ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका के 48 घंटे के सीज़फ़ायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार एक अनाम सूत्र ने शुक्रवार को ईरान की अर्ध-सरकारी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी को यह बताया है। सूत्र ने बताया कि यह प्रस्ताव बुधवार को किसी दूसरे देश के ज़रिए दिया गया था, जिसका नाम नहीं बताया गया। रायटर्स के मुताबिक़ अमेरिका की ओर से इस पर तत्काल कोई टिप्पणी या पुष्टि नहीं की गई है।
यह ख़बर तब आई है जब ईरान ने दावा किया है कि उसने दो अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराए हैं। इसके अलावा एक ड्रोन को मार गिराए जाने की ख़बर आ रही है। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इस्फ़हान प्रांत के ऊपर एक एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी सेना ने शुक्रवार को ही दावा किया था कि इसने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। एक को दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर और दूसरे को होर्मुज़ स्ट्रेट के पास।

20 साल में पहली बार अमेरिकी जेट गिराये गये

ईरान द्वारा दो अमेरिकी सैन्य विमानों को मार गिराना अमेरिका के लिए एक बेहद दुर्लभ हमला है। यह 20 से ज़्यादा सालों में पहली बार हुआ है। यह दिखाता है कि इस्लामिक गणराज्य में जवाबी हमला करने की क्षमता अभी भी बरकरार है, भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया हो कि उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका का एक एफ़15-ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया। इस घटना में एक सैनिक को बचा लिया गया है, जबकि दूसरे सैनिक की तलाश अभी भी जारी है। ईरान के सरकारी मीडिया ने यह भी बताया कि ईरानी रक्षा बलों के हमले के बाद अमेरिका का एक ए-10 हमलावर विमान गिरा है।

तेहरान में मिसाइल स्टोरेज साइटों पर हमला: इसराइल

इसराइली सेना ने शनिवार को कहा है कि उसकी वायु सेना ने तेहरान में बैलिस्टिक और एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल स्टोरेज साइट्स पर हमला किया। उसने कहा कि एक दिन पहले किए गए इन हमलों में ईरानी राजधानी में हथियारों के निर्माण स्थलों के साथ-साथ सैन्य अनुसंधान और विकास फैसिलिटी भी शामिल थीं। इसराइली सेना ने कहा है कि ये हमले ईरान के मुख्य सिस्टम और बुनियाद को ज़्यादा नुक़सान पहुँचाने के लिए चल रहे प्रयास का हिस्सा हैं।

लेबनान में घायल तीन शांति सैनिक इंडोनेशियाई: यूएन

यूएन अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में हुए एक धमाके में घायल हुए संयुक्त राष्ट्र के तीन शांति सैनिक इंडोनेशिया के थे। यह घटना तब हुई, जब कुछ ही दिन पहले अलग-अलग धमाकों में तीन अन्य इंडोनेशियाई नागरिकों की मौत हो गई थी।

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की अंतरिम सेना ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को अल अदेइसे के पास संयुक्त राष्ट्र के एक सुविधा केंद्र के अंदर यह धमाका हुआ। इस धमाके में तीन शांति सैनिक घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इनमें से दो शांति सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

ऑरेकल की बिल्डिंग पर गिरा मलबा

दुबई में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच आसमान में एरियल इंटरसेप्शन के दौरान मिसाइल का मलबा Oracle कंपनी की बिल्डिंग पर गिरा। दुबई के अधिकारियों ने बताया कि दुबई के इंटरनेट सिटी इलाके में Oracle कंपनी वाली बिल्डिंग की बाहर की दीवार पर आसमान में मिसाइल रोकने के दौरान गिरा मलबा लगा। इसमें कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ। Oracle कंपनी को हाल ही में ईरानी सेना ने 18 अमेरिकी कंपनियों की लिस्ट में डाला था। ईरान ने कहा था कि वह इन कंपनियों को निशाना बनाएगा।

चर्चों ने प्रार्थनाएं ऑनलाइन कीं

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुबई सरकार के निर्देश पर कई चर्चों ने अपनी फिजिकल सेवाएं रोक दी हैं। 3 अप्रैल से सभी चर्चों में व्यक्तिगत रूप से इकट्ठा होना बंद कर दिया गया है। अब चर्च अपनी सेवाएं ऑनलाइन चला रहे हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि चर्च परिसर में न आएं और घर से ही प्रार्थना करें। चर्चों ने यह फैसला ईस्टर वीक के दौरान लिया है, ताकि बड़ी भीड़ इकट्ठा होने से कोई खतरा न हो।

दान से खरीदी 40 टन दवाइयों को ईरान में भेज नहीं पा रहा

नई दिल्ली में ईरान के दूतावास में भारत से खरीदी गई 40 टन दवाइयों का बड़ा सामान पड़ा हुआ है। इसे ईरान भेजने का इंतज़ार है। पिछले हफ्ते ईरान के मशहद एयरपोर्ट पर अमेरिका-इसराइल के हवाई हमले में एक विमान क्षतिग्रस्त हो गया। यह वही विमान था जो दिल्ली आने वाला था और इन दवाइयों को ले जाने वाला था।
ईरानी दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि अब वे दवाइयों को ईरान भेजने का कोई दूसरा रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यह आसान नहीं है। उन्होंने कहा, 'अमेरिकी-इसराइली हमले में जो विमान क्षतिग्रस्त हुआ, वह नई दिल्ली में उतरकर 40 टन दवाइयों का सामान लेने वाला था। अब हम वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं, जो इन परिस्थितियों में मुश्किल है।'

पहले भारत से खरीदी गई दो छोटी खेप दवाइयाँ आर्मेनिया के रास्ते तेहरान भेजी जा चुकी हैं। यह 40 टन वाली खेप सबसे बड़ी होती, जिसकी ईरान को बहुत जरूरत है। ईरान के दूतावास ने भारत में युद्ध के दौरान लोगों से जो दान इकट्ठा किया, उसी पैसे से ये दवाइयाँ खरीदी गई हैं। अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईरान में दवा बनाने वाली कंपनियों और सुविधाओं पर भी हमले हो रहे हैं, इसलिए दवाइयों की कमी की चिंता बढ़ गई है।