इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होने से पहले 3 बड़े घटनाक्रम

  • पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आज रात आने का ट्वीट डिलीट किया
  • ईरान ने ट्रंप के शांति प्रस्ताव को खारिज किया, कहा- 3 प्वाइंट्स का उल्लंघन किया गया
  • ईरान के परमाणु एजेंसी प्रमुख ने कहा- यूरेनियम संवर्धन ईरान का अधिकार। सीज़फायर पर बातचीत के लिए इसे मानना ज़रूरी
ईरान-यूएस सीज़फायर पर इस्लामाबाद में शुक्रवार से शुरू होने वाली बातचीत पर संकट के बाद मंडरा उठे हैं। यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्री प्रस्ताव को कूड़ेदान में फेंकने के बाद से तीन बड़े घटनाक्रम हुए, जिससे यही लग रहा है कि बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल लग रही है। हालांकि ईरान से वहां की संसद के स्पीकर गालिबफ और अमेरिका से उपराष्ट्रपति जेडी वैंस अपने-अपने देशों के डेलीगेशन के साथ आने वाले थे। 

ईरानी राजदूत ने पोस्ट डिलीट की 

पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर वो पोस्ट डिलीट कर दी, जिसमें कहा गया था कि एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल गुरुवार रात इस्लामाबाद पहुंचेगा। बाद में दूतावास के एक अधिकारी ने एएफपी को बताया कि यह पोस्ट "समय से पहले" डाली गई थी। राजदूत रजा अमीरी मोग़दाम ने गुरुवार सुबह X पर एक पोस्ट में कहा कि एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल "ईरान द्वारा प्रस्तावित 10 बिंदुओं पर गंभीर वार्ता के लिए आज रात इस्लामाबाद पहुंचेगा"। लेकिन पोस्ट को कुछ ही समय बाद डिलीट कर दिया गया।
इस्लामाबाद स्थित ईरानी दूतावास के एक अधिकारी ने कहा कि पोस्ट "कुछ मुद्दों" के कारण हटाई गई। लेकिन उन्होंने यह बताने या पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि डेलीगेशन के गुरुवार रात को पहुंचने की उम्मीद है या नहीं।
इस पोस्ट को डिलीट करने से आगमन के कार्यक्रम को लेकर नई अनिश्चितता पैदा हो गई है, हालांकि अमेरिका और ईरान दोनों ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही शांति वार्ता में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस शनिवार को इस्लामाबाद में मध्य पूर्व युद्ध पर अमेरिकी वार्ता का नेतृत्व करेंगे। इसी तरह ईरानी संसद के स्पीकर गालिबफ गुरुवार रात पहुंचने वाले हैं। 
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ईरान ने ट्रंप का पीस प्रस्ताव खारिज किया, कहा- 3 शर्तों का उल्लंघन

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर एमबी गालिबफ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान के 10-पॉइंट प्रस्ताव की तीन प्रमुख शर्तों का उल्लंघन कर दिया है। ईरान ने सीजफायर को "अनुचित" (unreasonable) बताया और अमेरिका के प्रति "गहरा अविश्वास" जताया।
ईरानी बयान में कहा गया, "अमेरिका के प्रति हमारा गहरा ऐतिहासिक अविश्वास उसके सभी प्रकार की प्रतिबद्धताओं के बार-बार उल्लंघन से उपजा है, और यह पैटर्न एक बार फिर दोहराया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद स्वीकार किया है कि ईरान का 10-पॉइंट प्रस्ताव बातचीत का 'व्यावहारिक आधार' (workable basis) है और इन वार्ताओं का मुख्य ढांचा है। लेकिन इस प्रस्ताव की तीन शर्तों का अब तक उल्लंघन हो चुका है।"

ईरान के मुताबिक यूएस ने इन 3 शर्तों का उल्लंघन किया

ईरानी बयान के अनुसार, अमेरिका द्वारा उल्लंघन की गई तीन शर्तें निम्नलिखित हैं:
  • लेबनान में सीजफायर की पहली शर्त का पालन न करना: ईरान के 10-पॉइंट प्रस्ताव की पहली शर्त में लेबनान समेत सभी जगहों पर तत्काल सीजफायर शामिल था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इसे "तत्काल और हर जगह, जिसमें लेबनान और अन्य क्षेत्र शामिल हैं, प्रभावी सीजफायर" बताया था। लेकिन इसका पालन नहीं किया गया।
  • ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन का प्रवेश: फार्स प्रांत के लार शहर में एक यूएस ड्रोन को मार गिराया गया। यह ईरानी हवाई क्षेत्र के किसी भी आगे उल्लंघन पर रोक लगाने वाली शर्त का सीधा उल्लंघन था।
  • ईरान के यूरेनियम संवर्धन (enrichment) के अधिकार से इनकार: प्रस्ताव की छठी शर्त में ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को शामिल किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

ईरानी स्पीकर गालिबफ के बयान में आगे कहा गया, "बातचीत शुरू होने से पहले ही 'बातचीत का व्यावहारिक आधार' खुलेआम और स्पष्ट रूप से उल्लंघन कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में द्विपक्षीय सीजफायर या वार्ता अनुचित है।"

ईरान की परमाणु एजेंसी प्रमुख का बयान

ईरान की परमाणु एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने भी कहा कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार हमारा हक। इस प्वाइंट को बनाए रखना सीजफायर बातचीत के लिए "आवश्यक" है। उन्होंने अमेरिकी मीडिया एपी को बताया, "यह उन जरूरी चीजों में से एक है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है।" उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरान के 10-पॉइंट स्थायी सीजफायर प्लान में यूरेनियम संवर्धन को शामिल करने से इनकार करने की ओर इशारा किया। ट्रंप ने इससे पहले बयान दिया था कि ईरान ने अब यूनियन संवर्धन की अपनी ज़िद छोड़ दी है।

उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का ईरान के प्रस्ताव पर बयान

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने दावा किया है कि तेहरान ने अपने 10 सूत्री प्रस्ताव के तीन अलग-अलग संस्करण पेश किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनमें से एक को एआई टूल चैटजीपीटी द्वारा लिखा गया था। वैंस ने सीएनएन को बताया, "पहला 10 सूत्री प्रस्ताव, जिसे स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को प्रस्तुत किया गया था, और हमें लगता है कि इसे चैटजीपीटी द्वारा ही लिखा गया था, तुरंत खारिज कर दिया गया।" उन्होंने आगे कहा कि प्रस्ताव का दूसरा संस्करण, जो अमेरिकी, पाकिस्तानी और ईरानी वार्ताकारों के बीच "बार-बार" हुई चर्चाओं के बाद तैयार किया गया था, "कहीं अधिक तर्कसंगत" था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अपने 'ट्रुथ' सोशल मीडिया पोस्ट में संदर्भित प्रस्ताव के अनुरूप था। लेकिन वैंस ने बताया कि एक तीसरा संस्करण भी सामने आया है, जिसे उन्होंने पहले संस्करण से भी अधिक "अतिवादी" बताया। उसके बारे में उन्हें सोशल मीडिया से पता चला।

अमेरिका का स्टैंड 

8 अप्रैल 2026 को व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा था कि ईरान का शुरुआती 10-पॉइंट प्रस्ताव “सैद्धांतिक रूप से अगंभीर और अस्वीकार्य है”। उन्होंने कहा:“राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी बातचीत करने वाली टीम ने कूड़ेदान में फेंक दिया।” उन्होंने आगे कहा कि यह “ईरान की विश लिस्ट” (wish list) जैसा था, जिसे ट्रंप कभी स्वीकार नहीं कर सकते। ईरान को इसका पता देर से लगा या फिर उसने रणनीतिक चुप्पी बनाए रखी ताकि सीज़फायर घोषित होने के बाद अमेरिका का पर्दाफाश किया जा सके।
दुनिया से और खबरें
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में इसी हफ्ते बातचीत होने वाली है। दोनों पक्षों ने सीजफायर समझौते के बाद इसे सफल बताया था, लेकिन समझौते की घोषणा के बाद भी ईरान और खाड़ी के अरब देशों पर अतिरिक्त ड्रोन और मिसाइल हमले हुए।
इस बीच, इसराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया। बुधवार को बेरूत के व्यावसायिक और आवासीय इलाकों पर हमले किए गए, जो लड़ाई का सबसे घातक दिन साबित हुआ। इसमें कम से कम 250 लोगों की मौत हो गई। आपातकालीन टीमें रात भर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास करती रहीं। इस घटना से ईरान गुस्से में आ गया। दुनिया के तमाम देशों ने इसकी निन्दा की। अमेरिका की ओर से कोई निन्दा नहीं की गई।