्मगुरु हैं। वह गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं जो क़ानूनों को मंजूरी देते हैं और चुनाव उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर सकते हैं। वह असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य, ईरान के पूरे सेमिनरी सिस्टम के प्रमुख और स्वयंसेवी पैरामिलिट्री फोर्स बसिज के प्रमुख हैं। वे कट्टरपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं, नास्तिकता और ईसाई धर्म के विरोधी हैं और शिया इस्लाम को फैलाने में सक्रिय रहे हैं। यह नियुक्ति ईरान की धार्मिक व्यवस्था की मजबूती दिखाती है।आईआरजीसी में भी बड़ा बदलाव
इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर संस्था है, जो सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक मामलों में बहुत प्रभाव रखती है। शनिवार के हमलों में आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ जनरल मोहम्मद पाकपूर की मौत हो गई। सरकारी मीडिया ने बताया है कि अब अहमद वाहिदी को नया आईआरजीसी प्रमुख नियुक्त किया गया है।
वाहिदी पूर्व रक्षा मंत्री और गृह मंत्री रह चुके हैं। वे आईआरजीसी के डिप्टी कमांडर भी थे। आईआरजीसी सामान्य सेना से अलग काम करती है और सीधे सर्वोच्च नेता के अधीन होती है। यह बदलाव सेना की कमान में स्थिरता लाने के लिए किया गया है।ट्रंप और नेतन्याहू की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर लिखा, 'इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक ख़ामेनेई मर गये। यह ईरान के लोगों के लिए न्याय है, साथ ही सभी महान अमेरिकियों और दुनिया भर के उन लोगों के लिए जो ख़ामेनेई और उनके खूनी गिरोह द्वारा मारे या घायल किए गए थे।'
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मौत की पुष्टि की। ईरान में 40 दिनों का शोक जारी है, लेकिन हमलों और नेतृत्व बदलाव से स्थिति नाजुक बनी हुई है। अंतरिम परिषद अब देश को संभाल रही है और आगे क्या होगा, यह अगले दिनों में साफ़ होगा।