ईरान के हिस्से वाले साउथ पार्स ऑयल फैसिलिटी पर इसराइल के हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने गुरुवार को चेताया है कि अगर अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध में ऊर्जा सुविधाओं पर फिर से हमला हुआ तो तेहरान बिल्कुल भी संयम नहीं बरतेगा। साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड है, जो ईरान और क़तर के बीच बँटा हुआ है। यह दोनों देशों की सीमाओं में फैला हुआ है। ईरान वाले हिस्से को साउथ पार्स और क़तर वाले हिस्से को नॉर्थ डोम या नॉर्थ फील्ड कहते हैं।
अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसराइल के हमले के जवाब में हमने अपनी शक्ति का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा ही इस्तेमाल किया था। संयम बरतने का एकमात्र कारण तनाव कम करने की अपील का सम्मान करना था। अगर हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर फिर से हमला हुआ, तो बिल्कुल भी संयम नहीं बरता जाएगा।'

यूरोपीय देश, जापान होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही शुरू कराएँगे!

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की है। ये देश होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों में योगदान देने को तैयार हैं। यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और गैस के लिए बहुत अहम रास्ता है, जहां से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

गुरुवार को जारी संयुक्त बयान में इन देशों ने कहा कि वे ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए एकजुट कदम उठाएंगे। बयान में लिखा है, 'हम होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उचित प्रयासों में योगदान देने की तैयारी में हैं। हम उन देशों के प्रयासों का स्वागत करते हैं जो तैयारी में लगे हैं।' इसके साथ ही ईरान से मांग की गई है कि वह तुरंत हमले रोक दे, खतरों और हमलों को बंद करे तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करे। बयान में कहा गया कि ईरान के इन कदमों से क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर गरीब और कमजोर देशों पर।

गल्फ में ईरान के हमले बढ़े

ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते युद्ध ने अब खाड़ी देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। ईरान ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रमुख तेल सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के बाद सऊदी अरब ने सख्त चेतावनी दी है कि ईरान पर जो थोड़ा बहुत विश्वास बचा था, वह पूरी तरह नष्ट हो गया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ये हमले इसराइल द्वारा ईरान के दक्षिण पार्स गैस फील्ड पर हमले के जवाब में किए गए। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी थी कि इस संघर्ष के "अनियंत्रित परिणाम" पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले सकते हैं।

जर्मनी ने कहा- मिडिल ईस्ट में युद्ध बंद करो, तभी हम हस्तक्षेप करेंगे

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने गुरुवार को कहा कि उनका देश मध्य पूर्व में तभी हस्तक्षेप करेगा जब इस क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से बंद हो जाएगी। मर्ज ने ब्रसेल्स में पत्रकारों से कहा, "हम तभी हस्तक्षेप कर सकते हैं और करेंगे जब युद्ध विराम हो जाएगा।" ब्रसेल्स में यूरोपीय नेता मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध पर चर्चा करने के लिए बैठक कर रहे हैं। मर्ज ने कहा कि जर्मनी की किसी भी प्रकार की भागीदारी का निर्णय इसराइल और खाड़ी देशों के साथ मिलकर लिया जाएगा। चांसलर ने कहा, "हम बहुत कुछ कर सकते हैं, जिसमें समुद्री मार्गों को खोलना और उन्हें सुरक्षित रखना शामिल है। लेकिन हम ऐसा तब तक नहीं करेंगे जब तक युद्ध जारी है। हम ऐसा तभी करेंगे जब युद्ध समाप्त हो जाएगा।" यूरोप ने अब तक ट्रम्प के सहायता अनुरोधों को ठुकरा दिया है। मर्ज़ ने कहा कि जर्मनी द्वारा इस क्षेत्र में संसाधनों को तैनात करने पर विचार करने से पहले "हमारे सामने कई कदम हैं", जिसमें "अंतर्राष्ट्रीय जनादेश की आवश्यकता भी शामिल है, जो वर्तमान में हमारे पास नहीं है"।

ईरान के तेल ठिकाने को लेकर ट्रंप क्या झूठ बोल रहे हैं?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुबह कहा था कि दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार, साउथ पार्स गैस क्षेत्र में स्थित ईरानी सुविधाओं पर इसराइली हमले के बारे में अमेरिका को "कुछ भी पता नहीं था"। लेकिन हमले से परिचित एक इसराइली सूत्र ने गुरुवार को सीएनएन को बताया कि इसराइल ने अमेरिका के तालमेल से यह हमला किया था, जो राष्ट्रपति के दावे का खंडन करता है। इस हमले को युद्ध में एक बड़ा मोड़ माना गया। इसराइल ने पहले भी कई ईरानी फ्यूल डिपो पर हमले किए थे, लेकिन बुधवार तक उसने तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन सुविधाओं पर हमले करने से परहेज किया था। लेकिन इसराइली हमले के जवाब में, ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख तेल सुविधाओं पर हमला किया, जिससे कतर के मुख्य ऊर्जा केंद्र, रास लफ्फान में "व्यापक क्षति" हुई। जवाबी हमलों के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू गईं, और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि रास लाफान में हुई क्षति से वैश्विक स्तर पर गैस की स्थायी कमी हो सकती है।

कुवैत में रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन का हमला

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि गुरुवार को मीना अल-अहमदी रिफाइनरी की एक यूनिट पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसकी वजह से मामूली आग लग गई। यह जानकारी कुवैत समाचार एजेंसी ने दी। इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ। मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी राजधानी कुवैत सिटी से लगभग 40 किलोमीटर (25 मील) दक्षिण में स्थित है। गुरुवार को इससे पहले, कुवैत के सशस्त्र बलों ने कहा कि देश की हवाई रक्षा प्रणाली "शत्रुतापूर्ण मिसाइल और ड्रोन हमलों" का जवाब दे रही है।

ट्रम्प के दो बयान, इसराइल को चेतावनी, ईरान को धमकी

ट्रम्प ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इसराइली हमले की कड़ी आलोचना की है, जिसके कारण तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा केंद्रों पर हमले किए। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बयान में ट्रम्प ने लिखा: “संयुक्त राज्य अमेरिका को इस विशेष हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, और कतर किसी भी तरह से इसमें शामिल नहीं था, न ही उसे इसकी कोई जानकारी थी। दुर्भाग्य से, ईरान को इसकी जानकारी नहीं थी, न ही साउथ पार्स हमले से संबंधित किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य की जानकारी थी, और उसने अनुचित और अन्यायपूर्ण तरीके से कतर के एलएनजी गैस संयंत्र के एक हिस्से पर हमला किया। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल्यवान साउथ पार्स क्षेत्र से संबंधित इसराइल द्वारा अब कोई और हमला नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि जब तक ईरान "नासमझी से किसी निर्दोष देश, जैसे कतर पर हमला करने का फैसला नहीं करता", तब तक इसराइल साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला नहीं करेगा। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "ऐसी स्थिति में, अमेरिका, इसराइल की मदद या सहमति से या उसके बिना, साउथ पार्स गैस क्षेत्र को इतनी ताकत और शक्ति से उड़ा देगा, जितनी ईरान ने पहले कभी नहीं देखी होगी।" उन्होंने आगे कहा, "मैं इस स्तर की हिंसा और विनाश को अधिकृत नहीं करना चाहता क्योंकि इसका ईरान के भविष्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा, लेकिन अगर कतर के एलएनजी पर फिर से हमला होता है, तो मैं ऐसा करने में संकोच नहीं करूंगा।"

खाड़ी देशों के 12 विदेश मंत्रियों की ईरान से युद्ध बंद करने की अपील

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद गुरुवार को जारी एक संयुक्त बयान में 12 अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से "अपने हमलों को तुरंत रोकने" और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का आह्वान किया। बयान में मंत्रियों ने खाड़ी देशों, जॉर्डन, अज़रबैजान और तुर्की पर ईरान के हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि "आवासीय क्षेत्रों, नागरिक बुनियादी ढांचे, जिनमें तेल सुविधाएं, मीठा पानी बनाने वाले जल संयंत्र, हवाई अड्डे, आवासीय भवन और राजनयिक परिसर शामिल हैं" को निशाना बनाया गया था।
मंत्रियों ने लेबनान पर इसराइल के हमलों की भी निंदा की और "लेबनान की सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए समर्थन की पुष्टि की।" लेकिन इन विदेश मंत्रियों ने ईरान पर अमेरिका-इसराइल के हमले या थोपे गए युद्ध की निन्दा नहीं की।
यह संयुक्त बयान ऐसे समय आया है जब ईरान खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है, कतर में तेल सुविधाओं में आग लगने की खबरें हैं और सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका गया है। इससे पहले, ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर उसके तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन सुविधाओं के कुछ हिस्सों पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह बयान अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों की ओर से जारी किया गया था।

कतर पर हमला

कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी (Ras Laffan Industrial City) पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, जिसमें देश की मुख्य गैस सुविधा को "व्यापक नुकसान" (extensive damage) पहुंचा। कतर एनर्जी ने आग की घटना की पुष्टि की, जिसे सिविल डिफेंस टीमों ने नियंत्रित कर लिया। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसके जवाब में कतर ने ईरानी सुरक्षा और सैन्य अटैचों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया। कतर ने इसे "खतरनाक escalation" बताया।

सऊदी अरब पर हमला

सऊदी अरब ने बताया कि रियाद के पास दो रिफाइनरियों पर हमला हुआ। सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा, "ईरान पर जो थोड़ा विश्वास बचा था, वह पूरी तरह चकनाचूर हो गया है।" उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि हमले तुरंत बंद होने चाहिए, वरना सऊदी अरब राजनीतिक और गैर-राजनीतिक विकल्पों पर विचार करेगा, जिनमें "बहुत महत्वपूर्ण" कदम शामिल हो सकते हैं। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान का रियाद और रास लाफान पर हमला एक "ब्लैकमेल" का प्रयास है, लेकिन अरब और इस्लामिक देश डरने वाले नहीं हैं। सऊदी एयर डिफेंस ने पूर्वी प्रांत में पांच ड्रोन को नष्ट कर दिया।

यूएई पर हमला

संयुक्त अरब अमीरात ने हबशान गैस सुविधा (Habshan gas facilities) और बाब ऑयलफील्ड पर हमले की पुष्टि की। यूएई ने इसे "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा" बताया। एयर डिफेंस ने हमलों को रोक लिया, कोई हताहत नहीं हुआ। यूएई ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा।

खाड़ी देशों में अमेरिकी सैनिक उतारने पर विचार

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन मिडिल ईस्ट में अपने अभियान को मजबूत करने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती पर विचार कर रहा है। अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपने अभियान में संभावित अगले कदमों की तैयारी कर रही है। ईरान युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ, ये तैनाती ट्रम्प को अमेरिकी अभियानों के विस्तार पर विचार करते समय अतिरिक्त विकल्प प्रदान करने में मदद कर सकती है।
मामले से परिचित तीन लोगों और तीन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खरग द्वीप पर जमीनी सेना भेजने के विकल्पों पर भी चर्चा की है, जो ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र है। एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा अभियान बेहद जोखिम भरा होगा। ईरान मिसाइलों और ड्रोन के जरिए द्वीप तक पहुंचने में सक्षम है।

ईरान के हमलों का वैश्विक प्रभाव

ईरान के हमलों के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है। अमेरिकी बाजार गिरावट पर बंद हुए- डॉव जोंस 1.5 प्रतिशत से ज्यादा नीचे, एसएंडपी और नैस्डैक भी एक प्रतिशत से अधिक गिरे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि युद्ध लंबा खिंचने और तेल महंगा होने से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। पेंटागन ने ईरान युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा का बजट मांगा है, जबकि अब तक खर्च 11 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।