अमेरिका के जिस AWACS विमान को उड़ता हुआ रडार माना जाता है और जो काफी दुर्लभ विमान है उसके नुक़सान से अमेरिका को कितना बड़ा झटका लगा है?
अमेरिकी प्लेन को गिराने का दावा। फोटो साभार: @sentdefender
अमेरिका का जो एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी AWACS दुश्मन सेनाओं का दूर से ही पता लगा लेता है उसके विमान को ईरान ने ध्वस्त कर दिया है। उसने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला करके अमेरिकी सेना का एक अत्याधुनिक E-3 सेंट्री AWACS विमान को भारी नुकसान पहुंचाया है। कुछ रिपोर्टों में इसे पूरी तरह नष्ट बताते हुए कहा गया है। हालाँकि, अमेरिका की तरफ़ से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इस विमान के नुक़सान से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की हवाई निगरानी और युद्ध नियंत्रण क्षमता पर असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि यह अमेरिकी एयर सुपीरियॉरिटी को बड़ा झटका है।
यह घटना शनिवार की है। ईरान ने इस एयर बेस पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने बताया कि इस हमले में AWACS विमान नष्ट हो गया और 12 से 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। सोशल मीडिया पर विमान के मलबे की तस्वीरें भी वायरल हुई हैं।
अमेरिकी सेना की ओर से अभी तक इस हमले या नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स और तस्वीरों से यह बात सामने आ रही है कि विमान को काफी नुकसान पहुंचा है। बेस पर रिफ्यूलिंग टैंकर विमान भी क्षतिग्रस्त हुए।
AWACS विमान क्यों इतना अहम?
E-3 सेंट्री AWACS को 'उड़ता हुआ रडार' भी कहा जाता है। यह विमान सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को पहचान सकता है और ट्रैक कर सकता है। यह युद्ध के मैदान की पूरी तस्वीर रीयल टाइम में कमांड सेंटर को देता है। लड़ाकू विमानों और जमीनी सेना को सपोर्ट देता है। यह पुराना लेकिन बहुत कीमती विमान है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी वायुसेना के बेड़े में अब इन विमानों में से केवल 16 ही बचे हैं।
प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पहले भी हमले
यह एयर बेस रियाद से करीब 96 किलोमीटर दूर है। पिछले हफ्ते भी यहां दो बार हमले हुए थे, जिनमें 14 अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे। इस हफ्ते कुल 24 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। युद्ध शुरू होने से अब तक 300 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और कम से कम 13 की मौत हो चुकी है।
ईरान का रणनीतिक हमला
ईरान कहता है कि अमेरिकी और इसराइली ठिकाने उसके वैध लक्ष्य हैं। इस हमले के साथ-साथ ईरान ने सऊदी अरामको की रस तनुरा रिफाइनरी और यनबू पोर्ट की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया। इसका मक़सद खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित करना है।खाड़ी देश ईरान के साथ क्यों नहीं?
सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश ईरान को अपना खतरा मानते हैं। सऊदी अरब ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम और उसके बढ़ते सैन्य शक्ति से चिंतित है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध ऐतिहासिक अवसर है, जिससे क्षेत्र को नया आकार दिया जा सकता है।
युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका-इसराइल ने ईरान पर हमला किया और सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर आई। अब युद्ध का एक महीना पूरा हो चुका है। दोनों तरफ़ से मिसाइल-ड्रोन हमले जारी हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरानी जमीन पर कदम रखेंगे तो वे ताबूत में ही लौटेंगे।
अमेरिका ने हाल ही में क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी की है, जिसमें 82वीं एयरबोर्न डिवीजन शामिल हो सकती है। ईरान ने खार्ग द्वीप पर माइंस बिछाने और अतिरिक्त सैनिक भेजने शुरू कर दिए हैं, क्योंकि अमेरिका वहां जमीनी कार्रवाई की योजना बना रहा है।
यह घटना दिखाती है कि युद्ध अब खाड़ी देशों में भी तेज चुका है और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि AWACS जैसे महंगे और दुर्लभ विमान का नुकसान अमेरिका के लिए बड़ा झटका है।