ईरान ने चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल से Google, Apple सहित 18 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। जानिए इस धमकी के पीछे की वजह क्या है।
अमेरिकी टेक कंपनियों को ईरान की धमकी। (AI इमेज)
ईरानी सेना ने अब गूगल, एप्पल समेत 18 अमेरिकी टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रीयल कंपनियों पर हमले की घोषणा की है। ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने कहा है कि 1 अप्रैल 2026 से ये कंपनियां उसके निशाने पर होंगी। ईरान इसे अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरानी क्षेत्र पर हमलों और हत्याओं का बदला बता रहा है।
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक़ आईआरजीसी ने 18 कंपनियों की लिस्ट जारी की है। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, इंटेल, आईबीएम, टेस्ला, बोइंग जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि इन कंपनियों की मध्य पूर्व में यूनिटों को तबाह किया जाएगा।
ईरानी सेना का बयान क्या कहता है?
ईरानी सेना यानी आईआरजीसी ने तस्नीम न्यूज एजेंसी के जरिए कहा, 'ये कंपनियां अब से हमारे वैध निशाने हैं। अमेरिकी इनफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी और एआई कंपनियां आतंकवादी कार्रवाइयों में निशाना बनाने और ट्रैक करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। 1 अप्रैल को तेहरान में समय शाम 8 बजे से हर आतंकवादी कार्रवाई (ईरान में हत्या) के बदले इन कंपनियों की एक इकाई तबाह की जाएगी।' ईरानी सेना ने इन कंपनियों के कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वे तुरंत अपने कार्यालय छोड़ दें ताकि उनकी जान बच सके। आसपास रहने वाले लोगों को भी इलाका खाली करने की सलाह दी गई है।
किन कंपनियों पर खतरा?
ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिका और इसराइल को एआई, सैटेलाइट, ड्रोन और डेटा एनालिसिस के जरिए लक्ष्य चुनने और हमले करने में मदद करती हैं। ईरानी सेना ने जो सूची जारी की है उनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, इंटेल, आईबीएम के अलावा, टेस्ला, बोइंग, मेटा, Nvidia, Palantir, ऑरेकल, Cisco, एचपी, डेल, जेपी मॉर्गन, जीई आदि शामिल हैं। अमेरिका एआई का कैसे इस्तेमाल कर रहा है?
अमेरिका इस युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का बहुत भारी इस्तेमाल कर रहा है। एआई सैटेलाइट इमेज, ड्रोन वीडियो, संचार जासूसी और रीयल-टाइम डेटा को तेजी से प्रोसेस करता है। इससे पैटर्न पहचानकर संभावित लक्ष्यों को आसानी से ट्रैक किया जाता है। एआई से टारगेटिंग बहुत तेज हो गई है। पहले जो काम दिनों में होता था, अब सेकंडों में हो जाता है। अमेरिकी सेना Palantir जैसी कंपनियों के Maven Smart System का इस्तेमाल कर रही है, जो लक्ष्य साधने में मदद करता है।
ईरान कहता है कि ये टेक कंपनियां अमेरिकी सैन्य अभियानों का अहम हिस्सा हैं, इसलिए अब ये भी वैध सैन्य लक्ष्य हैं।
युद्ध के हालात क्या?
इन कंपनियों को ईरान से यह ख़तरा तब आया है जब फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका-इसराइल ने ईरान पर सीमित सैन्य अभियान शुरू किया। ईरान ने जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉक किया, मिसाइल-ड्रोन हमले किए और अब आर्थिक-तकनीकी मोर्चे पर हमले की धमकी दी है। ईरान पहले भी अमेरिकी कंपनियों की ईकाइयों को निशाना बनाने की बात कह चुका है, लेकिन इस बार 1 अप्रैल से ठोस समयसीमा देकर खतरा ज्यादा गंभीर लग रहा है।
दुनिया पर क्या असर?
मध्य पूर्व में इन कंपनियों के ऑफिस, डेटा सेंटर या रिसर्च सेंटर खतरे में पड़ सकते हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा चिंता बढ़ गई है। वैश्विक टेक इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ये कंपनियां दुनिया भर में काम करती हैं। तेल की कीमतें पहले से ही ऊंची हैं, नया संघर्ष और बढ़ सकता है। अभी यह साफ नहीं है कि आईआरजीसी इस धमकी को कितना अमल में लाएगी। पहले भी कई बार ऐसी चेतावनियां आई हैं, लेकिन इस बार समयसीमा के साथ आने से तनाव और बढ़ गया है।