अमेरिकी नौसेना इस बात की जांच कर रही है कि क्या USS Gerald R. Ford बेड़े पर तैनात कुछ सैनिकों ने अपनी तैनाती समाप्त कराने के लिए जानबूझकर अपने ही जहाज़ में आग लगाई। यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड पर आग लगने की घटना को लेकर अमेरिकी मीडिया में कई तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि अमेरिकी सैनिक लगातार युद्ध में रहने से ऊब गए हैं और वे अब वापस यूएस में अपने घरों को लौटना चाहते हैं। हालांकि इसे विद्रोह तो नहीं माना गया लेकिन यह घटना उससे कम भी नहीं है। 

अमेरिका का सबसे महंगा जंगी बेड़ा

13 अरब डॉलर की लागत से बना यह विमानवाहक पोत, जो मानव इतिहास का सबसे महंगा युद्धपोत (जंगी बेड़ा) माना जाता है, अब अगले सप्ताह ईंधन भरने, मरम्मत और 12 मार्च को लगी आग की औपचारिक जांच के लिए ग्रीस के Souda Naval Base की ओर मोड़ा जा रहा है। इस आग से जहाज़ के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुँचा और 600 से अधिक क्रू सदस्यों के पास ठीक से सोने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा। ग्रीस के प्रतिष्ठित दैनिक अख़बार Kathimerini ने सीधे तौर पर इस प्रस्तावित पोर्ट कॉल की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से यह विवरण प्रकाशित किया। जांच में यह संभावना भी शामिल है कि यह घटना क्रू मेंबरों द्वारा जानबूझकर की गई तोड़फोड़ का परिणाम हो सकती है।

अमेरिकी सैनिकों पर शक क्यों

यह जंगी जहाज़ जून 2025 से समुद्र में तैनात है। अमेरिकी नौसेना के वाइस चीफ ऑफ नेवल ऑपरेशंस एडमिरल जिन किल्बी ने सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को बताया था कि यह तैनाती लगभग 11 महीने तक चलेगी और जहाज़ की वापसी कम से कम मई से पहले नहीं होने की उम्मीद है। क्रू को महीनों पहले बताया गया था कि वे जल्द घर लौटेंगे। लेकिन तैनाती पहले बढ़ाई गई, फिर दोबारा बढ़ाई गई, और अंततः उन्हें 2003 के बाद मध्य-पूर्व के सबसे बड़े सैन्य अभियान में मोड़ दिया गया। अब कुछ लोगों ने शायद यह मान लिया कि बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता आग ही है।
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अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह आधुनिक अमेरिकी नौसेना के इतिहास की सबसे गंभीर आंतरिक अनुशासनात्मक घटनाओं में से एक होगी। युद्ध क्षेत्र में क्रू द्वारा अपने ही जहाज़ को नुकसान पहुँचाना केवल खराब भोजन या मौसम की वजह से नहीं होता। यह तब होता है जब संस्थागत दबाव सैनिक शक्ति को उस सीमा तक धकेल देता है जहाँ मिशन स्वयं असहनीय लगने लगता है। 
11 महीने समुद्र में रहना, खाड़ी क्षेत्र के हवाई अड्डों पर रोज़ाना ईरानी ड्रोन हमले, 17 दिनों में 11 रीपर ड्रोन गिराए जाना, खाड़ी देशों का वाशिंगटन पर संघर्ष को रोकने के बजाय और बढ़ाने का दबाव, कोई रोटेशन जहाज़ नहीं, कोई राहत बल नहीं, और युद्धविराम की कोई संभावना नहीं। इन सबके बीच अमेरिकी नौसैनिक शक्ति का प्रतीक यह विमानवाहक पोत अब ग्रीक बंदरगाह में खड़ा होगा क्योंकि उसके 600 नाविकों के पास सोने की जगह तक नहीं बची।
ईरान युद्ध में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में यही एकमात्र अमेरिकी विमानवाहक पोत था। इसे लगातार नौसैनिक तैनाती, जो काफ़िलों की सुरक्षा करने, ईरानी समुद्री माइंस को रोकने और कृषि सीज़न के दौरान शक्ति प्रदर्शन के लिए बनाया गया था- अब अस्थायी रूप से अपने केंद्रीय स्तंभ से वंचित हो जाएगी। मरम्मत में कम से कम कई दिन लग सकते हैं, जबकि जांच और लंबी चल सकती है। हर वह दिन जब यह जहाज़ क्रेट में रहेगा, उस दिन होर्मुज़ समुद्री जैसे संवेदनशील समुद्री चोक-पॉइंट पर अमेरिका की हवाई ताकत कमज़ोर रहेगी।
क्रेट के बाद जहाज़ के फिर से खाड़ी के पानी में लौटने की उम्मीद है और 11 महीने की तैनाती का समय-सीमा अभी भी लागू मानी जा रही है। लेकिन तोड़फोड़ की यह जांच एक ऐसी सच्चाई उजागर करती है जिसे कोई भी तैनाती आदेश नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता- मशीन के भीतर मौजूद इंसान टूट रहे हैं।
रणनीतिक सिद्धांत नहीं टूटते। क्षेत्रीय कमांडर अवकाश के लिए आवेदन नहीं करते। स्थायी आदेशों को सोने के क्वार्टर की ज़रूरत नहीं होती। समुद्री माइंस का मनोबल नहीं गिरता। आधुनिक इतिहास की सबसे सस्ती नाकेबंदी रेडियो सेट और सीलबंद आदेशों पर चल सकती है, जबकि मानव इतिहास का सबसे महंगा युद्धपोत बंदरगाह की ओर मुड़ जाता है क्योंकि उसका अपना क्रू शायद घर लौटने के लिए आग का सहारा ले रहा है।
होर्मुज समुद्री मार्गों के पीछे फंसी खाद की खेप को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह विमानवाहक पोत खाड़ी में है या क्रेट में। अमेरिकी या एशियाई खेतों में बुवाई का कैलेंडर जांच का इंतज़ार नहीं कर सकता। मिडिल ईस्ट और होर्मुज के चोक-पॉइंट पर तैनात यूएस सैन्य कमांडों की थकान 13 अरब डॉलर के जंगी जहाज़ पर भारी पड़ गई है। युद्धपोत इस तरह डिज़ाइन किए गए हैं कि वे कुछ भी महसूस ही न करें लेकिन सैनिक तो इंसान हैं। वे थकान भी महसूस करेंगे, वे आग भी लगा सकते हैं।