क्या इसराइल युद्धविराम या फिर मध्य पूर्व में शांति नहीं होने देना चाहता है? युद्धविराम के बावजूद इसराइल ने लेबनान में हमले जारी रखे और 250 लोगों की मौत के बाद अब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है। अब आगे क्या होगा?
अब्बास अरागची होर्मुज स्ट्रेट पर क्या बोले?
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर घोषित होने के महज 24 घंटे में ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह बंद कर दिया है। ईरान ने यह क़दम इसराइल के लेबनान में किए गए हमलों के जवाब में उठाया है। इन हमलों 250 से ज्यादा लोग मारे गए। इसराइल ने कहा है कि इसने युद्ध शुरू होने के बाद लेबनान में अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। वह भी डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के बाद।
लेबनान पर विवाद क्यों?
युद्धविराम की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान ने पहले कहा था कि सीजफायर में लेबनान में भी युद्ध को रोकना शामिल है। लेकिन पाकिस्तान की घोषणा के क़रीब चार घंटे बाद इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कह दिया कि लेबनान सीजफायर प्रस्ताव में शामिल नहीं है। इसके बाद इसराइल ने ताबड़तोड़ हमले किए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई दी कि सीजफायर डील में लेबनान को शामिल नहीं किया गया था।
लेकिन अब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि इसराइल सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है और लेबनान पर हमले जारी रख रहा है।
लेबनान में भारी तबाही
लेबनान के सिविल डिफेंस विभाग के अनुसार, बुधवार को इसराइली हमलों में 254 लोग मारे गए और 1165 से ज्यादा घायल हुए। इन हमलों में बेरूत समेत कई इलाकों को निशाना बनाया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सैकड़ों मौतों और घायलों की पुष्टि की। इसराइल ने इसे सबसे बड़ा समन्वित हमला बताया और कहा कि उसने 10 मिनट में 100 से ज्यादा ठिकानों पर 160 बम गिराए। इसराइल का दावा है कि ये हमले ईरान समर्थित हिजबुल्लाह गुट के सैन्य ठिकानों पर किए गए।
सीजफायर पर विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है क्योंकि वहां हिजबुल्लाह सक्रिय है। ट्रंप ने इसे अलग झड़प बताया। इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी साफ़ कहा, 'ईरान के साथ सीजफायर में हिजबुल्लाह शामिल नहीं है। हम हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखेंगे।'लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले कहा था कि सीजफायर हर जगह लागू होगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सीजफायर की शर्तें स्पष्ट और साफ हैं।
अरागची ने एक्स पर लिखा, 'अमेरिका को फ़ैसला करना होगा। या तो सीजफायर या फिर इसराइल के ज़रिए युद्ध जारी रखना। दोनों एक साथ नहीं हो सकते। दुनिया लेबनान में हो रही हत्याओं को देख रही है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है।'
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम?
दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। ईरान ने इसे बंद करके दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को फिर से प्रभावित कर दिया है। इससे तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान पर हमले रुक नहीं जाते, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा। इससे पहले सीजफायर में ईरान ने इस जलडमरूमध्य को दो हफ्ते के लिए खोलने पर सहमति जताई थी, लेकिन अब उसे फिर बंद कर दिया गया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका
पाकिस्तान ने इस सीजफायर में अहम भूमिका निभाई थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ ने दोनों पक्षों से बात की थी। ईरान ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की, लेकिन अब लेबनान पर हमलों को सीजफायर का उल्लंघन बता रहा है।
क्या होगा आगे?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इसराइल के हमलों को नहीं रोकता तो सीजफायर टूट सकता है। अमेरिका और इसराइल का रुख साफ है कि लेबनान अलग मुद्दा है। लेबनान में हालात बहुत गंभीर हैं। हजारों लोग पहले ही मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं।कहा जा रहा है कि यह सीजफायर बहुत नाजुक है। अगर जल्दी कोई समझौता नहीं हुआ तो पूरा क्षेत्र फिर से बड़े युद्ध में फंस सकता है। दुनिया भर के नेता इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
होर्मुज बंद होने से जहाजों की आवाजाही रुक गई है। लेबनान में बचाव कार्य जारी है। अगले कुछ घंटों या दिनों में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच नई बातचीत हो सकती है। वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस के इस्लामाबाद जाने की संभावना है। लेकिन इस बीच सीजफायर पर बादल मंडराते दिख रहे हैं।