क्या ईरान अब तक जिस संधि के कारण न्यूक्लियर हथियार बनाने से दूर रहा है, क्या उस संधि से बाहर निकलने की तैयारी में है। ईरान इसराइल अमेरिका युद्ध के बीच ईरानी संसद के सदस्य अब देश को न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी यानी एनपीटी से बाहर निकालने की तेज़ी से कोशिश कर रहे हैं। ईरान के नेता कह रहे हैं कि इस अंतरराष्ट्रीय संधि से उन्हें कोई फ़ायदा नहीं हुआ, बल्कि उनके न्यूक्लियर साइटों पर हमले हो रहे हैं।
संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि ईरान के लिए इस संधि में बने रहना बेकार है। उन्होंने कहा, 'यह संधि हमें कोई लाभ नहीं दे रही है।' अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान से सांसद मालेक शरियाती ने बताया कि एक अहम विधेयक संसद के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। यह बिल जल्द ही चर्चा के लिए लिया जाएगा। इस बिल में तीन मुख्य बातें हैं-
  • ईरान को एनपीटी से पूरी तरह बाहर निकालना।
  • 2015 के पुराने न्यूक्लियर समझौते से जुड़े प्रतिबंधों वाले कानून को रद्द करना।
  • शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन, BRICS जैसे दोस्त देशों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए नई अंतरराष्ट्रीय संधि का समर्थन करना।
युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। उसके बाद से ईरानी संसद की कोई बैठक नहीं हुई है।

आईएईए पर ईरान का आरोप

ईरानी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए पर आरोप लगा रहे हैं कि वह राजनीति कर रही है और अमेरिका-इसराइल के हमलों में शामिल है। आईएईए के डायरेक्टर राफेल ग्रॉसी को 'खून में साझेदार' बताते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद मोहबर ने कहा कि ग्रॉसी के रिपोर्ट्स और हमलों को बढ़ावा देने से ईरान को कठोर फ़ैसले लेने पड़ेंगे। संसद की सुरक्षा समिति के सदस्य फदा-हुसैन मालेकी ने भी ग्रॉसी पर आरोप लगाया कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए उकसा रहे हैं।

ग्रॉसी ने हाल ही में अमेरिकी मीडिया को बताया था कि कोई भी युद्ध ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को पूरी तरह ख़त्म नहीं कर सकता, सिवाय न्यूक्लियर युद्ध के।

हमलों से बिजली और स्टील उद्योग पर असर

अमेरिका और इसराइल के हमलों में काफी तेजी आई है। इन हमलों में सिर्फ़ न्यूक्लियर साइटें ही नहीं, बल्कि बिजली, स्टील फैक्टरियां और अन्य अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। याज्द में येलोकेक यूरिनियम प्रोसेसिंग सुविधा पर हमला हुआ। आराक के पास खोंडाब हेवी वॉटर कॉम्प्लेक्स पर बमबारी हुई। बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास तीन प्रोजेक्टाइल गिरे, जिससे आईएईए ने बड़े रेडियोलॉजिकल हादसे की चेतावनी दी।
स्टील उद्योग पर भी भारी हमले हुए। इस्फाहान के मोबारकेह कॉम्प्लेक्स और अहवाज के खुजिस्तान कॉम्प्लेक्स को नुक़सान पहुँचा। अहवाज प्लांट ने उत्पादन रोकने का ऐलान कर दिया। ये कंपनियाँ ईरान के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का मुख्य आधार हैं और हजारों लोगों को रोजगार देती हैं। ईरान पहले से ही ऊर्जा संकट और 70 प्रतिशत के आसपास महंगाई से जूझ रहा है।
बता दें कि ट्रंप ने दो बार ईरानी पावर प्लांट्स पर हमले टालने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि 6 अप्रैल तक हमले नहीं होंगे और ईरान से बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। लेकिन दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं। तेहरान में पिछली दो रातें सबसे भयानक रहीं। बमबारी से आसमान नारंगी सा दिखने लगा और कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।

एनपीटी का क्या होगा?

बहरहाल, अगर संसद एनपीटी से अलग होने से जुड़ा यह बिल पास कर देती है तो इसे गार्जियन काउंसिल यानी 12 सदस्यीय शक्तिशाली संवैधानिक संस्था की मंजूरी भी लेनी होगी। उसके बाद ही सरकार इसे लागू कर सकेगी।
ईरान के कट्टरपंथी नेता पहले भी एनपीटी से निकलने और न्यूक्लियर बम बनाने की मांग करते रहे हैं। अब युद्ध के चलते यह मांग और मज़बूत हो गई है। ईरान कहता है कि उसका न्यूक्लियर कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन अमेरिका और इसराइल इसे हथियार बनाने की कोशिश बता रहे हैं।
यह स्थिति पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही है। अगर ईरान एनपीटी से बाहर निकलता है तो वैश्विक न्यूक्लियर विस्तार को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। अभी संसद की बैठक नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। लोग देख रहे हैं कि अगले कुछ दिनों में क्या फ़ैसला होता है।