ईरान के सरकारी टीवी ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ समझौते का मसौदा यानी Draft MoU मिला है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़रानी के एक महीने के भीतर युद्ध-पूर्व के स्तर पर लौटने की संभावना है, जबकि अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी ख़त्म कर देगा।
मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप
ईरानी मीडिया ने बुधवार को MoU ड्राफ्ट में अमेरिकी सेना के हटने और होर्मुज खुलने का जो दावा किया उसको व्हाइट हाउस ने पूरी तरह मनगढ़ंत बता दिया है। ईरान ने पहले दावा किया था कि अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए एक प्रारंभिक ड्राफ्ट समझौता यानी MoU तैयार हो गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरान के सरकारी टीवी के हवाले से रिपोर्ट दी कि इस ड्राफ्ट MoU में कहा गया है कि अमेरिका ईरान के आसपास से अपनी सेना वापस लेगा और नौसेना द्वारा लगाए गए ब्लॉकेड को हटा देगा। इसके साथ ही होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही एक महीने के अंदर पहले जैसी सामान्य हो जाएगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ओमान के सहयोग से इस जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों का प्रबंधन करेगा। हालांकि, इसमें सैन्य जहाज शामिल नहीं होंगे। रिपोर्ट के अनुसार अगर अमेरिका अपनी सेनाएं ईरान के आसपास से हटा लेता है तो होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो जाएगी। अगर 60 दिनों के अंदर अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC का बाध्यकारी प्रस्ताव बना दिया जाएगा।
ईरान ने साफ़ किया है कि यह अभी अनौपचारिक ड्राफ्ट है। यह पूरी तरह से अंतिम रूप से तैयार नहीं हुआ है। ईरान बिना ठोस पुष्टि के कोई कदम नहीं उठाएगा।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस ने 'मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग' के बारे में ईरानी मीडिया की रिपोर्टों को 'पूरी तरह से मनगढ़ंत' बताकर खारिज कर दिया है। हालाँकि, इसके साथ ही व्हाइट हाउस की असिस्टेंट प्रेस सेक्रेटरी ओलिविया वेल्स ने फॉक्स न्यूज़ और दूसरे मीडिया आउटलेट्स को बताया है कि अमेरिका-ईरान बातचीत 'अच्छी तरह आगे बढ़ रही है'।
अमेरिका के एक न्यूज़ आउटलेट की रिपोर्ट के मुताबिक, वेल्स ने एक ईमेल में कहा, 'जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है और उन्होंने अपनी रेड लाइन्स साफ़ कर दी हैं। ...राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी लोगों के लिए सिर्फ़ एक अच्छी डील करेंगे, जिससे यह पक्का हो सके कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों।'
अमेरिका और ईरान के बीच आया यह MoU फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद अप्रत्यक्ष बातचीत का नतीजा है; इस बातचीत में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ की मुख्य भूमिका पाकिस्तान ने निभाई है।
पाकिस्तान की बड़ी भूमिका
इस ड्राफ्ट समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई है। फरवरी में शुरू हुए युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत शुरू हुई थी, जिसमें पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच पुल का काम किया।
यह पूरा विवाद फरवरी 2026 में ईरान और इसराइल के बीच बढ़ी तनाव से शुरू हुआ था। इस संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। होर्मुज दुनिया का बेहद अहम जलमार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है। संघर्ष बढ़ने के बाद अमेरिका भी इसमें शामिल हो गया था।
अप्रैल में हुआ था संघर्षविराम
8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ था। लेकिन इसके बावजूद हाल ही में तनाव बढ़ गया था। मंगलवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसने दक्षिणी ईरान में 'आत्मरक्षा' के लिए हमले किए। ईरानी मीडिया के अनुसार, होर्मुज के पास बंदर अब्बास इलाके में विस्फोट हुए। ईरान ने इन हमलों के बाद बदला लेने की धमकी दी थी।अब्राहम एकोर्ड्स पर ट्रंप की नई शर्त
इसी बीच, ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते से पहले एक नई और कड़ी शर्त रख दी थी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी डील होने से पहले सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन को इसराइल के साथ अब्राहम एकोर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। यह या तो सबके लिए बहुत अच्छा समझौता होगा, वरना कोई समझौता नहीं होगा।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो बड़ी लड़ाई हो सकती है। ट्रंप ने सऊदी अरब और कतर को इस प्रक्रिया की शुरुआत करने की जिम्मेदारी सौंपी।
ट्रंप ने शनिवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसीम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान समेत कई नेताओं से फोन पर बात की और अब्राहम एकोर्ड्स में शामिल होने पर जोर दिया। हालांकि, पाकिस्तान ने इस मांग को साफ़ तौर पर खारिज कर दिया है। पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इसराइल को मान्यता देना पाकिस्तान की मूल विचारधारा के खिलाफ है। अभी क्या स्थिति है?
बहरहाल, रिपोर्ट के अनुसार ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका अपनी सेनाएं हटाता है और नाकाबंदी खत्म करता है तो क्षेत्र में शांति और सामान्य व्यापार बहाल हो सकता है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई मुद्दे बाकी हैं और ड्राफ्ट अभी अंतिम नहीं हुआ है। जानकारों का मानना है कि अगर यह समझौता सफल होता है तो न सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल निर्यात सामान्य होगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी कम हो सकता है। लेकिन हाल के अमेरिकी हमलों के कारण भरोसा बनाना दोनों पक्षों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। अब दुनिया की नज़रें इस ड्राफ्ट MoU पर हैं। अगर 60 दिनों में अंतिम समझौता हो जाता है तो यह UNSC का प्रस्ताव बन सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद अहम होगा।